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प्रकृति का अनमोल उपहार है सहजन

बहुवार्षिक सब्जी देने वाला जाना-पहचाना पौधा है सहजन. ग्रामीण क्षेत्रों के लोग अपने घरों में एक-दो पेड़ लगाकर रखते हैं. सहजन भारतीय मूल का मोरिन्गासाए परिवार का सदस्य है और इसका वनस्पतिक नाम मोरिंगा ओलीफेरा (Moringa oleifera) है. इसे हिन्दी में सहजना, सुजना, सेंजन और मुनगा और संस्कृत में शोभानजना के नाम से जानते हैं. अंग्रेजी में इसे ड्रमस्ट‍िक (Drum stick plant) के नाम से जानते हैं. सहजन की तासीर (स्वभाव) गर्म होती है. यह एक बहुवर्षिक, कमजोर तना और छोटी-छोटी पत्तियों वाला लगभग दस मीटर से भी उंचा पौधा होता है. यह कमजोर जमीन पर भी बिना सिंचाई के सालों भर हरा-भरा और तेजी से बढने वाला पौधा है. बताते चलें कि, सहजन की खेती सभी प्रकार की मिट्टियों में की जाती है.

सहजन के पेड़ अधिकतर हिमालय के तराई वाले जंगलों में ज्यादा पायें जाते हैं. इसके पेड़ तीन प्रकार के होते हैं, जिन पर लाल, काले और सफेद फूल खिलते हैं. लाल रंग के फूल वाले पेड़ की सब्जी खाने में मीठी और सफेद रंग के फूल वाले पेड़ की सब्जी कड़वी होती है. सहजन के पेड़ छोटे या मध्यम आकार के होते हैं. जबकि, इसकी छाल और लकड़ी कोमल होती है. सहजन के पेड़ की टहनी बहुत ही नाजुक होती है जो जल्दी ही टूट जाती है. इसके पत्ते 6-9 जोड़े में होते हैं जबकि, इसकी फलियां 6-18 इंच लम्बी 6 शिराओं से युक्त और धूसर होती हैं.

सहजन एक बहुउपयोगी पौधा होता है. इस पौधे के सभी भागों का प्रयोग भोजन, दवा और  औद्योगिक कार्यो में किया जाता है. सहजन में प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व व विटामिन पाए जाते है. आयुर्वेदिक डॉक्टर के अनुसार, दूध की तुलना में चार गुणा पोटाशियम तथा संतरा की तुलना में सात गुणा विटामिन सी पाया जाता है. सहजन का फूल, फल और पत्तियों का भोजन के रूप में प्रयोग किया जाता है है वहीं, इसकी छाल, पत्ती, बीज, गोंद, जड़ आदि से दवा भी तैयार की जाती है. बताते चलें की, सहजन के पौधा से गूदा निकालकर कपड़ा और कागज उद्योग में प्रयोग किया जाता है.

सहजन के बीज से तेल भी निकाला जाता है जिसे “बेन तेल” भी कहा जाता है. इस तेल का इस्तेमाल घड़ियों में किया जाता है. इसका तेल साफ़, मीठा और गंधहीन होता है और यह कभी खराब भी नहीं होता है. बेन तेल के इसी गुण के कारण इसका इस्तेमाल इत्र बनाने में भी किया जाता है. ज्ञात है कि, सहजन के पौधे का लगभग सारा हिस्सा खाने योग्य होता है. इसकी पत्तियों को सलाद और कढ़ी में की जाती है. 

सहजन का प्रयोग दर्द निवारक दवा बनाने में किया जाता है. इस पेड़ के विभन्न भागों में अनेकानेक पोषक तत्व पाए जाते हैं. इसकी फली, हरी पत्तियों व सूखी पत्तियों में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन-ए, सी और बी कॉम्पलैक्स प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. बताते चलें कि, सहजन के बीज से पानी (जल) को काफी हद तक शुद्ध करके पेयजल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. इसके बीज को पीसकर चूर्ण बनाया जाता है और उसे पानी में मिलाया जाता है. पानी में घुल जाने के कारण यह नेचुरल क्लैरीफिकेशन एजेंट बन जाता है. यह ना सिर्फ पानी को बैक्टीरिया रहित बनाता है बल्कि, यह पानी की सांद्रता को भी बढ़ाता है.

इसमें कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है जिससे हड्डियां मजबूत बनती है। इसके अलावा इसमें आइरन, मैग्नीशियम और सीलियम होता है. सहजन में विटामिन ए होता है जो कि पुराने समय से ही सौंदर्य के लिये प्रयोग किया आता जा रहा है. इसकी हरी सब्जी को खाने से बुढापा दूर रहता है और आंखों की रौशनी भी अच्छी होती है. इसके सूप पीने से शरीर का रक्त साफ होता है. सहजन में ओलिक एसिड व विटामिन सी भी प्रचुर मात्र में पाया जाता है जो मानव शरीर के लिए अति आवश्यक होता है. आयुर्वेद में 300 रोगों का उपचार सहजन से किया जाता है.

सहजन के विभिन्न अंगों के रसों का प्रयोग मधुर, वातघ्न, रुचिकारक, वेदनाशक और पाचक आदि में किया जाता है. सहजन का नियमित इस्तेमाल करने से सेक्सुअल पावर बेहतर होती है. सहजन का सूप और सब्जी खाने से पाचन तन्त्र मजबूत होता है और इसमें मौजूद फाइबर्स कब्ज की समस्या को होने नहीं देता है. अस्थमा के रोगियों को सहजन का सूप पीना फायेदेमंद होता है. यह डायबिटीज को कंट्रोल करने में भी मदद करता है.

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 Drumstick is a precious gift of nature

Drumstick is a well-known plant that gives perennial vegetables. People in rural areas keep one or two trees in their houses. Drumstick is a member of the Moringaceae family of Indian origin and its botanical name is Moringa oleifera. It is known as Sahajana, Sujana, Senjan, and Munga in Hindi and Shobhanjana in Sanskrit. In English, it is known as a Drum stick plant. Drumstick’s effect (nature) is hot. It is a multi-year, plant more than ten meters high with weak stems and small leaves. It is a green and fast-growing plant throughout the years without irrigation even on weak soil. It should be mentioned that Drumstick is cultivated in all types of soils.

Drumstick trees are mostly found in the lowland forests of the Himalayas. Its trees are of three types, on which red, black, and white flowers bloom. Vegetables from trees with red flowers are sweet to eat and vegetables from trees with white flowers are bitter. Drumstick trees are small or medium-sized. Whereas, its bark and wood are soft. The branch of the drumstick tree is very delicate and breaks quickly. Its leaves are in 6-9 pairs whereas, its pods are 6-18 inches long with 6 veins and are grey.

Drumstick is a multipurpose plant. All parts of this plant are used in food, medicine, and industrial works. Nutrients and vitamins are found in abundance in drumsticks. According to an Ayurvedic doctor, four times more potassium than milk and seven times more vitamin C than orange are found. Drumstick flowers, fruits, and leaves are used as food, while the medicine is also prepared from its bark, leaves, seeds, gum, roots, etc. Let’s tell that pulp is extracted from drumstick plants and used in the textile and paper industry.

Oil is also extracted from drumstick seeds which are also known as “Ben oil”. This oil is used in watches. Its oil is clear, sweet, and odorless and it never spoils. Due to this quality of ben oil, it is also used in making perfumes. It is known that almost all parts of the drumstick plant are edible. Its leaves are used in salads and curries.

Drumstick is used in making pain-relieving medicine. Many nutrients are found in different parts of this tree. Carbohydrates, protein, calcium, potassium, iron, magnesium, and vitamin-A, C, and B complex are found in abundance in its pods, green leaves, and dry leaves. Let us tell you that water is purified to a great extent from drumstick seeds and used as drinking water. The powder is made by grinding its seeds and it is mixed in water. When dissolved in water, it becomes a natural clarifying agent. It not only makes water free of bacteria, but it also increases the concentration of water.

It is high in calcium, which makes bones strong. Apart from this, it contains iron, magnesium, and calcium. Drumstick contains Vitamin A which is being used for beauty since ancient times. Eating its green vegetable keeps old age away and also improves eyesight. Drinking its soup purifies the blood of the body. Oleic acid and vitamin C are also found in abundance in drumsticks, which is very essential for the human body. In Ayurveda, 300 diseases are treated with drumsticks.

The juices of different parts of the Drumstick are used in sweet, carminative, appetizing, analgesic and digestive, etc. Regular use of drumsticks improves sexual power. Eating drumstick soup and vegetables strengthens the digestive system and the fibers present in it do not allow the problem of constipation to occurring. Drinking drumstick soup is beneficial for asthma patients. It also helps in controlling diabetes.

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