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मिठास का दूसरा नाम है…

हिन्द का इतिहास अपने आप में अनोखा है एक समय था… जब कोई अजनबी किसी के दरवाजे पर पानी मांगता था तो मिश्री मिश्रीत दूध दिया जाता था, समय के परिवर्तन के साथ पहले  गुड़ की डली उसके बाद पानी दी जाती है. भारतीय परिवेश में अगर मीठा की बात आये तो सर्वप्रथम गन्ना की ओर ही बरबस ध्यान जाता है चुकिं, गन्ना हमारे देश का प्राकृतिक चीनी है या यूँ कहें कि, मिठास का दूसरा नाम गन्ना ही है. गन्ने के रस से कई तरह के मीठे पदार्थों का निर्माण किया जाता है जैसे:- गुड़, खांड, बूरा, शक्कर, मिश्री और चीनी. भारतीय परिवेश में मीठास प्राप्त करने के और कई श्रोत हैं जैसे:- मधुमक्खियों द्वारा फलों के रस से तैयार शहद (मधु), वहीं दक्षिन भारत में ताड़ से भी गुड़ और शक्कर तैयार की जाती है. पश्चिम एशिया देश  में खजूर का प्रयोग होता है तो, यूरोपीय देश चुकंदर से चीनी तैयार करते है. आयुर्वेदिक ग्रन्थों के अनुसार देवताओं ने भी मधुर रस भोजन का जिक्र किया है वहीं ब्रह्मांड पुराण के अनुसार भोजन के समापन पर मीठे पदार्थों का उल्लेख मिलता है. आयुर्वेदाचार्य सुश्रत ने भोजन के छ: प्रकार बताएं हैं:- चूष्म, पेय, लेह्य, भोज्य, भक्ष्य और चर्व्यपाचन. 

सम्पूर्ण विश्व में पैदा होनेवाली प्रमुख फसलों में एक प्रमुख फसल गन्ना भी है. बताते चलें कि, गन्ने का जन्म स्थान भारत ही है. गन्ना उत्पादन के मामले भारत का स्थान पहला है जबकि, बाजील और क्यूबा भी भारत के लगभग ही गन्ना का उत्पादन करते है. भारत में गन्ने की खेती मुख्यत: अर्ध उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों होती है, इस क्षेत्र में उत्तरर प्रदेश, उतरांचल, बिहार, पंजाब और हरियाणा हैं वहीं, मध्य-प्रदेश, बंगाल, राजस्थान और पूर्वोत्तर के राज्यों में भी गन्ने की खेती होती है, दूसरी तरफ दक्षिन भारत में भी व्यापक पैमाने पर खेती की जाती है. गन्ने को अंग्रेजी में “शुगर केन” कहते हैं वहीं, गन्ने का वानस्पतिक नाम सैकेरम वंश की पांच प्रमुख जातियों का प्रयोग किया जाता है. इन पाँचों के नाम इस प्रकार हैं… 1. सैकेरम आफिसिनेरम  2. सैकेरम साइनेन्स 3. सैकेरम बार्बेरी 4. सैकेरम रोबस्टम 5. सैकेरम स्पान्टेनियम…

आयुर्वेदाचार्य के आनुसार, गन्ने को दांतों से चबाकर खाने से खाना चाहिए चुकी, दांतों से चबाकर खाने से दांत मजबूत होते हैं. गन्ने का रस बेहद ही फायेदेमंद होता है चूँकि, गन्ने में कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन,मैग्नीशियम और फास्फोरस पाए जाते हैं, इनके अलावा और भी कई पोषक तत्व पाए जाते हैं,जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं साथ ही, दांतों की भी समस्या को दूर करने में मदद करता है. कहा जाता है कि, गन्ने का रस मधुमेह और कैंसर जैसी गम्भीर बीमारियों से लड़ने में मदद करता है. यह हीमोग्लोबिन के स्तर को बढाने में मदद करता है.गन्ने का रस शरीर में कालेस्ट्रोल का स्तर गिरता है साथ ही, धमनियों में फैट जमने नहीं देता है. इतना ही नहीं वजन कम करने में भी गन्ने का रस सहायक होता है और त्वचा को आकर्षक व चमकदार बनाये रखने में मदद करता है. गन्ने का रस त्वचा और चेहरे के लिए अत्यंत ही उपयोगी है, इसके लगातार प्रयोग से मुहांसे, त्वचा के दाग और झुरियों को दूर करने में मदद करता है. गन्ने का रस एनीमिया और जोंड्रिस को दूर करने में मदद करता है चूँकि गन्ने का रस बलवर्धक, वीर्यवर्धक, कफकारक, पाक तथा रस में मधुर, स्निग्ध, भारी, मूत्रवर्धक व ठंढा होता है.

यकृत की कमजोरी वाले, हिचकी, रक्तविकार, नेत्ररोग, पीलिया, पित्तप्रकोप व जलीय अंश की कमी के रोगी को गन्ना चूसकर ही सेवन करना चाहिए. इसके नियमित सेवन से शरीर का दुबलापन दूर होता है और पेट की गर्मी व हृदय की जलन दूर होती है. पेशाब की रुकावट व जलन भी दूर होती है. ध्यान रखें कि:- मधुमेह, कमजोर पाचनशक्ति, कफ व कृमि के रोगवालों को गन्ने के रस का सेवन नहीं करना चाहिए. कमजोर मसूढ़ेवाले, पायरिया व दाँतों के रोगियों को गन्ना चूसकर सेवन नहीं करना चाहिए.

नोट :- बाजार में मशीनों द्वारा निकाले गये गन्ने के रस में संक्रमन की सम्भावना अधिक रहती है अत: गन्ने का रस निकलवाते समय शुद्धता का ध्यान रखना चाहिए.

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The history of Hind is unique in itself, there was a time… When a stranger asked for water at someone’s door, sugar-mixed milk was given, with the change of time, jaggery nuggets were given first and then water. When it comes to sweets in the Indian environment, first of all, attention is paid to sugarcane, because sugarcane is the natural sugar of our country, or rather, the other name of sweetness is sugarcane. Many types of sweet substances are made from sugarcane juice like- Jaggery, Khand, Bura, Sugar, Mishri, and Sugar. There are many other sources of sweetness in the Indian environment, such as honey (honey) prepared by bees from the juice of fruits, whereas in South India jaggery and sugar are also prepared from the palm. Dates are used in West Asian countries, while European countries prepare sugar from beetroot. According to Ayurvedic texts, the deities have also mentioned sweet food, while according to the Brahmanda Purana, sweet things are mentioned at the end of the meal. Ayurvedacharya Susrat has given six types of food:- Chusham, Peya, Lehya, Bhojya, Bhakshya, and Charvyapachan.

Sugarcane is also one of the main crops grown in the whole world. Let us tell you that India is the birthplace of sugarcane. India ranks first in terms of sugarcane production, while Bazil and Cuba also produce almost the same amount of sugarcane as India. In India, sugarcane cultivation is mainly done in semi-tropical areas, Uttar Pradesh, Uttaranchal, Bihar, Punjab, and Haryana are in this area, while sugarcane cultivation is also done in the states of Madhya Pradesh, Bengal, Rajasthan, and North East, on the other hand, Cultivation is also done on a large scale in South India. Sugarcane is called “Sugar Cane” in English, while the botanical name of sugarcane is used for five major species of the Saccharum family. The names of these five are as follows… 1. Saccharum officinarum 2. Saccharum sinense 3. Saccharum barberry 4. Saccharum robustum 5. Saccharum spontaneum…

According to Ayurvedacharya, sugarcane should be eaten by chewing it with teeth, teeth become strong by chewing it with teeth. Sugarcane juice is very beneficial because calcium, potassium, iron, magnesium, and phosphorus are found in sugarcane, apart from these many other nutrients are found, which make the bones strong, as well as the problem of teeth. helps to remove. It is said that sugarcane juice helps in fighting serious diseases like diabetes and cancer. It helps in increasing the level of hemoglobin. Sugarcane juice lowers the level of cholesterol in the body and also does not allow fat to accumulate in the arteries. Not only this, but sugarcane juice is also helpful in reducing weight and helps in keeping the skin attractive and shiny. Sugarcane juice is very useful for the skin and face, its continuous use helps in removing acne, skin spots, and wrinkles. Sugarcane juice helps to remove anemia and gondris because sugarcane juice is tonic, seminal, phlegmatic, culinary, and sweet in juice, astringent, heavy, diuretic, and cold.

Patients suffering from liver weakness, hiccups, blood disorders, eye diseases, jaundice, gallstones, and deficiency of aqueous humor should consume sugarcane only by sucking it. Its regular intake removes the leanness of the body and removes stomach heat and burning sensation in the heart. Obstruction and burning sensation of urine also go away. Keep in mind that:- People suffering from diabetes, weak digestion, phlegm, and worms should not consume sugarcane juice. Patients with weak gums, pyorrhea, and teeth should not consume sugarcane by sucking it.

Note :- Sugarcane juice extracted by machines in the market has more chances of infection, therefore purity should be taken care of while extracting sugarcane juice.

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