Article

ख्याल आता है कि…

ख्याल आता है कि परिंदे तक उदास हो जाते हैं. उनके आवाज़ की खनक टूटी हुई लगती है. घुघ्घू के फूलते पिचकते कंठ से निकली घू- घू की वेदना बांस की फुनगी पर बैठा कौवा ग़ौर से सुनता है जब सह  नहीं पाता तो उड़ जाता है बग़ैर कुछ बोले.

रात में कब परिजात शिवली  में जाता है कब सफ़ेद को गुलाबी सोखते सोखते झरने लगता है इसका मर्म केवल चांदनी जानती है और न कोय. परिजात शिवली, शिवली परिजात यह खेल रात भर चलता है  चाँदनी पूरे वेग से लपकती है परिजात की तरफ़ आकर चुपचाप बैठ जाती है डार के छोर पर लेकिन इतना भी भार उसे नहीं सहा जाता लुढ़क कर नीचे जा गिरता है. परिजात श्राप देता है चाँदनी ! झरोगी तुम भी रात भर  झरोगी अल सुबह जब तुम्हें तलाशते  हुए  सूरज आयेगा तो दूब के  विस्तार पर तुम्हें रंगे हाथ पकड़ लेगा, घास के दमकते मुखमण्डल पर तुम्हारा चमकना सूरज को अंदर तक झकझोर जायगा और  तुम सँभलो तब  तक वह उठ चुका होगा , यह कहते हुए चाँदनी !

तुम अपने झड़े हुए स्वेत बूँदों पर मत इतराओ अभी आता होगा हल बैल लिये किसान नंगे पैर के खुरदुरे तलवे से दूब समेत तुम्हें रौंद कर माटी की कोख में तीसी का बीज डाल देगा और  बग़ैर किसी फल आकांक्षा के चुपचाप चला जायगा अपने ड्योढ़ी  पर. तब तक सूरज आ चुका होगा, दोनों बतियायेंगे दुनिया जहान की बातें परू की तरह धोखा मत दिहा सूरज भगवान!

ख़याल रखअ, अबकी साल चैत नौमी के पूजन  करब बिधि बिधान से. बात अभी चलती, लेकिन इसी इन वक्त पर किसी को गरियाते हथहो देते मंझारी देखाय पड़ गई आव भौजाई बड़ा मोटका काजर लगाये अहू. भिऊरहा वाली छोटकी पतोहिया पोत दिहिस  कल तुलसी ब्याह  रहा न? कातिक महीना आ देवर! तुलसी क महीना भगवान  विष्णु के साथे तुलसी बियाह तुलसी क  काजर तोहरी आँखें में हमरे जमाने में औरते मर्द से काजर लगवाती रहीं यहाँ से मामला गाली गलौज पर चला जाता है. यह नियमित विधान है.

गाँव का यह रिश्ता एक दूसरे को संतोषी बना देता है. किसान के गगरी का अन्न ज़मीन में है, बाढ़ आयी सूखा पड़ा फ़सल बर्बाद. किसान संतोष कर के बैठ जाता है पर उदासीन नहीं है. बार बार यही उपक्रम करता है. देश भी इसी पर टिका है. मंझारी और लम्मरदार की नोक झोंक संताप सोखता है दुःख अभाव सब और शहर इससे अब भी महरूम है.

==========  ===========  ============

It comes to my mind that…

It comes to mind that even the birds become sad. The timbre of his voice seems broken. The crow sitting on the bamboo shoot listens carefully to the pain of ghu-ghu that came out of the puffed-up voice of the ghughu. When it cannot tolerate it, it flies away without saying anything.

When Parijat goes to Shivli at the night, when the white falls like a pink-soaked waterfall, its meaning is known only by the moonlight and no one else. Parijat Shivli, Shivli Parijat This game goes on for the whole night, the moonlight rushes towards Parijat at full speed, she silently sits at the end of the door, but she cannot bear that much weight, she rolls down and falls. Parijat curses Chandni! Zarogi, you will also sleep all night. Al morning, when the sun comes in search of you, it will catch you red-handed on the expanse of the grass, your shine on the glowing face of the grass will shake the sun inside, and by the time you wake up, it will have risen, saying this. Moonlight!

Don’t be proud of your fallen white drops, now the farmer with the plow will come with the bullocks with the rough soles of his bare feet, will trample you along with the dung and put the seed of Tisii in the soil’s womb and will silently go to his courtyard without any expectation of fruit. By then the sun will have come, and both will tell the world’s things, like Paru, don’t cheat Sun God!

Keep in mind, this year’s worship of Chait Naumi should be done according to the rules and regulations. The talk would go on now, but at this very moment, Manjari was seen waving hands to someone. Bhooraha wali chhotki patohiya pot dihis tomorrow Tulsi is getting married, isn’t it? Katik month, brother-in-law! The month of Tulsi with Lord Vishnu Tulsi marriage Tulsi Ka Kajar in two eyes In our times, women used to get men to apply Kajar, from here the matter goes on abusing. This is regular legislation.

This relationship of the village makes each other satisfied. The grain of the farmer’s bag is in the ground, there was a flood, and the drought ruined the crop. The farmer sits down satisfied but is not indifferent. He does the same thing again and again. The country also rests on this. The tip of Manjhari and Lammardar soaks up the anger, sorrow, and lack of everything and the city is still bereft of it.

  Prabhakar Kumar.

: [responsivevoice_button voice="Hindi Female"]

Related Articles

Back to top button