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बेटी_मेरी

यूं ही नहीं मान्यता है बिंदी की,

स्त्री में छुपे भद्रकाली के रूप को शांत करती है ।

यूं ही नहीं लगाती काजल,नकारात्मकता निषेध हो जाती है जिस आंगन स्त्री आंखों में काजल लगाती है

होंठों को रंगना कोई आकर्षण नहीं,प्रेम की अद्भुत पराकाष्ठा को चिन्हित करती हुई जीवन में रंग बिखेरती है ।नथ पहनती है,तो करुणा का सागर हो जाती है ।और कानों में कुंडल पहनती है ,तो संवेदनाओं का सागर बन जाती है ।चूड़ियों में अपने परिवार को बांधती है,इसीलिए तो एक भी चूड़ी मोलने नहीं देती ।पाजेब की खनक सी मचलती है,प्रेम में जैसे मछली हो जाती है ।वो स्त्री है साहब… स्वयं में ब्रह्मांड लिए चलती है बेटी_मेरी

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It is not for nothing that the dot is recognized,

Calms down the form of Bhadrakali hidden in a woman.

Mascara is not applied just like that, negativity is prohibited in the courtyard where the woman applies mascara

Coloring the lips is not an attraction, marking the wonderful culmination of love, it spreads colors in life. If she wears a nath, then she becomes an ocean of compassion. And if she wears a coil in her ears, then she becomes an ocean of sensations. She binds her family, and that’s why she doesn’t allow even a single bangle to be bought. Like the tinkling of anklets, she becomes like a fish in love. Sir, she is a woman… My daughter carries the universe in herself.

Prabhakar Kumar (Jamui).

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