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रंकनीति बनाम रणनीति…

रंकनीति का प्रयोग

अगले कुछ दिनों तक, रमन ने गाँव के लोगों के साथ मिलकर ठाकुर सूरज सिंह और उसके आदमियों के बारे में जानकारी इकट्ठा की. उसने गुप्तचरों को शहर भेजा और ठाकुर के तौर-तरीकों, उसकी आदतों और उसकी कमजोरियों के बारे में पता लगाया.

उसे पता चला कि ठाकुर सूरज सिंह बहुत लालची था और उसे धन का बहुत लोभ था. उसे यह भी पता चला कि ठाकुर का सबसे भरोसेमंद आदमी, माधव, गाँव का ही रहने वाला था और वह ठाकुर के अत्याचारों से अंदर ही अंदर दुखी था.

रमन ने एक योजना बनाई. उसने गाँव के कुछ बुद्धिमान लोगों को इकट्ठा किया और अपनी “रंकनीति” समझाई. उसकी योजना सीधी लड़ाई से बचने और ठाकुर की कमजोरियों का फायदा उठाने पर आधारित थी.

एक रात, रमन और उसके कुछ साथी चुपके से ठाकुर के खजाने में घुस गए. उन्होंने खजाने से कुछ कीमती सामान चुरा लिया और उसे गाँव के गरीब लोगों में बाँट दिया. सुबह जब ठाकुर को चोरी का पता चला, तो वह गुस्से से पागल हो गया.

उसी समय, रमन ने माधव से संपर्क किया. उसने माधव को ठाकुर के लालच और अत्याचारों के बारे में याद दिलाया और उसे गाँव के लोगों का साथ देने के लिए राजी किया। माधव, जो पहले से ही ठाकुर से परेशान था, रमन की बातों में आ गया.

माधव ने ठाकुर को गलत जानकारी देना शुरू कर दिया. उसने ठाकुर को बताया कि गाँव के लोग भागने की तैयारी कर रहे हैं और उन्होंने अपना सारा धन छुपा दिया है. ठाकुर, अपने लालच में अंधा होकर, माधव की बातों पर विश्वास कर बैठा.

शेष भाग अगले अंक में…,

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