श्रावण का पावन और पवित्र महीना अपने अंतिम चरण में चल रहा है. इस महीने में देवों के देव महादेव की पूजा अर्चना की जाती है लेकिन श्रावण महीने के पूर्णिमा के दिन जो श्रावण महीना का अंतिम दिन भी कहा जाता है और इस दिन की समाप्ति रक्षा सूत्र बांध कर किया जाता है. रक्षा सूत्र या यूँ कहें रक्षा बंधन पर्व की शरुआत कब हुई यह कोई नहीं जानता है लेकिन, हमारे पौराणिक ग्रंथों जैसे स्कन्ध पुराण, पद्मपुराण और श्रीमद्दभागवत महापुराण में वामनावतार नामक कथा में रक्षा बंधन का प्रसंग मिलता है.
रक्षाबंधन के इस महापर्व में रक्षा सूत्र या यूँ कहें कि राखी का बहुत ही महत्व होता है. रक्षा सूत्र या राखी जो कच्चे सुत से लेकर रंगीन कलावे, रेशमी धागे या सोने-चांदी के बने होते हैं. आमतौर पर राखी प्राय: बहने अपने भाई को बांधती है लेकिन ब्रहामन, गुरु और परिवार की छोटी बच्चियों द्वारा सम्मानित सम्बन्धियों जैसे कि पुत्री द्वारा अपने पिता को या सार्वजनिक रूप से किसी नेता या प्रतिष्ठित व्यक्तियों को भी राखी बांधा जाता है. वर्तमान समय में प्रकृति संरक्षण हेतु पेड़-पौधों को भी राखी बाँधने की परम्परा की शुरुआत हो चुकि है. बताते चलें कि, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पुरुष सदस्य परस्पर भाईचारे के लिए एक-दुसरे को भगवा रंग की राखी बांधते हैं. हिन्दू धर्म के किसी भी धार्मिक अनुष्ठान में भी रक्षासूत्र बांधते हुए श्लोक का उच्चारण किया जाता है.
येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबल:।तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल ॥
हिंदी फिल्मों में एक दौर हुआ करता था जिसमें रक्षाबंधन के उपर भी गीत-संगीत हुआ करते थे. बताते चलें कि, वर्ष 1950-60 के दशक में रक्षाबंधन के नाम से कई फ़िल्में बनाई गई थी.वर्ष 1962 में राखी पर दूसरी फिल्म आई थी जिसके बोल थे “राखी धागों का त्यौहार, बँधा हुआ इक-इक धागे में भाई-बहन का प्यार”.वर्ष छोटी बहन (1959) – भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना, हरे रामा हरे कृष्णा (1971)- फूलों का तारों का सबका कहना है, एक हजारों में मेरी बहना है, रेशम की डोरी (1974)- बहना ने भाई की कलाई पे प्यार बांधा है, प्यार के दो तार से संसार, चम्बल की कसम (1980) – चंदा रे मेरे भईया से कहना, बहना याद करें,
संकलन: – ज्ञानसागरटाइम्स टीम.
Video Link:- https://youtu.be/lMOLE9h5ND8