Health

अगस्त…

एक ऐसे पेड़ की बात करते हैं कि, जिसे हम सभी बारिश के मौसम में इसके बीज को लगाते हैं और अगस्त के मौसम में इसके पेड़ उगते हैं. कहा जाता है कि, जहां अधिक बारिश होती है वहां यह पेड़ अपने-आप ही फलता-फूलता है या यूँ कहें कि, जहां जल(पानी) की मात्रा अधिक होती है, वहीं यह पेड़ अधिक फलता-फूलता है. अगस्त का पेड़ पुरे भारत में पाया जाता है लेकिन बंगाल में यह पेड़ ज्यादा पाया जाता है. अगस्त के पेड़ को कई नामों से पुकारा जाता है जैसे संस्कृत में अगस्त, अगस्त्य, अगति, मुनिद्रुम, मुनिवृक्ष, मुनिपुष्प, वंगसेन और अगस्तिये कहते हैं वहीं हिंदी में हथिया, अग्थिया और अगस्त कहते हैं, बंगाली में बक, गुजराती में अग्थियों, तेलगु में अनीसे व अवसी, तमिल में अगस्ति और अंग्रेजी में सेस्बेन है और इसका वानस्पतिक नाम सेस्बानिया ग्रांडीफ्लोरा के नाम से जाना जाता है. बताते चलें कि, इस पेड़ का नाम अगस्त इसीलिए पड़ा कि, इस पेड़ के नीचे बैठकर ऋषि-मुनि तपस्या करते थे, इसीलिए इसका नाम अगस्त पड़ा. इस पेड़ का वर्णन हमारे धार्मिक ग्रन्थों में भी मिलता है.

बताते चले कि, अगस्त का पेड़ एक औषधीय बृक्ष होता है. इस वृक्ष के पत्ते, जड़, फल, बीज और छाल का प्रयोग औषधी या दवाई बनाने के काम में आता है, यंहा तक की इसके बीजों का तेल भी निकाला जाता है. इसकी पत्तियों में प्रोटीन, कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन और विटामिन ऐ,बी. और सी पाया जाता है जबकि, इसके फूलों में विटामिन बी और सी पाया जाता है. इसकी छाल से टैनिन और लाल रंग का राल निकलता है. जबकि अगस्त के फूल के बीजों में 70% प्रोटीन और एक ख़ास प्रकार का तेल भी पाया जाता है, इसके अलावा अन्य पोषक तत्व भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. इसकी फूलों में बिटामिन बी और सी  होने के कारण त्वचा सम्बन्धी बीमारियों में इसका प्रयोग खासतौर पर किया जाता है.

अगस्त के फूल का स्वाद कड़वा, मीठा और कसैला होता है. इसके फूल का प्रयोग करने से कई बीमारियाँ ठीक हो जाती है जैसे:- :- पित्त , कफ , शीतल , रुक्ष ,तिक्त , शीतवीर्य ,वटकर और प्रतिशयाय. जबकि अगस्त के फूल  जो कच्चे होते हैं उनकी सब्जी बनाई जाती है, और इसकी पकी हुई फल का प्रयोग करने से पित्त, कफ और विषम ज्वर नाशक होता है. जो दस्तावर रुचिकारक गुणवता धारक , त्रिदोष दर्द नाशक, पाण्डु रोग निवारक , विष , यादास्त बढाने,गुल्म और शोथ सम्बन्धी बीमारी को दूर करता है. अगस्त पेड़ की छाल जो पाचन शक्ति को भी बढाने में सहायक होता है. इसके सेवन से खांसी –जुकाम, खून साफ़ करना और मिर्गी रोग को भी दूर करता है. इसकी छाल का स्वाद कसैला होता है इसका प्रयोग करने से शारीरिक ताकत में बढ़ोतरी होती है.

जिन व्यक्तियों को सिरदर्द से ज्यदा परेशानी होती है, उन्हें  फूल और पत्ते का प्रयोग करना चाहिए, जबकि कफ से ज्यदा परेशान हो रहें हों तो शहद और मुली के रस में इसका प्रयोग करना चाहिए.

अगस्त का पेड़ देखने में बहुत अधिक बड़ा तो नहीं होता है लेकिन देखने में काफी आकर्षक और मनभावन होता है. इसकी डालियाँ घनी और तना सीधा होता है. इसकी पत्तियां  देखनें में इमली के पत्तों जैसी ही होती है. जब इस्क्ले पेड़ छोटे होते हैं तभी से ही इसके पेड़ में फूल आने लगते हैं और फूल देखने में अर्धचन्द्राकार होते हैं. अगस्त के पेड़ की चार प्रमुख प्रजातियां पाई जाती है, जिनमें श्वेत(उजला), पीत(पीला), नीला और लाल रंग के होते हैं. बताते चलें कि, सबसे अधिक सफेद(उजला) रंग के फूल ही अधिक मिलते हैं. अगस्त के पेड़ की आयु कम होती है और ये जल्दी बढ़ते हैं, और इसकी लकड़ी मुलायम होती है व हल्की हवा या यूँ कहें कि आंधी आने पर इसकी टहनी प्राय: टूट जाती है. इस पेड़ की लम्बाई अमुनत: 20 फीट तक की होती हैं और एक लम्बी डंटल में करीब 25 जोड़े पत्ते होते हैं जो नोक आकार के होते हैं. बताते चलें कि, इसके फूल में 20-25 हल्के रंग के बीज भी होते हैं.कहा जाता है कि, अधिक मात्र में अगस्त का प्रयोग करने से पेट में गैस की शिकायत होती है.

अगस्त के प्रयोग:-

कफ विकार:- लाल अगस्त की जड़ अथवा छाल का रस निकालकर शक्ति के अनुसार 10 ग्राम से 20 ग्राम की मात्रा का सेवन करना चाहिए. अगर यही औषधि बच्चो को देनी होतो, केवल इसके पत्ते का 5 बूंद रस निकालकर शहद के साथ पिलायें. यदि दवा का असर अधिक हो, तो मिश्री को पानी में घोलकर पिलायें.

आधाशीशी (आधे सिर का दर्द) :- इस रोग में जिस ओर सिर में दर्द होता हो, उसके दूसरी तरफ की नाक में अगस्त के फूलों अथवा पत्तों की 2-3 बूंदे रस को टपकाने से तुरंत लाभ होता है.

सूजन:- लाल अगस्त और धतूरे की जड़ को साथ-साथ गरम पानी में घिसकर उसका लेप करना चाहिए. इससे तुरंत ही सभी प्रकार की सूजन का नाश होता है.

जुकाम से नाक रुंघन एवं सिर दर्द:- अगस्त के पत्तों का दो बूंद रस नाक में टपकाना चाहिए.

मिर्गी:- अगस्त के पत्तों का चूर्ण और कालीमिर्च के चूर्ण को बराबर मात्रा में लेकर गोमूत्र के साथ बारीक पीसकर मिर्गी के रोगी सुंघाने से लाभ होता है.

यादाशत शक्ति को बढ़ाने के लिए :- अगस्त के बीजों का चूर्ण 3 से 10 ग्राम तक गाय के ताजे 250 मिलीलीटर दूध के साथ सुबह-शाम कुछ दिन तक खाने से स्मरण शक्ति तेज हो जाती है.

 बताते चले कि, अगस्त के फूलों की सब्जी या शाक बनाकर सुबह-शाम खाने से रतौधी दूर हो जाती है.अगस्ता के फूलों का मधु आंखों में डालने से धुंध या जाला दूर होता है.अगस्त के फूलों का रस 2-2 बूंद आंखों में डालने से आखों का धुंधलापन दूर हो जाता है.अगस्त की पत्तियों के काढ़े से गरारे करने से सूखी खांसी, जीभ का फटना, स्वरभंग तथा कफ के साथ रुधिर (खून) के निकलने आदि रोगों में लाभ मिलता है.अगस्त के 20 ग्राम पत्तों को 400 मिलीलीटर पानी में उबालकर, 100 मिलीलीटर शेष रहने पर 10-20 मिलीलीटर काढ़े को पिलाने से कब्ज दूर हो जाती है.

========== ===========  ==========

August…

Let us talk about a tree which we all plant its seeds in the rainy season and its trees grow in the August season. It is said that, where there is more rain, this tree automatically flourishes or in other words, where the amount of water is more, this tree flourishes more. August tree is found all over India but this tree is found more in Bengal. The August tree is called by many names such as August, Agastya, Agati, Munidrum, Munivriksha, Munipushpa, Wangsen and Agastiye in Sanskrit, Hathiya, Agthiya and August in Hindi, Bak in Bengali, Agathiyon in Telugu, In Hindi it is Anise and Avasi, in Tamil it is Agasti and in English it is Sesbane and its botanical name is known as Sesbania Grandiflora. Let us tell you that this tree was named August because sages and sages used to do penance sitting under this tree, hence it was named August. The description of this tree is also found in our religious texts.

Let us tell you that the August tree is a medicinal tree. The leaves, roots, fruits, seeds and bark of this tree are used to make medicines; even oil is extracted from its seeds. Its leaves contain protein, calcium, phosphorus, iron and vitamins A and B whereas, Vitamin B and C are found in its flowers. Tannin and red-coloured resin come out from its bark. While 70% protein and a special type of oil are also found in the seeds of the August flower, apart from this other nutrients are also found in abundance. Due to the presence of Vitamin B and C in its flowers, it is especially used in skin-related diseases.

The taste of August flowers is bitter, sweet and astringent. By using its flowers, many diseases can be cured such as:- Pitta, cough, cold, dry, bitter, cold semen, vatakar and pratishyaya. While vegetables of August flowers which are raw is made, and using its ripe fruit helps in reducing bile, cough and odd fevers. The glove which has delicious qualities, relieves pain in Tridosha, cures Pandu disease, improves memory, cures tumors and inflammatory diseases. Bark of August tree which is also helpful in increasing the digestive power. Its consumption also cures cough and cold, purifies blood and epilepsy. The taste of its bark is astringent and its use increases physical strength.

People who suffer a lot from headache should use flowers and leaves, while those who are troubled by phlegm should use it with honey and radish juice.

The August tree is not very big to look at but is quite attractive and pleasing to look at. Its branches are dense and the stem is straight. Its leaves look similar to tamarind leaves. Flowers start appearing on the Iskel tree when it is small and the flowers are crescent shaped in appearance. There are four main species of August tree, which are white, yellow, blue and red. Let us tell you that white colored flowers are mostly available. The life of the August tree is short and it grows quickly, and its wood is soft and its branches often break when there is a light wind or a storm. The height of this tree is usually up to 20 feet and a long stalk has about 25 pairs of leaves which are tip shaped. Let us tell you that its flower also contains 20-25 light colored seeds. It is said that using August in large quantities causes stomach gas.

Experiments of August:-

Cough Disorder: – Extract the juice of Red August root or bark and consume it in quantity of 10 grams to 20 grams as per the strength. If this medicine has to be given to children, just extract 5 drops of its leaf juice and give it to them with honey. If the effect of the medicine is more, then mix sugar candy in water and give it to the patient.

Adhashishi (Half Headache): – In this disease, dripping 2-3 drops of juice of August flowers or leaves in the nose on the other side of the headache gives immediate relief.

Swelling: – Grind the roots of Red August and Dhatura together in hot water and apply it. This immediately eliminates all types of swelling.

Runny nose and headache due to cold: – Two drops of juice August leaves should be dripped on the nose.

Epilepsy: – Taking the powder of August leaves and black pepper powder in equal quantities, grinding it finely with cow urine and smelling it is beneficial for epilepsy patients.

To increase memory power: – Consuming 3 to 10 grams of powder of August seeds with 250 ml of fresh cow’s milk in the morning and evening for a few days sharpens the memory power.

  Let us tell you that eating vegetable or vegetable of August flowers in the morning and evening cures night blindness. Putting honey of August flowers in the eyes removes fog or cobwebs. Put 2-2 drops of juice of August flowers in the eyes. By instilling it, blurred vision goes away. Gargling with the decoction of August leaves provides relief in diseases like dry cough, cracked tongue, hoarseness and bleeding with phlegm etc. Take 20 grams of August leaves. Constipation is cured by boiling it in 400 ml water and giving 10-20 ml decoction to the remaining 100 ml.

Rate this post
:

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!