व्यक्ति विशेष – 758.
स्वतंत्रता सेनानी वीर सुरेंद्र साई
वीर सुरेंद्र साई भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान स्वतंत्रता सेनानी थे. वे 20वीं सदी के उपनिषदों में जन्मे थे और महात्मा गांधी के साथ मिलकर स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा बने.
वीर सुरेंद्र साई का जन्म 23 जनवरी 1809 को हुआ था. उन्होंने अपनी शिक्षा जबलपुर और इलाहाबाद में पूरी की और फिर वे बराबंकी जिले के गोसांई गांव में गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त करने गए. स्वतंत्रता संग्राम के समय, वीर सुरेंद्र साई ने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ साहसी और संघर्षपूर्ण कदम उठाए उन्होंने गोरखपुर और बस्ती जिलों में स्वतंत्रता सेना की स्थापना की और नेतृत्व किया.
वीर सुरेंद्र साई का स्वतंत्रता संग्राम में योगदान महत्वपूर्ण था. उन्होंने कई बार ब्रिटिश अधिकारियों के खिलाफ जूझा और अपने साथियों के साथ स्वतंत्रता संग्राम को सशक्त बनाया. वीर सुरेंद्र साई ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बहुत से बलिदान दिए और अपनी शौर्यगाथाओं के लिए प्रसिद्ध हुए. उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के बाद भी समाज सेवा के क्षेत्र में अपना योगदान जारी रखा और लोगों के लिए काम किया.
वीर सुरेंद्र साई का निधन 28 फरवरी 1884 को हुआ था. उनकी यादें भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान संघर्षके रूप में बनी हुई हैं और उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए अपनी जान की आहुति दी. वे एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे और उनकी यादें हमें हमारे स्वतंत्रता संग्राम के महत्व को समझने में मदद करती हैं.
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सुभाष चन्द्र बोस
सुभाष चन्द्र बोस भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी और राष्ट्रवादी नेता थे. उन्हें “नेताजी” के नाम से जाना जाता है. उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष किया और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में एक प्रमुख भूमिका निभाई.
सुभाष चन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को कटक, ओडिशा में हुआ था. उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस था जो कि एक प्रतिष्ठित वकील थे और उनकी माता का नाम प्रभावती देवी था.
सुभाष चन्द्र बोस की प्रारंभिक शिक्षा कटक के रेवेन्सॉ कॉलेजिएट स्कूल में हुई. बाद में उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक किया और फिर भारतीय सिविल सेवा (ICS) की तैयारी के लिए इंग्लैंड गए. उन्होंने 1920 में आईसीएस की परीक्षा पास की, लेकिन देशभक्ति की भावना के कारण उन्होंने नौकरी छोड़ दी और स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हो गए.
सुभाष चन्द्र बोस भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक प्रभावशाली नेता थे. वे महात्मा गांधी के अहिंसक दृष्टिकोण के विरोधी थे और मानते थे कि स्वतंत्रता के लिए सशस्त्र संघर्ष आवश्यक है. उन्होंने 1938 – 39 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया. लेकिन गांधीजी और कांग्रेस के अन्य नेताओं के साथ विचारधारात्मक मतभेदों के कारण उन्होंने इस्तीफा दे दिया और अपनी अलग पार्टी “फॉरवर्ड ब्लॉक” की स्थापना की.
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, सुभाष चन्द्र बोस ने ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए जर्मनी और जापान से समर्थन मांगा. उन्होंने जापान की सहायता से “आजाद हिंद फौज” (Indian National Army – INA) का गठन किया. इस सेना ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ पूर्वोत्तर भारत और बर्मा (अब म्यांमार) में संघर्ष किया.
बोस ने “दिल्ली चलो” का नारा दिया और INA के साथ भारत की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया. 21 अक्टूबर 1943 को, सुभाष चन्द्र बोस ने सिंगापुर में “आजाद हिंद सरकार” की स्थापना की और स्वयं उसके प्रधानमंत्री बने. यह सरकार भारत की स्वतंत्रता के लिए संघर्षरत रही. सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु के बारे में कई विवाद और रहस्य हैं. आधिकारिक तौर पर माना जाता है कि 18 अगस्त 1945 को ताइवान में एक हवाई दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई थी, लेकिन इस घटना के बारे में कई प्रश्न और अटकलें आज भी जारी हैं. कई लोग मानते हैं कि वे दुर्घटना में जीवित बच गए थे और उनका बाद का जीवन गुप्त रूप से व्यतीत हुआ.
सुभाष चन्द्र बोस की देशभक्ति, साहस, और आत्मसमर्पण की भावना ने उन्हें भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महानायक बना दिया है. उनका “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” का नारा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अमर हो गया है. उनकी विरासत आज भी भारत में सम्मानित है, और उन्हें देश के सबसे महान स्वतंत्रता सेनानियों में से एक माना जाता है.
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उद्योगपति कमलनयन बजाज
कमलनयन बजाज भारतीय उद्योगपति और भारतीय उद्योग के महत्वपूर्ण नामों में से एक थे. वे भारतीय उद्योग के बड़े ग्रुप, बजाज ग्रुप के संस्थापक और नेता थे. उन्होंने अपने जीवन के दौरान उद्योग, वित्त, और सामाजिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान किया। कमलनयन बजाज का जन्म 23 जनवरी 1915 को हुआ था.
उन्होंने पूणा, महाराष्ट्र में अपना शिक्षा कार्य पूरा किया और फिर बजाज ग्रुप के परिवार के उद्योग में शामिल हो गए. उन्होंने बजाज ग्रुप को एक महत्वपूर्ण उद्योग विराट बनाया, जिसमें वाहन, ऊर्जा, साइकिल, और उपभोक्ता उत्पादों के कई क्षेत्र शामिल हैं.
कमलनयन बजाज को उनके उद्योगिका दृढ़ नेतृत्व के लिए भी जाना जाता है. उन्होंने भारतीय उद्योग को विकसित करने के लिए अपने अनुभव और संघर्षों का सार्थक उपयोग किया. उन्होंने वित्तीय संस्थानों के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया और उन्होंने बजाज ग्रुप को एक आधिकारिक आर्थिक इकाई बनाने में मदद की. कमलनयन बजाज का समाज सेवा में भी महत्वपूर्ण योगदान था, और उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, और सामाजिक क्षेत्र में विभिन्न संगठनों के साथ काम किया. उन्होंने भारतीय उद्योग और समाज के विकास में अपने महत्वपूर्ण योगदान के लिए कई पुरस्कार भी प्राप्त किए.
कमलनयन बजाज का निधन 1 मई 1972 को हुआ, लेकिन उनकी यादें भारतीय उद्योग और समाज सेवा के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण कार्यों के साथ जिंदा हैं. वे एक प्रेरणा स्रोत और उदाहरण के रूप में माने जाते हैं और उनकी दृढ़ नेतृत्व कौशल की सराहना की जाती है.
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राजनीतिज्ञ बाल ठाकरे
बाल ठाकरे जिन्हें बालासाहेब ठाकरे के नाम से भी जाना जाता था, महाराष्ट्र के एक प्रसिद्ध राजनेता थे. उन्होंने शिवसेना नामक एक दक्षिणपंथी मराठी और हिंदू राष्ट्रवादी पार्टी की स्थापना की, जो मुख्य रूप से महाराष्ट्र राज्य में सक्रिय है.
बाल ठाकरे का जन्म 23 जनवरी 1926 को पुणे के चंद्रसेनिय कायस्थ प्रभु परिवार में हुआ था. उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत एक कार्टूनिस्ट के रूप में की थी. उन्होंने ‘मार्मिक’ नामक एक साप्ताहिक पत्रिका शुरू की जिसमें उन्होंने मराठी लोगों के मुद्दों को उठाया. धीरे-धीरे, उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और वर्ष 1966 में शिवसेना की स्थापना की.
शिवसेना ने मराठी लोगों के हितों की रक्षा के लिए काम किया और महाराष्ट्र में एक शक्तिशाली राजनीतिक ताकत बन गई. पार्टी ने मराठी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए. बाल ठाकरे कई विवादों में भी रहे. उन्हें अक्सर आक्रामक हिंदुत्व की वकालत करने के लिए जाना जाता था. उन्होंने हिटलर की प्रशंसा भी की थी.
बाल ठाकरे का महाराष्ट्र की राजनीति पर गहरा प्रभाव रहा. उन्होंने कई दशकों तक राज्य की राजनीति को प्रभावित किया. बाल ठाकरे का निधन 17 नवंबर, 2012 को हुआ था. उनके बेटे उद्धव ठाकरे ने शिवसेना का नेतृत्व संभाला.
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फिल्म निर्देशक रमेश सिप्पी
रमेश सिप्पी भारतीय सिनेमा के एक प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक हैं। उन्हें भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए जाना जाता है. उन्होंने कई यादगार फिल्में बनाई हैं, जिनमें शोले, शक्ति और बाजीगर जैसी फिल्में शामिल हैं.
रमेश सिप्पी का जन्म 23 जनवरी 1947 को पाकिस्तान के कराची में हुआ था. विभाजन के बाद सिप्पी का परिवार मुंबई आकर बस गया. रमेश सिप्पी ने अपनी शुरुआती पढाई मुंबई में ही सम्पन्न की है. बाद में उन्होंने बंबई विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की.
रमेश सिप्पी ने दो शादियां की हैं. उनकी दूसरी पत्नी अभिनेत्री किरण जुनेजा है. उनके दो बच्चे हैं-रोहन कपूर जो कि जो कि फिल्म निर्माता निर्देशक हैं. उनकी एक बेटी हैं शीना कपूर उनकी शादी शशि कपूर के बेटे कुणाल कपूर से हुई है.
सिप्पी ने अपने निर्देशन कैरियर की शुरुआत फिल्म अंदाज (1971) से की थी. रमेश सिप्पी की सबसे यादगार फिल्म शोले है. यह फिल्म भारतीय सिनेमा की सबसे सफल फिल्मों में से एक है. शोले ने भारतीय सिनेमा में एक नया अध्याय जोड़ा और इसे एक कल्ट क्लासिक बना दिया. रमेश सिप्पी ने शोले के अलावा भी कई अन्य सफल फिल्में बनाई हैं, जिनमें शामिल हैं:
शक्ति: – यह फिल्म भी शोले की तरह ही एक बड़ी हिट रही थी.
बाजीगर: – यह फिल्म शाहरुख खान के कैरियर की शुरुआती फिल्मों में से एक थी.
रोजा: – यह फिल्म एक राजनीतिक थ्रिलर थी.
रमेश सिप्पी की फिल्में अपनी मजबूत कहानियों और किरदारों के लिए जानी जाती हैं. उन्होंने विभिन्न शैलियों की फिल्में बनाई हैं, जिनमें एक्शन, ड्रामा और रोमांस शामिल हैं. उनकी फिल्में भारतीय संस्कृति और समाज पर आधारित होती हैं.
रमेश सिप्पी को उनके काम के लिए कई पुरस्कार और सम्मान मिले हैं. उन्हें भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिल चुका है. रमेश सिप्पी भारतीय सिनेमा के एक महान निर्देशक हैं. उनकी फिल्में भारतीय सिनेमा के इतिहास में हमेशा याद रखी जाएंगी.
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अभिनेत्री रेखा भारद्वाज
रेखा भारद्वाज एक भारतीय पार्श्व गायिका हैं, जिन्होंने अपनी मधुर आवाज़ और विभिन्न शैलियों में गाने गाने की क्षमता से बॉलीवुड में एक खास पहचान बनाई है. उनकी आवाज़ में एक अनूठी खूबसूरती है जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती है.
रेखा भारद्वाज का जन्म 23 जनवरी 1964 को दिल्ली में हुआ था. रेखा पांच बहनें और एक भाई हैं. रेखा की शादी वर्ष 1991 में हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध फिल्म-मेकर विशाल भारद्वाज से सम्पन्न हुई है.
रेखा भारद्वाज ने अपने कैरियर की शुरुआत 1997 में फिल्म “चाची 420” से की थी. इस फिल्म के गीत “एक वो दिन भी” ने उन्हें पहचान दिलाई. इसके बाद उन्होंने कई हिट फिल्मों के लिए गाने गाए, जिनमें “ओम शांति ओम”, “देवदास”, “मकबूल”, “ओमकारा”, “गुलाब गैंग” और “पद्मावत” शामिल हैं.
रेखा भारद्वाज ने अपने पति, मशहूर संगीतकार विशाल भारद्वाज के साथ मिलकर कई यादगार गाने दिए हैं. दोनों की जोड़ी को बॉलीवुड का एक सफल संगीत जोड़ा माना जाता है. रेखा भारद्वाज ने केवल हिंदी ही नहीं, बल्कि बंगाली, मराठी, पंजाबी और मलयालम भाषाओं में भी गाने गाए हैं. उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा से सभी को प्रभावित किया है.
रेखा भारद्वाज को उनके शानदार गायन के लिए कई पुरस्कार मिले हैं, जिनमें दो फिल्मफेयर पुरस्कार और एक राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार शामिल हैं.
फिल्में: – चाची 420, ओम शांति ओम, देवदास, मकबूल, ओमकारा, गुलाब गैंग और पद्मावत.
लोकप्रिय गाने: – “एक वो दिन भी” (चाची 420), “अम्मा जी” (देवदास), “बेखुदी” (ओमकारा), “इंकलाब” (गुलाब गैंग) और “घूमर” (पद्मावत).
रेखा भारद्वाज एक प्रतिभाशाली गायिका हैं, जिन्होंने भारतीय सिनेमा को कई यादगार गीत दिए हैं. उनकी मधुर आवाज़ और गायन शैली ने उन्हें दर्शकों का दिल जीत लिया है.
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क्रांतिकारी नरेन्द्र मोहन सेन
नरेंद्र मोहन सेन एक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख क्रांतिकारी थे. वह बंगाल प्रेसीडेंसी (अब बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल) से थे और भारत की आजादी के संघर्ष में सक्रिय रूप से भाग लेते थे. नरेंद्र मोहन सेन का नाम बंगाल के उन क्रांतिकारियों में गिना जाता है जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई में अहम भूमिका निभाई.
नरेंद्र मोहन सेन का जन्म 13 अगस्त, 1887 ई. में ब्रिटिश शासन के दौरान पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में हुआ था और उनका निधन 23 जनवरी, 1963 को हुआ.
वह “अनुशीलन समिति” के सदस्य थे, जो कि एक क्रांतिकारी संगठन था. यह संगठन ब्रिटिश शासन को समाप्त करने और भारत को स्वतंत्रता दिलाने के लिए हिंसक और गैर-हिंसक दोनों तरीकों का इस्तेमाल करता था. नरेंद्र मोहन सेन ने विभिन्न क्रांतिकारी गतिविधियों में हिस्सा लिया, जिसमें ब्रिटिश अधिकारियों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष और बम धमाकों जैसी गतिविधियाँ शामिल थीं.
उनका जीवन संघर्ष और साहस का प्रतीक था, और उन्हें भारत की स्वतंत्रता के लिए अपने बलिदान के लिए याद किया जाता है. उनकी क्रांतिकारी गतिविधियों ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को गति दी और उन्हें देश के क्रांतिकारियों में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया.



