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व्यक्ति विशेष -613.

राष्ट्रीय काँग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सैयद हसन इमाम

सैयद हसन इमाम भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक प्रमुख नेता और समाज सुधारक थे. उन्होंने सितंबर 1918 में बंबई (वर्तमान मुंबई) में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विशेष अधिवेशन की अध्यक्षता की थी.

हसन इमाम का जन्म 31 अगस्त 1871 को ज़िला पटना के नियोरा में हुआ था. उनके पिता इमदाद इमाम थे. शिया मुस्लिम मत को मानने वाला यह परिवार प्रतिष्ठित, शिक्षित मध्यम वर्ग का था. उन्होंने इंग्लैंड से कानून की पढ़ाई की और वर्ष 1892 में भारत लौटकर कलकत्ता हाई कोर्ट में वकालत शुरू की. वे एक प्रसिद्ध बैरिस्टर बने और बाद में कलकत्ता हाई कोर्ट में जज के पद पर भी रहे.

हसन इमाम ने वर्ष 1918 में कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में, उन्होंने मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों (Montagu-Chelmsford Reforms) पर चर्चा करने के लिए विशेष सत्र की अध्यक्षता की. वे खिलाफत आंदोलन और बाद में सविनय अवज्ञा आंदोलन में भी सक्रिय रहे. उन्होंने साइमन कमीशन का विरोध करने वाले आंदोलन का भी नेतृत्व किया.

हसन इमाम एक समाज सुधारक भी थे. उन्होंने महिला शिक्षा और दलितों की स्थिति में सुधार के लिए महत्वपूर्ण काम किए. सैयद हसन इमाम का निधन 19 अप्रैल 1933 को हुआ था.

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कवयित्री, उपन्यासकार और निबंधकार अमृता प्रीतम

अमृता प्रीतम एक भारतीय लेखिका थीं, जो पंजाबी और हिंदी में लिखती थीं. उन्होंने अपनी सशक्त और संवेदनशील रचनाओं से साहित्य जगत में एक अमिट छाप छोड़ी थी. अमृता प्रीतम का जन्म 31 अगस्त 1919 को  गुजरांवाला (पंजाब- पाकिस्तान) में हुआ था. बचपन लाहौर में बीता और शिक्षा भी वहीं पर हुई. इन्होंने पंजाबी लेखन से शुरुआत की और किशोरावस्था से ही कविता, कहानी और निबंध लिखना शुरू किया.

अमृता उन विरले साहित्यकारों में से है जिनका पहला संकलन 16 साल की आयु में प्रकाशित हुआ था. अमृता प्रीतम ने 100 से अधिक पुस्तकें लिखीं, जिनमें कविता, उपन्यास, निबंध और आत्मकथाएँ शामिल हैं. उनकी कुछ सबसे प्रसिद्ध रचनाएँ हैं.

पिंजर (Pinjar): – यह उपन्यास वर्ष 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन पर आधारित है. इसमें एक हिंदू लड़की, पूरो, की कहानी है जिसका अपहरण कर लिया जाता है.

सुनेहे (Sunehe): – यह उनका एक प्रसिद्ध कविता संग्रह है, जिसके लिए उन्हें वर्ष 1956 में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।

कागज़ ते कैनवास (Kagaz Te Canvas): – इस कविता संग्रह के लिए उन्हें वर्ष 1982 में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो भारतीय साहित्य का सर्वोच्च सम्मान है.

अमृता की रचनाओं में अक्सर प्रेम, पीड़ा, विभाजन का दर्द, और नारीवाद जैसे विषय प्रमुखता से उभरते हैं. उन्होंने समाज की रूढ़ियों और महिलाओं के जीवन में आने वाली चुनौतियों को अपनी लेखनी के माध्यम से उजागर किया। उनकी कविताएं और उपन्यास उनकी गहरी भावनाओं और सामाजिक चेतना को दर्शाते हैं.

अमृता प्रीतम को उनके साहित्यिक योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाज़ा गया, जिनमें पद्म श्री (1969) और पद्म विभूषण (2004) शामिल हैं. वह भारतीय साहित्य की एक ऐसी आवाज़ थीं, जिसने अपनी रचनाओं से लाखों लोगों को प्रभावित किया. अमृता प्रीतम का निधन 31 अक्टूबर 2005 को हुआ था.

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अभिनेता ऋतुपर्णो घोष

ऋतुपर्णो घोष एक भारतीय फिल्म निर्माता, पटकथा लेखक, अभिनेता, और लेखक थे. उनका जन्म 31 अगस्त 1963 को कोलकाता, पश्चिम बंगाल में हुआ था. वे भारतीय सिनेमा, विशेष रूप से बंगाली सिनेमा, में अपने अद्वितीय और संवेदनशील फिल्म निर्माण के लिए जाने जाते हैं.

ऋतुपर्णो घोष ने अपने कैरियर की शुरुआत विज्ञापन फिल्मों से की थी, लेकिन जल्द ही उन्होंने फीचर फिल्मों की ओर रुख किया. उनकी पहली फिल्म ‘हीरर अंगती’ (1994) थी, लेकिन उन्हें व्यापक पहचान मिली फिल्म ‘उन्हिषे अप्रैल’ (1994) से, जिसने उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिलाया.

 प्रमुख फिल्में: –

दहन (1997) – इस फिल्म ने सामाजिक मुद्दों को बारीकी से चित्रित किया और इसे भी राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से नवाजा गया.

चोखेर बाली (2003) – रवींद्रनाथ टैगोर के उपन्यास पर आधारित इस फिल्म में ऐश्वर्या राय ने मुख्य भूमिका निभाई और इसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया.

रेनकोट (2004) – इस फिल्म में अजय देवगन और ऐश्वर्या राय मुख्य भूमिकाओं में थे और इसे भी आलोचकों द्वारा खूब सराहा गया.

दोसार (2006) – यह फिल्म भी रिश्तों और मानवीय भावनाओं की गहराइयों को बखूबी प्रस्तुत करती है.

नौकाडूबी (2011) – यह फिल्म भी टैगोर की रचना पर आधारित थी और इसे दर्शकों ने बहुत पसंद किया।

ऋतुपर्णो घोष ने न केवल निर्देशन और लेखन में बल्कि अभिनय में भी अपनी छाप छोड़ी। उन्होंने ‘मेमोरीज इन मार्च’ (2010) और ‘चित्रांगदा’ (2012) जैसी फिल्मों में अभिनय किया, जिसमें उनके प्रदर्शन को सराहा गया.

ऋतुपर्णो घोष को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिले. उन्होंने कुल 12 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीते, जो उनके कैरियर की उत्कृष्टता और सिनेमा में उनके अद्वितीय दृष्टिकोण को प्रमाणित करते हैं. ऋतुपर्णो घोष खुले-आम समलैंगिक थे और उन्होंने LGBTQ+ समुदाय के मुद्दों को अपनी फिल्मों में प्रमुखता से उठाया. उन्होंने अपने जीवन और कार्यों के माध्यम से समाज में समावेशिता और स्वीकार्यता का संदेश फैलाया.

ऋतुपर्णो घोष का निधन 30 मई 2013 को कोलकाता में हृदयगति रुकने के कारण हुआ. उनके निधन से भारतीय सिनेमा को एक बड़ी क्षति हुई, लेकिन उनकी फिल्में और उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा. वे अपने संवेदनशील और सोच-समझकर बनाई गई फिल्मों के लिए हमेशा प्रशंसित रहेंगे.

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भूतपूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह

बेअंत सिंह भारतीय राजनीति के प्रमुख व्यक्तित्व थे, जो पंजाब राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा कर चुके हैं. उनका जन्म 19 फरवरी 1922 को हुआ था और उनकी मृत्यु 31 अगस्त 1995 को एक आतंकवादी हमले में हो गई थी. बेअंत सिंह का कार्यकाल वर्ष 1992-95 तक रहा, जिस दौरान पंजाब में उग्रवाद की समस्या से निपटने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी.

बेअंत सिंह के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने उग्रवाद के खिलाफ कठोर कदम उठाए, जिससे राज्य में शांति और स्थिरता की स्थापना में मदद मिली. उनकी नीतियों और कार्यों ने पंजाब में उग्रवाद को काफी हद तक कम करने में योगदान दिया, लेकिन इस प्रक्रिया में कई विवाद भी उत्पन्न हुए. उनके शासनकाल को कई बार मानवाधिकारों के हनन के आरोपों के लिए भी आलोचना का सामना करना पड़ा.

बेअंत सिंह की मृत्यु चंडीगढ़ में एक आत्मघाती बम विस्फोट में हुई, जिसमें उनके साथ कई अन्य लोग भी मारे गए. उनकी मृत्यु ने पंजाब और पूरे भारत में शोक की लहर दौड़ा दी. उनकी मृत्यु के बाद, पंजाब में उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रही, और धीरे-धीरे राज्य ने शांति की ओर कदम बढ़ाया. बेअंत सिंह का जीवन और उनकी मृत्यु पंजाब के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और विवादास्पद अध्याय के रूप में याद की जाती है, जिसने राज्य में उग्रवाद के खिलाफ संघर्ष के दौरान शांति और स्थिरता की दिशा में उनके योगदान को पहचाना.

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राजनीतिज्ञ प्रणव मुखर्जी

प्रणव मुखर्जी भारतीय राजनीति के प्रमुख व्यक्तियों में से एक थे. वे एक अनुभवी राजनेता और भारत के 13वें राष्ट्रपति (वर्ष 2012-17)  थे. उनका राजनीतिक कैरियर लगभग पांच दशकों तक चला और उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया. प्रणव मुखर्जी का    जन्म 11 दिसंबर 1935 को पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले में किरनाहर शहर के निकट स्थित मिराती गाँव में एक ब्राह्मण परिवार में कामदा किंकर मुखर्जी और राजलक्ष्मी मुखर्जी के यहाँ हुआ था. प्रणव मुखर्जी ने कोलकाता विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान, इतिहास और कानून में डिग्री ली.

प्रणव मुखर्जी ने वर्ष 1969 में राजनीति में कदम रखा और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के करीबी सहयोगी बने. उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विभिन्न स्तरों पर कार्य किया. प्रणव मुखर्जी ने वर्ष 1982- 84 और वर्ष 2009- 12 के बीच वित्त मंत्रालय का कार्यभार संभाला था.

उन्होंने वर्ष 1995-96 और वर्ष 2006-09 के दौरान विदेश मंत्री का कार्यभार संभाला था. प्रणव मुखर्जी ने वर्ष 2004-06 के दौरान रक्षा मंत्री का कार्यभार संभाला था. उन्होंने वर्ष 1980-82 के दौरान वाणिज्य और उद्योग मंत्री का कार्यभार संभाला था. 25 जुलाई 2012 को प्रणव मुखर्जी भारत के 13वें राष्ट्रपति बने. उन्होंने संवैधानिक मूल्यों की रक्षा और लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने के लिए काम किया.

प्रमुख उपलब्धियां:

वर्ष 1984 में “विश्व का सर्वश्रेष्ठ वित्त मंत्री” का खिताब Euromoney Magazine द्वारा.

वर्ष 2008 में पद्म विभूषण से सम्मानित.

वर्ष 2019 में भारत रत्न, देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित.

प्रणव मुखर्जी ने कई पुस्तकें लिखीं, जिनमें उनकी आत्मकथा “The Presidential Years” और भारत की राजनीति पर आधारित अन्य लेख प्रमुख हैं. 31 अगस्त 2020 को 84 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया. उनके निधन के साथ भारतीय राजनीति ने एक अनुभवी नेता और देशभक्त को खो दिया. उनकी सादगी, अनुभव, और नीतिगत सूझबूझ ने उन्हें भारतीय राजनीति में एक विशेष स्थान दिलाया.

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