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व्यक्ति विशेष – 741.

गीतकार भरत व्यास

भरत व्यास हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध गीतकार थे. उनका जन्म 6 जनवरी 1918 को बीकानेर में हुआ था. वो मूल रूप से पुष्करणा ब्राह्मण थे. बचपन से ही इनमें कवि प्रतिभा दिखने लगी थी. उन्होंने 17-18 वर्ष की उम्र तक लेखन शुरू कर दिया था.

भरत व्यास का पहला गीत आओ वीरो हिलमिल गाए वंदे मातरम था. वर्ष 1942 के बाद वे बम्बई आ गए उन्होंने कुछ फ़िल्मों में भी भूमिका निभाई थी. उन्होंने दो आँखे बारह हाथ, नवरंग, बूँद जो बन गई मोती जैसी फ़िल्मों में गीत लिखे हैं.

उन्होंने विभिन्न भाषाओं में गाने लिखे हैं, वे भारतीय संगीत इंडस्ट्री में अपनी साहित्यिक योगदान के लिए प्रसिद्ध हैं. उन्होंने बॉलीवुड फिल्मों के लिए कई गाने लिखे हैं और उनके शब्द और भावनाएं लोगों को भावनात्मक रूप से प्रभावित करने में मदद करती हैं. पं. भरत व्यास का निधन 4 जुलाई 1982 को हुआ था.

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मराठी नाटककार विजय तेंडुलकर

मराठी नाटककार विजय तेंडुलकर भारतीय नाटक और सिनेमा के क्षेत्र में प्रसिद्ध हैं। उन्होंने विविध विषयों पर आधारित कई सफल नाटक लिखे हैं और नाटक रंगमंच पर प्रदर्शित होते हैं।

विजय तेंडुलकर का जन्म 6 जनवरी 1943 को हुआ था. उन्होंने विशेष रूप से सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर आधारित नाटक लिखने के लिए अपनी पहचान बनाई है. उनके लिखे गए कुछ प्रमुख नाटकों में “श्रीरामपुर कॉमेडी”, “चेष्टा” और “खांडोबाच्या लौटर्यात खूप लाभ आहे” शामिल हैं.

विजय तेंडुलकर ने मराठी नाटकों के साथ-साथ हिंदी और इंग्लिश भाषा में भी लेखन किया है और उनका योगदान भारतीय साहित्य और नृत्य कला में महत्वपूर्ण माना जाता है. विजय तेंडुलकर का निधन 19 मई 2008 को पुणे में हुआ था.

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क्रिकेटर कपिलदेव

कपिलदेव ने भारतीय क्रिकेट को नए ऊचाईयों पर ले जाने वाले एक प्रमुख क्रिकेट खिलाड़ी के रूप में अपनी अद्भुत प्रदर्शन के लिए एक प्रमुख स्थान हासिल किया है. उनका जन्म 6 जनवरी 1959 को हुआ था और उन्होंने भारतीय क्रिकेट को एक नए दिशा देने में अपना योगदान दिया है.

कपिलदेव का असली नाम कपिल देव निखंट शर्मा है, लेकिन उन्हें कपिलदेव के नाम से ही अधिकता से जाना जाता है. उन्होंने भारतीय क्रिकेट को उस समय की सामंजस्यपूर्ण घटनाओं में से एक में मार्गदर्शन किया जब भारत वर्ष 1983 में विश्व कप क्रिकेट जीतने में सफल हुआ.

कपिलदेव एक ऑल-राउंडर खिलाड़ी थे, जिन्होंने बैटिंग और गेंदबाजी दोनों में उच्च स्तर का प्रदर्शन किया. उनकी आलराउंड क्षमताओं का सीधा परिचय वर्ष 1983 में विश्व कप में हुआ जब उन्होंने भारत को उस टूर्नामेंट की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने फाइनल मैच में वेस्ट इंडीज के खिलाफ 175 रनों की शानदार पारी खेली और उनकी गेंदबाजी ने भी महत्वपूर्ण विकेटें लीं.

कपिलदेव को 175* रन की इस पारी के लिए आज भी याद किया जाता है, जो उनकी बेहद उत्कृष्ट बैटिंग का प्रतीक है. इसके बाद, उन्होंने भारत के कप्तान के रूप में अपने नेतृत्व में टीम को और भी उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने का कार्य किया.

कपिलदेव को वर्ष 1994 में पद्म भूषण और वर्ष 2009 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया. उन्होंने अपने क्रिकेट कैरियर के बाद भी कई बड़े पदों पर कार्य किया है और आज भी वे क्रिकेट संबंधित कार्यों में सक्रिय रूप से शामिल हैं.

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संगीतकार ए आर रहमान

ए. आर. रहमान एक प्रमुख भारतीय संगीतकार, संगीत निर्देशक, गीतकार और संगीत प्रयोगशास्त्री हैं. उनका जन्म 6 जनवरी 1967 को चेन्नई, तमिलनाडु, भारत में हुआ था. उनका असली नाम एस. दिलीप कुमार है, लेकिन उन्हें ए. आर. रहमान के नाम से अधिक जाना जाता है.

ए. आर. रहमान ने अपनी कैरियर की शुरुआत बॉलीवुड के संगीत के क्षेत्र में की और तेजी से मशहूर हो गए. उनका पहला बॉलीवुड फिल्मों में संगीत देने का मौका “रोजा” (1992) से मिला, जिसके लिए उन्होंने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की श्रृंगार समिति पुरस्कार प्राप्त किया. इसके बाद, उन्होंने कई और बॉलीवुड फिल्मों के लिए संगीत दिया, जिनमें “ताल”, “दिल से”, “लगान”, “रंग दे बसंती”, “जब तक है जान”, “गजनी”, “रॉकस्टार”, “दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे”, “स्वदेस”, “ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा”, “बजरंगी भाईजान”, और “दिल धड़कने दो” शामिल हैं.

ए. आर. रहमान को उनके संगीत से न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी कई पुरस्कारों से नवाजा गया है, जैसे कि ऑस्कर पुरस्कार, ग्रैमी पुरस्कार, बैफ्टा, और गोल्डन ग्लोब पुरस्कार. उन्हें भारत सरकार ने पद्मभूषण और पद्मश्री से सम्मानित किया है.

ए. आर. रहमान ने संगीत के क्षेत्र में अपनी अनूठी और नवाचारी प्रवृत्ति के लिए बहुत से उपाधियों को हासिल किया है, और उनका संगीत अद्वितीय और प्रेरणादायक है.

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संगीतकार जयदेव

संगीतकार जयदेव भारतीय संगीत के एक महत्वपूर्ण स्थान पर हैं, और वे खासकर हिन्दी संगीत में अपने योगदान के लिए प्रसिद्ध हैं. जयदेव का जन्म 3 अगस्त, 1919 को लुधियाना में हुआ था. इनका पूरा नाम जयदेव वर्मा था.

जयदेव पन्द्रह साल की उम्र में जयदेव घर से भागकर मुम्बई चले गये लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. उन्होंने वापस लुधियाना जाकर प्रोफेसर बरकत राय से संगीत की तालीम लेनी शुरु कर दी.

उस्ताद अली अकबर खान ने नवकेतन की फ़िल्म ‘आंधियां’, और ‘हमसफर’, में जब संगीत देने का जिम्मा संभाला तब उन्होंने जयदेव को अपना सहायक बना लिया.नवकेतन की ही ‘टैक्सी ड्राइवर’ फ़िल्म से वह संगीतकार सचिन देव वर्मन के सहायक बन गए लेकिन उन्हें स्वतंत्र रूप से संगीत देने का जिम्मा चेतन आनन्द की फ़िल्म ‘जोरू का भाई’ में मिला.

जयदेव को हिंदी फ़िल्म इतिहास में सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन के लिए राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. मध्य प्रदेश सरकार द्वारा उन्हें लता मंगेशकर पुरस्कार से सम्मानित किया गया. संगीतकार जयदेव का निधन 6 जनवरी 1987 को मुम्बई में हुआ था.

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अभिनेता ओम पुरी

ओम पुरी भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के एक प्रमुख अभिनेता थे जो अपने उत्कृष्ट अभिनय के लिए जाने जाते थे. उनका जन्म 18 अक्टूबर 1950 को हुआ था और उन्होंने अपनी कैरियर की शुरुआत ब्रिटिश टीवी शो “तमाशा” (Tamas) से की थी जो 1988 में प्रस्तुत हुआ था.

ओम पुरी ने बॉलीवुड, हॉलीवुड, और भारतीय और विदेशी रंगमंच पर अपना अभिनय कौशल दिखाया. उनके उत्कृष्ट कार्यों में से कुछ शामिल हैं – ‘अर्ध्य सत्य’  (Ardh Satya), ‘ जाने भी दो यारों’ (Jaane Bhi Do Yaaro), ‘चमेली की शादी’ (Chameli Ki Shaadi), ‘ओमदार’ (Omkara), ‘गॉड तुसी ग्रेट हो’ (God Tussi Great Ho) और ‘भूतनाथ’ (Bhoothnath).

ओम पुरी ने अपने अभिनय के लिए कई पुरस्कार जीते और उन्हें भारत सरकार ने वर्ष 1990 में पद्म श्री से, और वर्ष 2004 में भारतीय सिनेमा के लिए उनके योगदान के लिए दी गई संविदान के 50 वें वर्ष के अवसर पर दी गई राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

ओम पुरी का निधन 6 जनवरी 2017 को हुआ था, जो एक बड़ी हानि है और भारतीय सिनेमा को एक अद्वितीय अभिनेता की कमी का अहसास कराता है.

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