
व्यक्ति विशेष -611.
चिकित्सक जीवराज नारायण मेहता
डॉ. जीवराज नारायण मेहता भारतीय चिकित्सक, प्रशासक और राजनीतिज्ञ थे. उन्हें गुजरात राज्य के पहले मुख्यमंत्री होने का गौरव प्राप्त है. जीवराज नारायण मेहता का जन्म 29 अगस्त 1887 को अमरेली, गुजरात में हुआ था. जीवराज अपने विद्यार्थी जीवन से ही बहुत मेधावी और प्रतिभाशाली छात्र थे. उन्होंने मुंबई के ग्रांट मेडिकल कॉलेज और जे.जे. अस्पताल से चिकित्सा की पढ़ाई की. बाद में, उन्होंने लंदन में अपनी उच्च शिक्षा पूरी की, जहाँ उन्होंने एमडी और एफआरसीएस की डिग्री हासिल की.
डॉ. मेहता एक कुशल और सम्मानित चिकित्सक थे. वे महात्मा गांधी के निजी चिकित्सक भी थे. उन्होंने मुंबई के केईएम अस्पताल के पहले डीन के रूप में भी कार्य किया, जहाँ उन्होंने 18 वर्षों तक महत्वपूर्ण सेवाएँ दीं. वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से शामिल थे. उन्होंने महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया, जिसके कारण उन्हें दो बार जेल भी जाना पड़ा.
भारत की स्वतंत्रता के बाद, डॉ. मेहता ने विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया. वो, बड़ौदा रियासत के पहले ‘दीवान’ (प्रधानमंत्री) थे. उन्होंने बॉम्बे राज्य में वित्त और उद्योग मंत्री के रूप में कार्य किया. 01 मई 1960 को जब गुजरात राज्य की स्थापना हुई, तो वे इसके पहले मुख्यमंत्री बने. उन्होंने वर्ष 1963 तक इस पद पर कार्य किया. उन्होंने वर्ष 1963- 66 तक यूनाइटेड किंगडम में भारत के उच्चायुक्त के रूप में भी सेवा दी. उन्होंने अहमदाबाद में भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM-A) की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
डॉ. जीवराज नारायण मेहता का अंतरजातीय विवाह हंसा मेहता के साथ हुआ था. हंसा मेहता स्वयं भी एक स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और शिक्षाविद् थीं. डॉ. मेहता का निधन 07 नवम्बर 1978 को हुआ था. डॉ. मेहता का जीवन चिकित्सा, स्वतंत्रता और राष्ट्र सेवा के प्रति उनके समर्पण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है.
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हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद
मेजर ध्यानचंद को भारतीय हॉकी के इतिहास का सबसे महान खिलाड़ी माना जाता है. उन्हें “हॉकी का जादूगर” भी कहते हैं. उनके जन्मदिन 29 अगस्त को भारत में “राष्ट्रीय खेल दिवस” के रूप में मनाया जाता है. उनका जन्म 29 अगस्त 1905 को इलाहाबाद के एक राजपूत परिवार में हुआ था. उन्होंने भारतीय सेना में रहते हुए हॉकी खेलना शुरू किया और अपनी असाधारण खेल शैली से सबका ध्यान अपनी ओर खींचा.
वर्ष 1922 में ध्यानचंद ने दिल्ली के प्रथम ब्राह्मण रेजीमेंट में सेना में एक साधारण सिपाही की हैसियत से भर्ती हुये थे. ध्यानचंद जब रेजिमेंट में भर्ती हुए थे तो उन्हें हॉकी खेलने का शौक नहीं था. पर उसी रेजिमेंट के एक सूबेदार मेजर तिवारी ने ध्यानचंद को हॉकी खेलने के लिए प्रेरित किया था. मेजर तिवारी की देख-रेख में ध्यानचंद भी हॉकी खेलने लगे. देखते ही देखते वह दुनिया के एक महान खिलाड़ी बन गए.
वर्ष 1927 में उन्हें लांस नायक बना दिए गए. वर्ष 1937 ई. में जब भारतीय हॉकी दल के कप्तान थे तो उन्हें सूबेदार बना दिया गया था. जब द्वितीय महायुद्ध प्रारंभ हुआ तो वे वर्ष 1943 ई. में ‘लेफ्टिनेंट’ नियुक्त हुए और भारत के स्वतंत्र होने पर वर्ष 1948 ई. में कप्तान बना दिए गए थे.
मेजर ध्यानचंद के खेल की सबसे खास बात उनकी गेंद पर अद्भुत पकड़ थी, जिसके कारण विरोधी टीम के खिलाड़ी हैरान रह जाते थे. ऐसा लगता था जैसे गेंद उनकी हॉकी स्टिक से चिपकी हुई है. इसी वजह से उन्हें “हॉकी का जादूगर” कहा जाने लगा. मेजर ध्यानचंद का निधन 03 दिसंबर 1979 को हुआ था.
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राजनीतिज्ञ रामकृष्ण् हेगड़े
रामकृष्ण हेगड़े कर्नाटक राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं. उनका जन्म 29 अगस्त 1926 को कर्नाटक राज्य के सिरसी जिले में हुआ था, और उन्होंने भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
रामकृष्ण हेगड़े का प्रमुख रूप से संघटना (सोशलिस्ट) जनता पार्टी (एस. जे. पी) के सदस्य और नेता के रूप में योगदान था. वे कर्नाटक राज्य में बीते कुछ दशकों तक कई बार मुख्यमंत्री रहे और राज्य के विकास और प्रशासन में महत्वपूर्ण योगदान किया.
रामकृष्ण हेगड़े के शासकीय कैरियर के दौरान, कर्नाटक में कई सामाजिक और आर्थिक सुधार कार्यक्रमों की शुरुआत की गई, और उन्होंने राज्य की विकास के लिए कई महत्वपूर्ण पहलों को आगे बढ़ाया. उन्होंने आर्थिक विकास, किसानों के हित में सुधार, शिक्षा के क्षेत्र में सुधार, और सामाजिक न्याय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए प्रसिद्ध थे.
रामकृष्ण हेगड़े का निधन 12 जनवरी 2004 को हुआ, लेकिन उनका योगदान और उनकी सेवाएँ कर्नाटक राज्य और भारतीय राजनीति के इतिहास में याद की जाती हैं.
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अभिनेता बिक्रमजीत कंवरपाल
बिक्रमजीत कंवरपाल भारतीय फिल्म और टेलीविजन उद्योग में एक अभिनेता थे. उनका जन्म 29 अगस्त 1968 को हिमाचल प्रदेश में हुआ था. बिक्रमजीत कंवरपाल का पेशेवर जीवन भारतीय सेना में शुरू हुआ, जहाँ उन्होंने मेजर के पद तक सेवा की. अपनी सैन्य सेवा के बाद, उन्होंने अभिनय में अपना कैरियर बनाने का निर्णय लिया और जल्द ही वे अपने दमदार अभिनय और गहरी आवाज के लिए प्रसिद्ध हो गए.
बिक्रमजीत कंवरपाल ने कई फिल्मों और टीवी शोज में काम किया, जहां उन्होंने अक्सर पुलिस अधिकारियों, सेना के अधिकारियों या अन्य प्राधिकारी वाले पात्रों की भूमिकाएँ निभाईं. उनकी कुछ उल्लेखनीय फिल्में “पेज 3”, “रॉकेट सिंह: सेल्समैन ऑफ द ईयर”, “मर्डर 2”, और “2 स्टेट्स” हैं. उन्होंने वेब सीरीज़ में भी अभिनय किया, जिसमें “स्पेशल OPS” और “इललीगल – जस्टिस, आउट ऑफ आर्डर” शामिल हैं.
बिक्रमजीत कंवरपाल का निधन 1 मई 2021 को कोविड-19 से हुआ था. उनका निधन भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी क्षति माना गया, क्योंकि उन्होंने अपने छोटे से कैरियर में अनेक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली भूमिकाएं निभाईं थीं.
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अभिनेत्री श्रेया धनवंतरी
श्रेया धनवंतरी एक भारतीय अभिनेत्री, मॉडल और लेखिका हैं जो हिंदी और तेलुगु सिनेमा में काम करती हैं. श्रेया धनवंतरी का जन्म 29 अगस्त 1988 को हुआ था. श्रेया ने अपने कैरियर की शुरुआत तेलुगु फिल्मों से की थी, लेकिन उन्हें असली पहचान वेब सीरीज़ से मिली.
श्रेया ने अमेज़न प्राइम वीडियो की इस लोकप्रिय वेब सीरीज़ में उन्होंने ज़ोया का किरदार निभाया, जिसने उन्हें काफी प्रसिद्धी दिलाई थी. सोनी लिव पर आई इस वेब सीरीज़ में उन्होंने पत्रकार सुचेता दलाल का किरदार निभाया था. इस भूमिका के लिए उन्हें आलोचकों से काफी सराहना मिली.
फ़िल्में: – वाइ चीट इंडिया, लूप लपेटा और चुप: रिवेंज ऑफ द आर्टिस्ट.
वेब सीरीज़: – लेडीज़ रूम, द फैमिली मैन, स्कैम 1992, मुंबई डायरीज़ 26/11, गन्स एंड गुलाब्स.
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स्वतंत्रता सेनानी बनारसी दास गुप्ता
बनारसी दास गुप्ता एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी और हरियाणा के राजनीतिज्ञ थे. उनका जन्म 5 नवंबर 1917 को हरियाणा के भिवानी जिले में हुआ था. उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई और महात्मा गांधी के नेतृत्व में अंग्रेजों के खिलाफ कई आंदोलनों में हिस्सा लिया. स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्होंने विभिन्न आंदोलनों में भाग लिया, जिसके करण उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा.
आजादी के बाद, बनारसी दास गुप्ता भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य बने और हरियाणा की राजनीति में अपना प्रभाव छोड़ा. वे हरियाणा राज्य के मुख्यमंत्री दो बार रहे—पहली बार वर्ष 1975 – 77 तक और दूसरी बार वर्ष 1990 – 91 तक. उनका राजनीतिक जीवन सादगी, ईमानदारी और समाज सेवा के लिए जाना जाता था. वे आम जनता के बीच अपने साधारण जीवन और निस्वार्थ सेवा भाव के कारण बहुत लोकप्रिय थे.
बनारसी दास गुप्ता शिक्षा के प्रति जागरूक थे और उन्होंने राज्य में शिक्षा का प्रसार करने में भी योगदान दिया. उनका निधन 29 अगस्त 2007 को हुआ था. उन्हें एक सच्चे देशभक्त और जनता के नेता के रूप में याद किया जाता है.