अँधेरे रास्ते से होते हुए, चंचल, रीटा, सूरज और उमेश उस गुप्त कक्ष में पहुँचे. भीतर नीली रोशनी अब और भी तेज़ और स्थिर थी, जिससे पूरा कक्ष एक अलौकिक आभा में नहाया हुआ था. कक्ष की दीवारों पर प्राचीन चित्रलिपि और नक्काशियाँ बनी हुई थीं, जो किसी अनसुनी कहानी को बयाँ कर रही थीं. यहाँ की हवा में एक अजीब सी शांति थी, जो बाहर के वीरान शहर से बिल्कुल अलग थी.
कक्ष के ठीक बीच में एक शिलालेखों से ढका हुआ चबूतरा था, और उस पर एक चमकता हुआ क्रिस्टल रखा था. जैसे ही वे क्रिस्टल के पास पहुँचे, नीली रोशनी और तेज़ हो गई और एक अचानक से कंपन हुआ. चंचल को फिर वही आवाज़ सुनाई दी, पर इस बार वह ज़्यादा साफ़ थी, मानो क्रिस्टल से ही आ रही हो.
आवाज़ ने कहा, “हमारा ज्ञान तुम्हारे इंतज़ार में था. इस शहर को ‘शांतिपुर’ कहा जाता था, और हम एक ऐसी सभ्यता थे जो प्रकृति की ऊर्जा का उपयोग करना जानती थी. पर एक दिन, एक अजीब बीमारी ने हमें घेर लिया, जो हमारे जीवन को धीरे-धीरे खत्म कर रही थी. यह बीमारी… तुम्हारे चंचल की बीमारी जैसी ही थी.”
चंचल दंग रह गया. उसकी बीमारी सिर्फ उसकी नहीं थी, बल्कि इस पूरे प्राचीन शहर की नियति थी!
क्रिस्टल से निकलती आवाज़ ने आगे बताया कि शांतिपुर के लोगों ने इस बीमारी का इलाज खोजने के लिए वर्षों तक संघर्ष किया था. उन्होंने इस कक्ष का निर्माण किया, जहाँ उन्होंने अपना सारा ज्ञान, अपनी चिकित्सा पद्धतियाँ और अपने इतिहास को संजोकर रखा। यह नीली रोशनी दरअसल एक प्राचीन औषधीय ऊर्जा थी, जो उस क्रिस्टल के माध्यम से काम करती थी. “हमारे पूर्वजों ने इस क्रिस्टल को बनाया था, ताकि जब कभी यह बीमारी फिर से उठे, तो आने वाली पीढ़ियाँ इसका उपयोग कर सकें,” आवाज़ ने कहा. “तुम्हारी दादी और दादा इस ज्ञान के अंतिम संरक्षक थे, पर समय के साथ यह सब धूमिल हो गया.”
दादी कल्पना और दादा प्रवेश की भूमिका अब स्पष्ट हो गई थी. वे अनजाने में ही इस प्राचीन ज्ञान के वाहक थे. चंचल के सपने, उसकी बीमारी, और यह वीरान शहर… सब एक दूसरे से जुड़े हुए थे. यह बीमारी असल में एक दुर्लभ आनुवंशिक स्थिति थी, जो पीढ़ियों से उनके परिवार में चली आ रही थी, और प्राचीन शांतिपुर के लोगों में भी यही बीमारी फैली थी.
आवाज़ ने उन्हें बताया कि क्रिस्टल की नीली रोशनी न केवल बीमारी के लक्षणों को कम कर सकती है, बल्कि यदि सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो यह जेनेटिक स्तर पर बीमारी को ठीक भी कर सकती है.इसके लिए, उन्हें शहर के केंद्र में स्थित एक पुराने मंदिर में क्रिस्टल को स्थापित करना होगा, जहाँ से इसकी ऊर्जा पूरे शहर में फैल सके.
“यह सिर्फ तुम्हारी बीमारी का इलाज नहीं है, चंचल,” रीटा ने कहा, उसकी आँखों में आँसू थे. “यह इस पूरे शहर को फिर से जीवित करने का मौका है.”
सूरज और उमेश ने उत्साह से एक-दूसरे की ओर देखा. वे सिर्फ एक दोस्त की मदद नहीं कर रहे थे, बल्कि एक खोई हुई सभ्यता को पुनर्जीवित करने में मदद कर रहे थे.
अब उनके सामने एक नया लक्ष्य था. उन्हें क्रिस्टल को मंदिर तक ले जाना था, उसे स्थापित करना था, और इस वीरान शहर को फिर से ‘शांतिपुर’ बनाना था। यह सिर्फ एक पहेली का अंत नहीं था, बल्कि एक नई शुरुआत थी.
क्या आप जानना चाहेंगे कि उन्होंने मंदिर तक क्रिस्टल कैसे पहुँचाया और आगे क्या हुआ?
शेष भाग अगले अंक में…,



