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“सच्ची मित्रता सरहद की दूरियां मिटा देती है”

इंटरनेशनल फ्रेंडशिप डे के अवसर पर नगर परिषद स्थित आनंद विहार कॉलोनी में ‘मानव जीवन में मित्रता की अहमियत’ विषय पर एक परिचर्चा आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता को, अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ.(प्रो.) गौरी शंकर पासवान ने की.

अपने अध्यक्षीय प्रबोधन में डॉ. गौरी शंकर पासवान ने कहा कि मानव जीवन में फ्रेंडशिप की काफी अहमियत है. फ्रेंडशिप जीवन का महौषधि तथा स्वर्गिक वरदान है. मित्रता दो हृदयों को मिलाने वाली प्रेम की डोर है. जब दो मित्रों के दिल जुड़ते हैं, तो खून के रिश्ते भी फीके लगने लगते हैं. मित्रता उस आईना की तरह है, जिसमें हम अपने गुण दोष भी पहचान सकते हैं. उन्होंने कहा कि मित्रता ऐसी हो होनी चाहिए जैसे कि कृष्ण और सुदामा की दोस्ती, जो सामाजिक और आर्थिक दूरी को मिटा देने वाली फ्रेंडशिप की एक मिसाल है.  मित्रता दिवस की शुरुआत हॉल मार्क कार्डस के संस्थापक जॉयस हॉल ने सन 1930 में की थी. सन 1935 में अमेरिकी कांग्रेस द्वारा औपचारिक रूप से मित्रता दिवस मनाया था. सन 1992 में  सरहदें पार करते हुए भारत पहुंचा. जो भी हो मित्रता दिवस आधुनिक युग की देन नहीं, बल्कि सभ्यता के साथ ही विकसित हुई है. यदि वैश्विक देश और व्यक्ति मित्रता के पांच सूत्र अपना लें जैसे-ईमानदारी, विश्वास, क्षमा, मुस्कान तथा साथ, तो कभी युद्ध की नौबत नहीं आ सकती और सभी देश एवं व्यक्ति समृद्ध और सुखी होते. बदलते समय में सोच समझ कर दोस्ती करनी चाहिए. आज कल दोस्ती में जान चली जाती है. कहते हैं- देखभाल कर मित्रता सोच समझ दे हाथ. पिसता आया है सदा घून गेहूं के साथ.

असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आमोद कुमार सिंह ने कहा कि सच्चे मित्र मानसिक स्वास्थ्य के अदृश्य चिकित्सक होते हैं. मित्रता वह मानसिक सहारा है, जो व्यक्ति को अकेलेपन, तनाव और आत्म अवमूल्यन से उबारकर जीवन में आत्मविश्वास और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करती है. इतिहास के असिस्टेंट प्रोफेसर प्रोफेसर डॉ. निरंजन कुमार दुबे ने कहा कि मित्रता दो हृदयों के बीच की आशक्ति को कहते हैं. इतिहास गवाह है कि सच्ची मित्रता दो हृदयों का ऐसा संबंध है, जो न जात- पात देखता है न धन-धर्म व भाषा और न तो सीमा रेखाएं. महिला कॉलेज असिस्टेंट प्रोफेसर आनंद कुमार सिंह ने कहा कि दुनिया में जब स्वास्थ्य की राजनीति हावी हो तब मित्रता वह स्वस्थ व शुद्ध हवा है, जो इंसानियत को जिंदा रखती है.

स्थानीय सिविल कोर्ट के जी पी प्रभात कुमार भगत ने कहा कि सच्ची मित्रता एक प्रकार का सामाजिक-आर्थिक पूंजी है, जिसका ब्याज नहीं लगता, लेकिन जब जरूरत पड़े तो मूल से कई गुना अधिक सहयोग देती है. अर्थशास्त्र के असिस्टेंट प्रोफेसर सरदार राय ने कहा कि मित्रता एक गणितीय समीकरणों भांति होती है, जिसमें संतुलन व निष्कपटता जरूरी है. एक सच्चा मित्र जीवन के सभी प्रश्नों का उत्तर खोजने में मदद करता है. एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.देवेंद्र कुमार गोयल, अधिवक्ता रामचंद्र रवि, शिक्षक मंटू पासवान व रवीश कुमार सिंह, सुशील कुमार, लाइब्रेरियन रामचरित मानस आदि बुद्धिजीवी लोगों ने मानव जीवन में मित्रता को अपरिहार्य बताया.

प्रभाकर कुमार (जमुई).

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