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वीरान शहर और अजीब पहेली-4.

नीली रोशनी का रहस्य और प्राचीन शहर का सच

बावड़ी से निकलती नीली रोशनी ने न सिर्फ चंचल की बेचैनी कम कर दी थी, बल्कि हवा में एक अजीब सी ऊर्जा भी भर दी थी. चंचल को लगा जैसे कोई भारी बोझ उसके कंधों से उतर गया हो. उसकी साँसें सामान्य हो गई थीं और मन में एक स्पष्टता आ गई थी.

“यह सिर्फ रोशनी नहीं है,” चंचल ने काँपते हुए कहा, “यह कुछ और है… मुझे कुछ महसूस हो रहा है.”

रीटा ने बावड़ी के अंदर झाँका. नीली रोशनी उस घूमने वाले पत्थर से निकल रही थी, और अब बावड़ी के सूखे किनारों पर पानी की हल्की सी चमक दिखाई दे रही थी. ऐसा लगा जैसे बावड़ी में सदियों बाद जीवन लौट रहा हो.

“यह एक प्राचीन ऊर्जा स्रोत हो सकता है,” उमेश ने अपनी विज्ञान की किताबों में पढ़ी हुई बातें याद करते हुए कहा. “हो सकता है यह शहर कभी इसी ऊर्जा से चलता हो.”

सूरज ने अपने फोन से कुछ तस्वीरें लेने की कोशिश की, पर रोशनी इतनी तेज़ थी कि कैमरा ठीक से फोकस नहीं कर पा रहा था.

जैसे ही रोशनी और तेज़ हुई, चंचल को फिर से अपने परदादा की डायरी याद आई. डायरी में एक जगह लिखा था: “जब रोशनी मिलेगी, तो पर्दा उठेगा.” उसने डायरी खोली और उस पन्ने को ढूँढा. पन्ने पर एक और अजीब प्रतीक बना हुआ था, जो बावड़ी के घूमने वाले पत्थर से मिलता-जुलता था.

“दादी कल्पना!” चंचल को अचानक याद आया. “उन्होंने एक बार बताया था कि इस शहर में एक गुप्त रास्ता था, जो सिर्फ कुछ खास लोगों को ही पता था.”

वे तुरंत दादी कल्पना के पास पहुँचे. दादी कल्पना, हमेशा की तरह, अपनी यादों में खोई हुई थीं. पर जब चंचल ने उन्हें नीली रोशनी और बावड़ी के बारे में बताया, तो उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक आई.

“वह रोशनी… वह तो जीवनदायिनी है,” दादी ने धीरे से कहा. “हमारे पुरखे कहते थे कि जब शहर पर कोई विपदा आती थी, तो वे इस रोशनी का उपयोग करते थे. यह रोशनी सिर्फ बीमारी ठीक नहीं करती थी, बल्कि यह ज्ञान का स्रोत भी थी.”

उन्होंने बताया कि इस बावड़ी के नीचे एक गुप्त कक्ष है, जहाँ शहर का सारा इतिहास और ज्ञान छिपा हुआ है. वह कक्ष तभी खुलता था जब सही समय पर और सही विधि से चाबी का इस्तेमाल किया जाता था.

“यह शहर सिर्फ वीरान नहीं है, यह सोया हुआ है,” दादी कल्पना ने बुदबुदाया. “और यह रोशनी उसे जगाने की कुंजी है.”

दादी कल्पना ने एक प्राचीन कविता गुनगुनाई, जिसमें कुछ और संकेत छिपे थे. इस कविता के अनुसार, जब नीली रोशनी अपने उच्चतम बिंदु पर पहुँचती, तो बावड़ी के अंदर एक छिपा हुआ प्रवेश द्वार खुलता था.

वे चारों वापस बावड़ी की ओर भागे. नीली रोशनी अब और भी तेज़ हो गई थी, और बावड़ी के अंदर से एक मद्धम गूँज सुनाई दे रही थी. जैसे ही रोशनी एक चरम पर पहुँची, बावड़ी के एक तरफ की दीवार धीरे-धीरे खिसकने लगी और एक अँधेरा रास्ता दिखाई दिया.

“यह रहा गुप्त द्वार!” सूरज चिल्लाया.

रास्ता अँधेरा था और नम था, पर नीली रोशनी की एक हल्की चमक अंदर तक जा रही थी. चंचल को लगा जैसे उसे कोई अदृश्य शक्ति अंदर खींच रही हो. उसे अपने सपनों में देखे गए प्राचीन शहर की तस्वीरें और स्पष्ट होती जा रही थीं. यह शहर सिर्फ खंडहर नहीं था, बल्कि एक समृद्ध सभ्यता का प्रमाण था जो किसी बीमारी से तबाह हो गई थी.

क्या इस गुप्त कक्ष में उन्हें चंचल की बीमारी का असली इलाज मिलेगा? क्या वे इस वीरान शहर के अतीत और उसके पतन का पूरा सच जान पाएंगे? और यह नीली रोशनी भविष्य में उनके लिए क्या रहस्य खोलेगी?

 

शेष भाग अगले अंक में…,

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