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व्यक्ति विशेष -605.

स्वतंत्रता सेनानी टी. प्रकाशम

टी. प्रकाशम, जिन्हें “आंध्र केसरी” (आंध्र का शेर) के नाम से जाना जाता है, एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता थे. उन्होंने भारत की आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बाद में आंध्र राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने. टी. प्रकाशम का जन्म 23 अगस्त, 1872 को गुन्टूर ज़िले के कनपर्ती नामक गाँव में हुआ था. उनका पूरा नाम  टंगटूरी प्रकाशम था. उनके पिता का नाम पिता ‘गोपाल कृष्णैया है. टी. प्रकाशम के पिता देहांत हो जाने के कारण माँ ने एक होटल खोलकर बड़े परिश्रम से उनका पालन-पोषण किया था. मद्रास से क़ानून की शिक्षा प्राप्त करके उन्होंने राजामुंद्री में वकालत शुरू की थी. टी. प्रकाशम ने ‘लॉ टाइम्स’ नामक पत्र का भी संपादन किया था.

टी. प्रकाशम प्रिवी कौंसिल में मुकदमा लड़ने के लिए दो बार इंग्लैण्ड भी गए. वहाँ उनकी भेंट प्रथम बार गाँधी जी से हुई और गाँधी जी के विचारों से काफी प्रभावित हुए थे. देश की स्वाधीनता के लिए गाँधी जी ने जो पहला आंदोलन आरंभ किया, टी. प्रकाशम भी अपनी बैरिस्टरी त्यागकर आंदोलन में सम्मिलित हो गए. वर्ष 1921 में आंध्र प्रदेश में कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने और करीब 13 वर्षों तक वे आंध्र प्रदेश में कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे.

भाषावार प्रदेशों के गठन के आधार पर अलग आंध्र प्रदेश की स्थापना के लिए पोट्ठि श्रीरामालू ने वर्ष 1952 में आत्मदाह कर लिया जिसके बाद वर्ष 1953 को आंध्र का क्षेत्र मद्रास से अलग करके नया राज्य बना दिया गया था. इस नए राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री आंध्र केसरी टी. प्रकाशम ही बने थे. टी. प्रकाशम का निधन 20 मई 1957 को हुआ था.

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स्वतंत्रता सेनानी राजकुमार शुक्ल

राजकुमार शुक्ल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रमुख व्यक्तित्व थे, जिन्होंने महात्मा गांधी को चंपारण के किसानों की दुर्दशा के प्रति आकर्षित किया और उन्हें चंपारण सत्याग्रह के लिए प्रेरित किया. राजकुमार शुक्ल खुद एक किसान और नील के खेती के विरुद्ध संघर्ष कर रहे किसानों के प्रतिनिधि थे.

राजकुमार शुक्ल का जन्म 23 अगस्त, 1875 को  बिहार के चंपारण जिले में हुआ और उनका निधन 20 मई, 1929 को मोतिहारी, बिहार में हुआ था. उन्होंने देखा कि किस तरह ब्रिटिश उपनिवेशिक प्रशासन ने टिनकाथिया प्रथा के माध्यम से किसानों को अपनी जमीन का एक तिहाई हिस्सा नील की खेती के लिए आरक्षित करने के लिए मजबूर किया. इससे किसानों की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई थी.

राजकुमार शुक्ल ने वर्ष 1916 में लखनऊ में आयोजित कांग्रेस अधिवेशन में महात्मा गांधी से मुलाकात की और उन्हें चंपारण आने के लिए मनाया. इसके बाद, वर्ष 1917 में गांधीजी ने चंपारण पहुंचकर वहाँ के किसानों की समस्याओं का अध्ययन किया और एक सफल सत्याग्रह आंदोलन चलाया जिसने नील की खेती के लिए किसानों पर थोपी गई पाबंदियों को समाप्त करवाया. राजकुमार शुक्ल की इस पहल ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और गांधीजी के नेतृत्व को और अधिक मजबूती प्रदान की.

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राजनीतिज्ञ बलराम जाखड़

बलराम जाखड़ एक प्रमुख भारतीय राजनेता थे, जिन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया. उन्हें विशेष रूप से सबसे लंबे समय तक लोकसभा अध्यक्ष रहने के लिए याद किया जाता है. बलराम जाखड़ का जन्म 23 अगस्त 1923 को पंजाब के फिरोजपुर जिले के पंच कोसी गाँव में हुआ था. उन्होंने अपनी शिक्षा फॉर्मन क्रिश्चियन कॉलेज, लाहौर से पूरी की, जहाँ से उन्होंने संस्कृत में डिग्री प्राप्त की. वे एक किसान परिवार से आते थे और उन्होंने अपने जीवन में किसानों के हितों को हमेशा प्राथमिकता दी.

जाखड़ ने वर्ष 1972 में पंजाब विधानसभा से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की. वे वर्ष 1977 में दोबारा चुने गए और पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे. वर्ष 1980 में, वे पहली बार फिरोजपुर से लोकसभा सांसद चुने गए. उन्हें तुरंत लोकसभा का अध्यक्ष बना दिया गया, जो एक दुर्लभ उपलब्धि थी. वर्ष 1984 में वे दोबारा लोकसभा अध्यक्ष चुने गए. उनका यह कार्यकाल वर्ष 1980 – 89 तक चला, जिसने उन्हें भारतीय इतिहास में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले लोकसभा अध्यक्ष का दर्जा दिया.

लोकसभा अध्यक्ष के बाद, उन्होंने वर्ष 1991- 96 तक कृषि मंत्री के रूप में कार्य किया. इस दौरान उन्होंने किसानों के हितों की रक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए. बाद में, वर्ष 2004 – 2009 तक, वे मध्य प्रदेश के राज्यपाल भी रहे. जाखड़ को भारतीय संसदीय प्रणाली में कई महत्वपूर्ण बदलाव लाने का श्रेय दिया जाता है. उन्होंने संसद के कामकाज को आधुनिक बनाने और संसदीय अभिलेखों के कंप्यूटरीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. एक किसान नेता के रूप में, उन्होंने “भारतीय कृषक समाज” की स्थापना की और किसानों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. बलराम जाखड़ का निधन 3 फरवरी, 2016 को 92 वर्ष की आयु में हुआ. 

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अभिनेत्री सायरा बानो

सायरा बानो हिंदी सिनेमा की एक मशहूर और बेहतरीन अभिनेत्री हैं. उनका जन्म 23 अगस्त 1944 को ब्रिटिश भारत के मसूरी में हुआ था. सायरा के पिता का नाम फिल्म निर्माता मियां एहसान-उल-हक और का नाम फिल्म अभिनेत्री नसीम बानो था.

सायरा ने अपने प्रारंभिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा लंदन, ब्रिटेन में बिताया था. सायरा ने अपने फिल्मी कैरियर की शुरुआत महज 16 वर्ष की उम्र में फ़िल्म ‘जंगल’ में डेब्यू किया था. उनके बेहतरीन प्रदर्शन से सायरा को फिल्म फेयर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था. वर्ष 1960 के दशक में सायरा की कई सुपरहिट फ़िल्में बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाने लगी थी. सायरा बानो ने वर्ष 1966 में 22 साल की उम्र में दिलीप कुमार से शादी की थी जबकि, उस समय दिलीप कुमार खुद 44 साल के थे.

प्रमुख फ़िल्में: – “पड़ोसन” (1968), “पूरब और पश्चिम” (1970), “विक्टोरिया नं. 203” (1972), “हेरा फेरी” (1976) और “ज़मीर” (1975), “गोपी” (1970) और “बैराग” (1976).

सायरा बानो अपनी खूबसूरती, अभिनय और डांस के लिए जानी जाती हैं. वह बॉलीवुड के सुनहरे युग की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में से एक थीं.

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अभिनेत्री गौहर खान

गौहर खान एक भारतीय अभिनेत्री, मॉडल और डांसर हैं, जिन्होंने हिंदी सिनेमा और टेलीविज़न की दुनिया में अपनी एक खास पहचान बनाई है. वह बिग बॉस 7 की विजेता के रूप में भी प्रसिद्ध हैं. गौहर खान का जन्म 23 अगस्त 1983 को पुणे महाराष्ट्र मे एक मुस्लिम परिवार में हुआ था. उनकी मां का नाम रजिया जफर है. गौहर ने अपनी प्रारंभिक पढाई माउंट कार्मेल कॉन्वेंट स्कूल से पूरी की है. इसके बाद उन्होंने  नेस वाडिया कॉलेज ऑफ कॉमर्स  से स्नातक की डिग्री प्राप्त की. पूरी करने के बाद गौहर ने  अपना कैरियर मॉडलिंग और अभिनय के क्षेत्र में आगे बढ़ाया.

वर्ष 2012 में गौहर फेमिना मिस इंडिया का हिस्सा बनी थीं, जहां वह चौथे स्थान पर रहीं उसके बाद गौहर ने मिस इंटरनेशनल कांटेस्ट में भाग लिया था. वर्ष 2013 में गौहर टीवी की दुनिया के सबसे बड़े कंट्रोवर्सियल शो बोग बॉस का हिस्सा बनीं और विजेता भी रहीं. गौहर खान ने अपने कैरियर की शुरुआत वर्ष 2009 में यशराज फिल्म्स प्रोडक्शन की फिल्म राकेट सिंह: सेल्समैन ऑफ़ द इयर से की थी.

फिल्में: – “इशकजादे” (2012), “बद्रीनाथ की दुल्हनिया” (2017) और “बेगम जान” (2017).

टेलीविजन: – गौहर ने कई रियलिटी शो में हिस्सा लिया है. वह “झलक दिखला जा 3” की उपविजेता और “बिग बॉस 7” की विजेता रहीं। उन्होंने कई टेलीविजन शो की मेजबानी भी की.

 वेब सीरीज: – गौहर वेब सीरीज की दुनिया में भी काफी सक्रिय हैं. उन्होंने “तांडव” (2021) और “शिक्षा मंडल” (2022) जैसी लोकप्रिय वेब सीरीज में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं.

गौहर खान ने वर्ष 2020 में डांसर और कंटेंट क्रिएटर जैद दरबार से शादी की. जैद दरबार, मशहूर संगीतकार इस्माइल दरबार के बेटे हैं.

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अभिनेत्री वानी कपूर

वानी कपूर एक भारतीय अभिनेत्री हैं जो मुख्य रूप से हिंदी फिल्मों में काम करती हैं. उनका जन्म 23 अगस्त 1988 को दिल्ली में हुआ था. उनके पिता का नाम शिव कपूर है जो कि बिजनेसमैन हैं और उनकी माँ का नाम डिम्पी कपूर है जो कि मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव हैं.

वाणी ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई माता जय कौर पब्लिक स्कूल, अशोक विहार दिल्ली से पूरी की है. उन्होंने अपनी बैचलर इन टूरिज्म की पढ़ाई इग्नू से की. पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्होंने ओबेरॉय होटल्स में अपनी इंटरशिप के बाद आईटीसी के होटल्स में काम किया. वाणी कपूर ने अपने कैरियर की शुरुआत छोटे पर्दे के शो राजुबेन से की थी.

वाणी को फिल्म शुद्ध देसी रोमांस के लिए ऑडिशन के जरिये चुना गया था. वाणी को फिल्म शुद्ध देसी रोमांस के लिए फिल्मफेयर अवार्ड बेस्ट डेब्यू इन फीमेल से भी नवाजा गया था.

फ़िल्में: – शुद्ध देसी रोमांस (2013), ‘बेफिक्रे’ (2016), ‘वॉर’ (2019) और ‘चंडीगढ़ करे आशिकी’ (2021).

‘शुद्ध देसी रोमांस’ के लिए वाणी को सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार, ज़ी सिने अवार्ड, आईफा अवार्ड मिला था.

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संगीतज्ञ विनायकराव पटवर्धन

विनायकराव पटवर्धन एक हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के ग्वालियर घराने के गायक थे. उनका पूरा नाम पंडित विनायक नारायण पटवर्धन है. उनका जन्म 22 जुलाई 1898 को महाराष्ट्र के मिरज में हुआ था और 23 अगस्त 1975 को पुणे में उनका निधन हो गया. विनायकराव पटवर्धन ने अपने चाचा केशव राव से संगीत की प्रारंभिक शिक्षा ली. बाद में, वे लाहौर गए और पंडित विष्णु दिगंबर पलुस्कर के शिष्य बन गए, जिनसे उन्होंने गहन संगीत शिक्षा प्राप्त की. उन्हें पंडित बी.आर. देवधर, नारायण राव व्यास और ओंकारनाथ ठाकुर जैसे महान संगीतकारों का ‘गुरु भाई’ होने का भी सम्मान प्राप्त था.

विनायकराव की गायकी में ग्वालियर घराने की सहजता और सीधेपन की झलक मिलती थी. वे विशेष रूप से अपने तरानों के लिए प्रसिद्ध थे. उनके पसंदीदा रागों में बहार, अडाणा, मुल्तानी, मल्हार, जयजयवंती, हमीर और भैरव-बहार शामिल थे. वे विभिन्न महत्वपूर्ण संगीत समारोहों में प्रदर्शन करते थे और उनकी आवाज़ जनता के बीच बहुत लोकप्रिय थी.

विनायकराव ने अपने गुरु विष्णु दिगंबर पलुस्कर की तरह, उन्होंने भी संगीत के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया. उन्होंने गंधर्व महाविद्यालय की विभिन्न शाखाओं (जैसे बंबई, नागपुर और लाहौर) में शिक्षण कार्य किया. वर्ष 1932 में, उन्होंने पुणे में अपना स्वयं का गंधर्व महाविद्यालय स्थापित किया. उन्होंने कई किताबें लिखीं जिनमे  ‘राग विज्ञान’ बहुत ही प्रसिद्ध है. वे मराठी संगीत नाटक में भी एक सफल अभिनेता-गायक थे और उन्होंने प्रसिद्ध अभिनेता-गायक बाल गंधर्व के साथ काम किया.

विनायकराव को वर्ष 1965 में संगीत नाटक अकादमी की फेलोशिप मिली और वर्ष 1972 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. उन्होंने सोवियत संघ और अन्य देशों में भारतीय सांस्कृतिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भी किया.

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महिला तैराक आरती साहा

आरती साहा भारत की एक प्रमुख तैराक थीं, जो अंग्रेजी चैनल पार करने वाली पहली एशियाई महिला के रूप में जानी जाती हैं. उनका यह ऐतिहासिक उपलब्धि 29 सितंबर 1959 को दर्ज की गई, जब उन्होंने लगभग 42 मील लंबी दूरी को तैरकर पार किया. इस उपलब्धि के बाद, उन्हें भारत सरकार द्वारा वर्ष 1960 में प्रतिष्ठित पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जिससे वह यह पुरस्कार पाने वाली पहली महिला एथलीट बनीं.

आरती का जन्म 24 सितंबर 1940 को कोलकाता (तब के कलकत्ता) में हुआ था. बहुत कम उम्र में ही उन्होंने तैराकी शुरू की और सात साल की उम्र में उन्होंने कई तैराकी प्रतियोगिताएं जीतीं. उन्हें तैराकी की प्रेरणा मशहूर भारतीय तैराक मिहिर सेन से मिली, जो अंग्रेजी चैनल पार करने वाले पहले भारतीय थे.

अंग्रेजी चैनल को पार करना तैराकों के लिए सबसे कठिन चुनौतियों में से एक माना जाता है. आरती ने इसे पार करने के लिए कड़ी मेहनत की और पहली बार असफल रहने के बाद, दूसरी बार उन्होंने सफलता प्राप्त की. 16 घंटे और 20 मिनट की कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने इस चुनौती को पूरा किया, जिससे वह एशिया की पहली महिला बनीं जिसने अंग्रेजी चैनल पार किया.

आरती साहा की इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने भारत में महिलाओं के खेल में एक नई दिशा दिखाई. उन्हें तैराकी के क्षेत्र में महिलाओं के लिए एक रोल मॉडल के रूप में देखा जाता है. महिला तैराक आरती साहा का निधन 23 अगस्त 1994 को कोलकत्ता में हुआ था. साहा की दृढ़ इच्छाशक्ति और साहस ने उन्हें भारतीय खेल इतिहास में एक विशेष स्थान दिलाया. उनका जीवन यह दर्शाता है कि कड़ी मेहनत और समर्पण से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.

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लेखक एवं पत्रकार कुलदीप नैयर

कुलदीप नैयर एक प्रमुख भारतीय लेखक, पत्रकार, और मानवाधिकार कार्यकर्ता थे. उनका जन्म 14 अगस्त 1923 को सियालकोट (जो अब पाकिस्तान में है) में हुआ था. वह पत्रकारिता में एक लंबा और प्रतिष्ठित कैरियर रखते थे, जिसमें उन्होंने कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर लिखा.

नैयर ने कई प्रमुख भारतीय अखबारों के लिए काम किया, जैसे कि “द स्टेट्समैन”, “द इंडियन एक्सप्रेस”, और “द टाइम्स ऑफ इंडिया”. उन्होंने एक संपादक, स्तंभकार और संवाददाता के रूप में अपनी पहचान बनाई. उनके द्वारा लिखे गए लेख और कॉलम व्यापक रूप से पढ़े जाते थे और उनकी राय को गंभीरता से लिया जाता था.

कुलदीप नैयर को विशेष रूप से उनके इमरजेंसी के दौरान (वर्ष 1975-1977) सरकार के आलोचक के रूप में जाना जाता है. उन्होंने इस अवधि के दौरान प्रेस की स्वतंत्रता के पक्ष में और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए जोरदार आवाज उठाई. उनकी आत्मकथा, “बियोंड द लाइन्स”, एक महत्वपूर्ण पुस्तक है जो उनके जीवन, पत्रकारिता के अनुभवों और भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय की घटनाओं पर प्रकाश डालती है.

कुलदीप नैयर ने भारत और पाकिस्तान के बीच शांति और दोस्ती को बढ़ावा देने के लिए भी काम किया. वह उन कुछ लोगों में से थे जिन्होंने वर्ष 1990 के दशक में “एट्टीवालों की बैटरी” पहल की शुरुआत की, जिसमें दोनों देशों के नागरिकों के बीच संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया गया. उनका निधन 23 अगस्त 2018 को नई दिल्ली में हुआ, लेकिन उनका काम और लेखन आज भी भारतीय पत्रकारिता और समाज में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

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