Dharm

सुन्दरकाण्ड-10-1…

…लंकादहन-1…

दोहा :-

हरि प्रेरित तेहि अवसर चले मरुत उनचास।

अट्टहास करि गर्ज कपि बढ़ि लाग अकास ।।

वाल्व्याससुमनजी महाराज श्लोक का अर्थ बताते हुए कहते है कि, उस समय भगवान् की प्रेरणा से उनचासो पवन चलने लगे. हनुमानजी अट्टहास करके गर्जे और बढ़कर आकाश से जा लगे.

चौपाई :-

देह बिसाल परम हरुआई। मंदिर तें मंदिर चढ़ धाई।।

जरइ नगर भा लोग बिहाला। झपट लपट बहु कोटि कराला ।।

श्लोक का अर्थ बताते हुए महाराजजी कहते है कि, हनुमानजी की देह बड़ी विशाल, परन्तु बहुत ही फुर्तीली है. वे दौड़कर एक महल से दूसरे महल पर चढ़ जाते है. नगर जल रहा है लोग बेहाल हो गए है. आग की करोड़ो भंयकर लपटे झपट रही है.

तात मातु हा सुनिअ पुकारा। एहि अवसर को हमहि उबारा।।

हम जो कहा यह कपि नहिं होई। बानर रूप धरें सुर कोई ।।

श्लोक का अर्थ बताते हुए महाराजजी कहते है कि, चारों ओर चीख पुकार मची है हाय बप्पा ! हाय मैया ! के शोर सुनाई पड़ रही हैं. इस अवसर पर हमें कौन बचाएगा? चारो और यही पुकार सुनाई पड़ रही है. हमने तो पहले ही कहा था कि यह वानर नही है, वानर का रूप धरे कोई देवता है!

साधु अवग्या कर फलु ऐसा। जरइ नगर अनाथ कर जैसा।।

जारा नगरु निमिष एक माहीं। एक बिभीषन कर गृह नाहीं ।।

श्लोक का अर्थ बताते हुए महाराजजी कहते है कि, साधु के अपमान का यह फल है कि नगर अनाथ की तरह जल रहा है. हनुमानजी ने एक ही क्षण में हीं सारे नगर को जला डाला. एक विभीषण का घर नही जलाया.

ता कर दूत अनल जेहिं सिरिजा। जरा न सो तेहि कारन गिरिजा।।

उलटि पलटि लंका सब जारी। कूदि परा पुनि सिंधु मझारी ।।

श्लोक का अर्थ बताते हुए महाराजजी कहते है कि, शिवाजी कहते है – हे पार्वती ! जिन्होने अग्नि को बनाया, हनुमानजी उन्हीं के दूत है. इसी कारण वे अग्नि से नहीं जले. हनुमानजी ने उलट-पलटकर सारी लंका जला दी. फिर वे समुन्द्र में कूद पड़े.

वालव्याससुमनजीमहाराज,

 महात्मा भवन,

श्रीरामजानकी मंदिर,

राम कोट, अयोध्या.

Mob: – 8709142129.

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…LankaDahan-1…

 

Doha…

Hari Prerit Tehi Avasar Chale Marut Unachaas

Attahaas Kari Garj Kapi Badhi Laag Akaas ।।

Describing the meaning of the verse, Valvyasumanji Maharaj says that at that time forty-nine winds started blowing with the inspiration of God, and Hanuman ji started moving through the sky while laughing.

Choupai:-

Deh Bisal Param HaruaiMandir Ten Mandir Chadhai Dhaay।।

Jari Nagar Bha Log BihalaJhapat Lapat Bahu Koti Karaala।।

Explaining the meaning of the verse, Maharaj ji says that Hanuman ji’s body is huge but very agile. They run and climb from one place to another. The city is burning, people have become helpless. Millions of fierce flames of fire are fluttering.

Taat Maatu Ha Suni PukaaraEhi Avasar Ko Hamahi Ubaara।।

Ham Jo Kaha Yah Kapi Nahin HoeeBaanar Roop Dharen Sur Koee ।।

Explaining the meaning of the verse, Maharaj ji says that there is a cry everywhere, O Bappa! Hi mother! The noises are being heard. Who will save us on this occasion? This call is being heard all around. We had already said that this is not a monkey, it is some deity in the form of a monkey!

Sadhu Avagya Kar Falu Aisa Jarai Nagar Anaath Kar Jaise।।

Jara Nagar Nimish Ek MainEk Vibhishan Kar Grih Nahin।।

Explaining the meaning of the verse, Maharajji says that the result of insulting the sage is that the city is burning like an orphan. Hanumanji burnt the whole city in a single moment. One Vibhishan’s house was not burnt.

Ta Kar doot Anal Jehin SirijaJara Na So Tehi Kaaran Girija।।

Ulati Palati Lanka Sab JaareeKoodi Para Puni Sindhu Majhaaree ।।

Explaining the meaning of the verse, Maharajji says that Shivaji says – O Parvati! The one who created fire, Hanumanji is his messenger. That’s why they didn’t get burnt by the fire. Hanumanji burnt the whole of Lanka in reverse. Then they jumped into the sea.

Walvyassumanji Maharaj,

 Mahatma Bhawan,

Shriramjanaki Temple,

Ram Kot, Ayodhya.

Mob:- 8709142129.

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