हर वर्ष 14-15 जनवरी को उत्तर भारत में मकर संक्रांति, पंजाब और हरियाणा राज्यों में लोहड़ी और दक्षिण भारत में पोंगल पर्व मनाया जाता है. हर वर्ष 14-15 जनवरी को किसानों का पर्व बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है.
उत्तर भारत की तरह दक्षिण भारत में भी सूर्योपासना का महपर्व पोंगल की शुरुआत हो चुकी है. पोंगल भी चार दिवसीय पर्व है. चार दिवसीय महापर्व का हर दिन के रंग अनूठे गतिविधियाँ और परंपराएँ होती हैं, जो इसे विशेष बनाती हैं. इस हर्षोल्लास भरे माहौल में, लोग पोंगल पकवान तैयार करते हैं, घरों को सजाते हैं और आपस में मिलते-जुलते हैं. पोंगल पर्व की शुरुआत 13 जनवरी से शुरू हो गई है.
पोंगल पर्व के पहले दिन घरों की साफ़-सफाई कर पुराने अनुपयोगी वस्तुओं को आग में जलाया जाता है. यह दिन नवजीवन की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. इसे भोगी पोंगल कहा जाता है.
पोंगल पर्व के दूसरे दिन भगवान् सूर्य की पूजा के लिए पगल ( मिट्टी के बर्तन में नये धान से तैयार चावल, मूंग दाल और गुड से) बनाई जाती है और इसे भगवान् सूर्य को प्रसाद रूप में पगल व गन्ना अर्पण किया जाता है. इसे सूर्य पोंगल कहा जाता है.
पोंगल पर्व के तीसरे दिन गौ -धनों व बैलों की पूजा की जाती है. इस दिन गौ -धनों व बैलों को आकर्षक ढंग से सजा कर पूजा कर विशेष व्यंजन खिलाये जाते हैं. यह किसानों के जीवन में पशुओं के महत्व को दर्शाता है. इसे मट्टू पोगल कहा जाता है.
पोंगल पर्व के चौथे और आखरी दिन इस दिन घर को आम के पलल्व और नारियल के पत्ते से दरवाजे पर तोरण बनाया जाता है साथ ही महिलाएं इस दिन घर के मुख्य द्वारा पर कोलम यानी रंगोली बनाती हैं. लोग एक-दूसरे से मिलते हैं, घूमने जाते हैं, और अपने बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं. यह दिन सामाजिक और पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने का दिन है. आखरी दिन के पोंगल को कानुम पोंगल के नाम से जानते हैं.
पोंगल के अवसर पर पारंपरिक नृत्य और संगीत कार्यक्रम होते हैं, जिनमें भरतनाट्यम, कथकली, और अन्य लोक नृत्यों का प्रदर्शन किया जाता है. कुछ स्थानों पर शिव और गंगा की विशेष पूजा की जाती है. वहीं, ग्रामीण इलाकों में विभिन्न खेल और प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाती हैं, जैसे कि जलीकट्टू (बैल दौड़).
पोंगल सिर्फ एक धार्मिक त्योहार नहीं है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक उत्सव भी है जो तमिल संस्कृति और परंपराओं की गहराई को दर्शाता है. इसका हर पहलू कृषि और परिवार की महत्ता को उजागर करता है.
संकलन: – ज्ञानसागरटाइम्स टीम.
Video Link: – https://youtu.be/Bdmfr5qUpoI



