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दिवस…

दिवस का अर्थ होता है दिन या यूँ कहें कि, पृथ्वी द्वारा अपने अक्ष पर एक घूर्णन के समय के बराबर समयावधि को ही दिन कहा जाता है. दिवस का मुख्य पर्यायवाची शब्द  होता है – वासर, अह्न, दिन, याम व  दिवा. जबकि ‘ दिवस ‘ का विलोम ‘ रात्रि ‘ , ‘ रात ‘ का विलोम ‘ दिन ‘ एवं ‘ अन्धकार ‘ का विलोम ‘ प्रकाश होता है.’

सनातन संस्कृति में दिवस का विशेष महत्व होता है. हर दिवस का अपना अलग ही रंग होता है. आज 21 मई का दिन है. आज पुरे देश में आतंकवाद विरोधी दिवस मनाया जा रहा है. बताते चलें कि ‘आतंकवाद विरोधी दिवस ‘ मनाने की शुरुआत आज से 31 वर्ष पूर्व आज ही के दिन देश के छठे प्रधानमंत्री को आतंकवादियों ने बम से उड़ा दिया था उसके बाद 21 मई के दिन को बलिदान दिवस मनाया जाता था. करीब 20 वर्ष बाद भारतीय संसद पर आतंकी हमला हुआ था जिसमे कई जवान शहीद हो गये थे. उन शहीद हुए जवानों की याद में ही आतंकवाद विरोधी दिवस मनाया जाता है.

इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य यह है कि,आतंकवाद के प्रति जन-जन को जागरूक करना और इससे होने वाली घटनाओं को रोका जा सके और आतंकवाद से होने वाली जन-धन हानि को समाप्त करना ही आतंकवाद विरोधी दिवस मनाने का उद्देश्य है. वहीँ, राष्ट्रीय हितों पर पड़ने वाले विपरित प्रभावों, के कारण आम जनता को हो रही परेशानियों व आतंकी हिंसा से दूर रखना है. आतंकवाद से संबंधित  पूरे विश्व में ऐसी कई प्रकार की घटनाऐं घटी है जिससे मानव समाज को काफी आघात पहुंचा है. उन सभी सभी पीड़ितों और उनके परिवारों को याद व जागरूक ही “आतंकवाद विरोधी दिवस” का मुख्य उद्देश्य है.

आज ही के दिन भारत के प्रसिद्ध व्यंग्य रचनाकार शरद जोशी व बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति सर सुंदर लाल का जन्म हुआ था. बताते चलें कि, भारत के प्रसिद्ध व्यंग्य रचनाकार शरद जोशी का जन्म भारत के प्रसिद्ध व्यंग्य रचनाकार शरद जोशी का जन्म मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में 21 मई 1931 को हुआ था. उन्होंने कुछ वर्षों तक नौकरी की और बाद में लेखन को ही आजीविका के रूप में अपना लिया. शरद जोशी के बारे में कहा जाता है कि अपने समय के अनूठे व्यंग्य रचनाकार थे.अपने वक्त की सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक विसंगतियों को उन्होंने अत्यंत पैनी निगाह से देखकर और पैनी कलम से बड़ी ही साफगोई के साथ उन्हें सटीक शब्दों में व्यक्त करते थे. उन्होंने कई फ़िल्में, नाटक व टेलीविजन के कई धारावाहिक लिखे.

वहीँ, प्रसिद्ध विधिवेत्ता और सार्वजनिक कार्यकर्ता सर सुंदर लाल का जन्म 21 मई 1857 को जसपुर (नैनीताल) उत्तरांचल में हुआ था.  उन्होंने  पहले वकालत की परीक्षा पास की और फिर कोलकाता विश्वविद्यालय से स्नातक करने के बाद वकालत करने लगे.अपनी प्रतिभा के बल पर उन्होंने इस क्षेत्र में शीघ्र ही बड़ी सफलता अर्जित कर ली. जिसके फलस्वरूप सरकार ने उन्हें ” सर ” की उपाधि दी थी. सर सुंदर लाल अवध के ज्यूडिशियल कमिश्नर और इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज रहे.वर्ष 1916 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रथम वाइस चांसलर बने. इस विश्वविद्यालय की स्थापना में वे मालवीय जी के बड़े सहायक थे. हिन्दू आचार-विचार में निष्ठा रखने वाले सर सुंदर लाल संवैधानिक तरीकों से देश की स्वतंत्रता के समर्थक थे.वे देश की समृद्धि के लिए औद्योगीकरण को आवश्यक मानते थे साथ ही उनके अनुसार, शिक्षा प्रसार को ही उन्नति का साधन मानते थे.

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