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चित्रा उर्फ़ चैत…

हिन्दू पंचांग के अनुसार, साल का अंतिम महीना फाल्गुन का महिना होता है जबकि चैत पहला  महिना होता है लेकन, अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह अप्रैल का महीना होता है. हिन्दू पंचांग के अनुसार, साल के बारह महीनों के नाम भिन्न-भिन्न नक्षत्रों के नाम के अनुसार रखे गये हैं. अमावस्या के बाद चन्द्रमा जब मेष राशि और आश्विन नक्षत्र में प्रकट होकर प्रतिदिन एक-एक कला बढ़ता हुआ 15वें दिन ‘चित्रा नक्षत्र’ को प्राप्त करता है. इसी चित्र नक्षत्र के कारण हिदी महीने के अनुसार पहला महीना ‘चैत’ कहलाता है.

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने चैत शुक्ल प्रतिपदा से सृष्टि की रचना शुरू की थी. इसे संवत्सर भी कहा जाता है जिसका अर्थ होता है सम+वत्सर यानि ‘पूर्ण वर्ष’. पौराणिक ग्रंथो के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु ने दशावतार में से पहला अवतार “मत्स्य अवतार” को धारण किया था. प्रलयकाल में अथाह जलराशि में मनु की नौका को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया था. प्रलयकाल की समाप्ति के बाद मनु ने सृष्टि की रचना की थी.

 क्या आप जानते हैं…?

 1.      चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि से ही सत युग का प्रारंभ माना जाता है. यह तिथि हमें सतयुग की ओर बढऩे की प्रेरणा देती है. सत युग का अर्थ होता है कर्म करें और कर्तव्य के मार्ग पर आगे बढ़ते रहें.

2.      शुक्ल प्रतिपदा कल्पादि तिथि है. इस दिन से प्रारम्भ कर चार महीने तक जलदान करना चाहिए.

3.      शुक्ल तृतीया को उमाशिव और अग्नि का पूजन किया जाता है. चुकिं, शुक्ल तृतीया मन्वादि तिथि है. इसीलिए इस दिन को मत्स्य जयंती मनानी चाहिए.

4.      चतुर्थी को भगवान गणपति को लड्डुओं से पूजन करना चाहिए.

5.      पंचमी को लक्ष्मी पूजन और नागों की पूजा करनी चाहिए.

6.      षष्ठी को स्वामी कार्तिकेय की पूजा की जाती है.

7.      सप्तमी को दमनक पौधे से सूर्य की पूजा की जाती है.

8.      अष्टमी को माँ भवानी के साथ कुछ अन्य व्रत भी किये जाते हैं.यात्रा के लिए उत्तम दिन माना जाता है.

9.      अष्टमी के दिन ब्रह्मपुत्र नदी में स्नान का विशेष महत्व होता है.

10. नवमी को माँ भद्रकाली की पूजा की जाती है.

11. दशमी को दमनक पौधे से धर्मराज की पूजा करनी चाहिए.

12. शुक्ल पक्ष एकादशी को कृष्ण भगवान का दोलोत्सव तथा दमनक से ऋषियों की पूजा की जाती है. महिलाएं इस दिन कृष्णपत्नी रुक्मिणी की पूजन करती है तथा सन्ध्या काल में सभी दिशाओं में पंचगव्य फेंकती हैं.

13. द्वादशी को दमनकोत्सव मनाया जाता है.

14. त्रयोदशी को कामदेव की पूजा चम्पा के पुष्पों (फूलों) तथा चन्दन से की जाती है.

15. चतुर्दशी को नृसिंहदोलोत्सव मनाया जाता है. इसी दिन दमनक पौधे से एकवीर, भैरव तथा शिव की भी पूजा की जाती है.

16. पूर्णिमा को मन्वादि, हनुमान जयंती तथा वैशाख स्नानारम्भ किया जाता है.

17. चैत्र मास की पूर्णिमा को “चैते पूनम” भी कहा जाता है, इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने ब्रज में उत्सव रचाया था. जिसे हम सभी महारास के नाम से भी जानते हैं. बताते चलें कि, यह महारास कार्तिक पूर्णिमा को शुरू होकर चैत्र की पूर्णिमा को समाप्त हुआ था.

18. चैत्र मास की पूर्णिमा के दिन स्त्री-पुरुष, वृद्ध और बच्चे पवित्र नदियों में स्नान कर स्वयं को पवित्र करते हैं. इस दिन घरों में लक्ष्मी-नारायण को प्रसन्न करने के लिये व्रत किया जाता है साथ ही भगवान सत्यनारायण की कथा भी सुनी जाती है.

19. चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को हनुमान जी का जन्मदिवस मनाया जाता है. पौराणिक ग्रंथ वायु पुराण के अनुसार कार्तिक की चौदस के दिन हनुमान जयंती मनाई जाती है.      

20. पौराणिक ग्रंथो के अनुसार, चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा तारीख से ही सृष्टि का आरंभ हुआ है. बताते चलें कि, इसी दिन से भारत में समय की गणना शुरूआत हुई. जबकि, ज्योतिष विद्यामें ग्रह, ऋतु, मासतिथि एवं पक्ष आदि की गणना भी चैत्र प्रतिपदा से ही की जाती है.

21. चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा बसंत ऋतु में होती है.

22. शाक्त संप्रदाय के अनुसार, बासंतिक नवरात्र का आरंभ भी इसी दिन से होता है.

23. पौराणिक ग्रंथ स्मृति कौस्तुभ के अनुसार, रेवती नक्षत्र में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप में अवतार लिया था.

24. ईरान में इस तिथि को ‘नौरोज’ यानी ‘नया वर्ष’ मनाया जाता है.

25. इस दिन को जम्मू-कश्मीर में ‘नवरेह‘, पंजाब में वैशाखीमहाराष्ट्र में ‘गुडीपडवा’, सिंधी में चेतीचंड, केरल में ‘विशु‘, असम में ‘रोंगली बिहू’ आदि मनाया जाता है. जबकि, आंध्रप्रदेश में ‘उगादिनाम’ नामक पर्व मनाया जाता है. उगादिका अर्थ होता है युग का प्रारंभ, या यूँ कहें कि, ब्रह्मा की सृष्टि रचना का पहला दिन.

26. विक्रम संवत की चैत्र शुक्ल की पहली तिथि से न केवल नवरात्रि में दुर्गा व्रत-पूजन का आरंभ होता है, बल्कि राजा रामचंद्र का राज्याभिषेक, युधिष्ठिर का राज्याभिषेक, सिख परंपरा के द्वितीय गुरु अंगद देव का जन्म, आर्य समाज की स्थापना हुई थी.

27. चैत महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को ‘पापमोचिनी एकादशी’ कहते हैं जबकि, शुक्ल पक्ष की एकादशी को ‘कामदा एकादशी’ कहा जाता है.

28. ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत चैत्र महीने से होती है. चैत्र महीने के नवमी को ‘हरेला’ मनाया जाता है.

29. वर्षा ऋतु की शुरुआत श्रावण (सावन) माह से होती है.

30. शीत ऋतु की शुरुआत आश्विन महीने से होती है. आश्विन महीने की दशमी को ‘हरेला’ मनाया जाता है.

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According to the Hindu calendar, the last month of the year is the month of Phalgun while Chait is the first month, but according to the English calendar, it is the month of April. According to the Hindu calendar, the names of the twelve months of the year have been kept according to the names of different constellations. After the new moon, when the moon appears in Aries and Ashwin Nakshatra, it attains ‘Chitra Nakshatra’ on the 15th day, increasing one kala every day. Due to this Chitra Nakshatra, according to the Hindi month, the first month is called ‘Chait’.

According to mythological texts, Lord Brahma started the creation of the universe from Chait Shukla Pratipada. It is also called Samvatsar which means Sam+Vatsar i.e. ‘full year’. According to mythological texts, on this day Lord Vishnu assumed the first incarnation of Dashavatara, the “fish avatar”. Manu’s boat was taken to a safe place in the bottomless water during the doomsday. Manu created the universe after the end of doomsday.

Do you know…?

1.      Sat Yuga is considered to start from Chaitra Shukla Pratipada Tithi. This date gives us the inspiration to move towards Satyug. The meaning of Sat Yuga is to perform actions and keep moving forward on the path of duty.

2.      Shukla Pratipada is Kalpadi Tithi. Starting from this day, water donations should be done for four months.

3.      Uma, Shiva, and Agni are worshiped on Shukla Tritiya. Because, Shukla Tritiya is Manwadi Tithi. That is why Matsya Jayanti should be celebrated on this day.

4.      Lord Ganpati should be worshiped with laddus on Chaturthi.

5.      Lakshmi Pujan and worship of snakes should be done on Panchami.

6.      Swami Kartikeya is worshiped on 6. Shashthi.

7.      Sun is worshiped with the Damanak plant on Saptami.

8.      Some other fasts are also observed along with Maa Bhavani on Ashtami. It is considered the best day for Yatra.

9.      Bathing in the Brahmaputra river on the day of Ashtami has special significance.

10. Mother Bhadrakali is worshiped on 10. Navami.

11. Dharamraj should be worshiped with the Damanak plant on Dashami.

12. Shukla Paksha Ekadashi, Lord Krishna’s Dolotsav, and sages are worshiped with Damanak. Women worship Krishna’s wife Rukmini on this day and throw Panchagavya in all directions in the evening.

13. Damankotsav is celebrated on Dwadashi…

14. Cupid is worshiped on Trayodashi with Champa flowers and sandalwood.

15. Narsinghdolotsav is celebrated on

16. Chaturdashi. Ekveer, Bhairav, and Shiva are also worshiped with the Damanak plant on this day.

17. Manwadi, Hanuman Jayanti, and Vaishakh baths are started on a full moon day.

18. The full moon of Chaitra month is also known as “Chaite Poonam”, on this day Lord Shri Krishna created a festival in Braj. Whom we all also know by the name of Maharas. Let us tell you that this Maharasa started on the full moon of Kartik and ended on the full moon of Chaitra.

19. On the full moon day of Chaitra month, women, men, old people, and children purify themselves by bathing in holy rivers. On this day, fasting is observed in homes to please Lakshmi-Narayan, along with the story of Lord Satyanarayan is also heard.

20. Hanuman ji’s birthday is celebrated on Chaitra Shukla Purnima. According to the mythological book Vayu Purana, Hanuman Jayanti is celebrated on the fourteenth day of Kartik.

21. According to mythological texts, the creation started from the Pratipada date of Chaitra Shukla. Let us tell you that, from this day the calculation of time started in India. Whereas, in astrology, the calculation of planet, season, month, date and side, etc. is also done from Chaitra Pratipada only.

22. Pratipada of Chaitra Shukla Paksha occurs in spring.

23. According to the Shakta sect, the Basantik Navratri also starts from this day.

24. According to the mythological text Smriti Kaustubh, Lord Vishnu incarnated in the form of a fish on the day of Chaitra Shukla Pratipada in Revati Nakshatra.

25.  In Iran, ‘Nauroz’ i.e. ‘New Year’ is celebrated on this date.

26. This day is celebrated as ‘Navareh’ in Jammu and Kashmir, Vaishakhi in Punjab, ‘Gudipadwa’ in Maharashtra, Chetichand in Sindhi, ‘Vishu’ in Kerala, ‘Rongali Bihu’ in Assam, etc. Whereas, a festival named ‘Ugadinam’ is celebrated in Andhra Pradesh. Ugadika means the beginning of an era, or rather, the first day of Brahma’s creation.

27. From the first date of Chaitra Shukla of Vikram Samvat, not only Durga fasting-worship begins in Navratri, but also the coronation of King Ramchandra, the coronation of Yudhishthir, the birth of Angad Dev, the second Guru of Sikh tradition, Arya Samaj was established.

28. Ekadashi of Krishna Paksha of Chait month is called ‘Papmochini Ekadashi’ whereas, Ekadashi of Shukla Paksha is called ‘Kamda Ekadashi’.

29. The summer season begins with the month of Chaitra. ‘Harela’ is celebrated on the ninth day of Chaitra month.

30. The rainy season starts in the month of Shravan (Sawan).

31. Winter starts from the month of Ashwin. ‘Harela’ is celebrated on the Dashami of Ashwin month.

Arvind Kumar Sharma.

 

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