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माया नगरी और बप्पा…

सात द्वीपों को जोड़कर बनी यह नगरी सदियों से भारत की आर्थिक, सांस्कृतिक और फिल्मी राजधानी रही है. मुंबई की आत्मा में अगर कोई सबसे गहरा रंग है, तो वह है बप्पा का. भगवान गणेश, जिन्हें प्यार से “बप्पा” भी कहा जाता है. बप्पा, जो विघ्नहर्ता, बुद्धि के देवता और मंगल मूर्ति के रूप में पूजे जाते हैं, का फ़िल्मी दुनिया के साथ एक गहरा और भावनात्मक रिश्ता है. उनका चित्रण केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि वे फ़िल्मों की कहानियों, गीतों, और दृश्यों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो मनोरंजन के साथ-साथ दर्शकों की आस्था को भी छूते हैं.

किसी भी नए काम की शुरुआत बप्पा के आशीर्वाद के बिना अधूरी मानी जाती है। यह मान्यता फ़िल्मी दुनिया में भी पूरी तरह से प्रचलित है. किसी भी फ़िल्म का पहला शॉट लेने से पहले, निर्माता, निर्देशक और पूरी टीम मिलकर बप्पा की पूजा करती है. यह न केवल एक शुभ शगुन है, बल्कि यह इस बात का भी प्रतीक है कि फ़िल्म के निर्माण में कोई बाधा न आए और वह सफल हो. फ़िल्म के पोस्टर से लेकर ट्रेलर तक, अक्सर बप्पा की प्रतिमा या उनका कोई शुभ चिह्न दिखाई देता है, जो दर्शकों को यह संकेत देता है कि यह एक पारिवारिक और सकारात्मक फ़िल्म है.

भारतीय सिनेमा में गणेश जी पर आधारित गीतों की एक लंबी और समृद्ध परंपरा है. ये गीत केवल आरती या भजन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये विभिन्न शैलियों और भावनाओं को दर्शाते हैं. चाहे वह ‘अग्निपथ’ का प्रसिद्ध गीत “देवा श्री गणेशा” हो, जिसमें ऋतिक रोशन पूरी ऊर्जा के साथ नाचते हैं, या ‘डॉन’ का “मौर्या रे” हो, जिसमें शाहरुख खान गणपति उत्सव की धूम मचाते हैं, ये गीत दर्शकों को अपनी धुन पर थिरकने पर मजबूर कर देते हैं. इन गीतों में आस्था, भक्ति, खुशी और ऊर्जा का एक अद्भुत मिश्रण होता है. ये गीत न केवल फ़िल्म की कहानी को आगे बढ़ाते हैं, बल्कि गणपति उत्सव जैसे बड़े त्योहारों को भी जीवंत कर देते हैं.

गणेश चतुर्थी का त्योहार फ़िल्मी कहानियों में अक्सर एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में आता है. कई फ़िल्मों में गणपति विसर्जन का दृश्य कहानी में एक नाटकीयता लाता है, जहाँ नायक और नायिका पहली बार मिलते हैं, या कोई बड़ा रहस्य खुलता है, या फिर कोई महत्वपूर्ण फैसला लिया जाता है. ‘डॉन’, ‘सर्कस’, ‘एबीसीडी’, ‘अग्निपथ’ और हाल ही में ‘एक था टाइगर’ जैसी फ़िल्मों में गणपति उत्सव को खूबसूरती से दर्शाया गया है. यह केवल एक पृष्ठभूमि नहीं है, बल्कि यह कहानी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है, जो पात्रों के जीवन और उनके रिश्तों को प्रभावित करता है.

आधुनिक फ़िल्मों में बप्पा का चित्रण केवल पारंपरिक रूप से नहीं होता, बल्कि उन्हें समकालीन संदर्भों में भी देखा जाता है. ‘ओह माय गॉड’ जैसी फ़िल्मों में, परेश रावल ने भगवान के अस्तित्व और आस्था पर ही सवाल उठाए, लेकिन अंततः भगवान गणेश की शक्ति और महिमा को स्वीकार किया. यह फ़िल्म एक गंभीर विषय पर बनी थी, लेकिन इसने बप्पा को एक नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया, जहाँ वे केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि एक विचार और आस्था का प्रतीक हैं. इसी तरह, कई कॉमेडी फ़िल्मों में बप्पा को मजाकिया अंदाज़ में भी दिखाया गया है, जो दर्शकों को हंसाने के साथ-साथ एक गहरा संदेश भी देते हैं.

फ़िल्मी दुनिया और बप्पा का रिश्ता केवल एक व्यावसायिक संबंध नहीं है, बल्कि यह एक भावनात्मक और सांस्कृतिक बंधन है. फ़िल्मों में बप्पा का चित्रण भारतीय दर्शकों की आस्था और संस्कृति का प्रतिबिंब है. वे न केवल एक धार्मिक प्रतीक हैं, बल्कि वे फ़िल्मों की कहानियों, गीतों और दृश्यों में ऊर्जा, आशा और सकारात्मकता का संचार करते हैं. बप्पा ने फ़िल्मी दुनिया को एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान दी है, और इस माया नगरी में वे हमेशा से ही एक शुभ और मंगल मूर्ति देवता के रूप में पूजे जाते रहेंगे.

आखिर हम कह सकते हैं कि, माया नगरी और बप्पा का संबंध केवल भौगोलिक या धार्मिक नहीं है, बल्कि यह एक गहरी भावनात्मक और सांस्कृतिक धारा है.

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Maya Nagari and Bappa…

This city, built by joining seven islands, has been the economic, cultural and film capital of India for centuries. If there is one deepest colour in the soul of Mumbai, it is that of Bappa. Lord Ganesha, who is also fondly called “Bappa”. Bappa, who is worshipped as Vighnaharta, God of wisdom and Mangalmurti, has a deep and emotional relationship with the film world. His portrayal is not limited to religious rituals only, but he plays an important role in the stories, songs, and scenes of films, which entertain as well as touch the hearts of the audience.

The beginning of any new work is considered incomplete without the blessings of Bappa. This belief is also completely prevalent in the film world. Before taking the first shot of any film, the producer, director, and the entire team together worship Bappa. This is not only an auspicious omen, but it also symbolises that there should be no hindrance in the film’s production, and it should be successful. From the film’s posters to the trailers, Bappa’s idol or some auspicious symbol of his is often seen, which gives the audience a hint that this is a family and positive film.

Indian cinema has a long and rich tradition of songs based on Lord Ganesha. These songs are not limited to just aartis or bhajans, but they reflect a diverse range of styles and emotions. Whether it is the famous song “Deva Shri Ganesha” from ‘Agneepath’, in which Hrithik Roshan dances with full energy, or “Maurya Re” from ‘Don’, in which Shah Rukh Khan makes a splash at the Ganpati festival, these songs force the audience to dance to their tunes. These songs have a wonderful blend of faith, devotion, happiness and energy. These songs not only advance the film’s story but also bring to life big festivals like Ganpati Utsav.

The festival of Ganesh Chaturthi often comes as a turning point in film stories. In many films, the Ganpati immersion scene adds drama to the story, usually marking a pivotal moment when the hero and heroine meet for the first time, a significant secret is revealed, or a crucial decision is made. Films like ‘Don’, ‘Circus’, ‘ABCD’, ‘Agneepath’, and most recently ‘Ek Tha Tiger’ have beautifully depicted the Ganesh Chaturthi festival. It is not just a backdrop, but it becomes an important part of the story, influencing the lives of the characters and their relationships.

In modern films, Bappa is not only portrayed traditionally but also seen in contemporary contexts. In films like ‘Oh My God’, Paresh Rawal questioned the very existence and faith in God, but ultimately accepted the power and glory of Lord Ganesha. The film was made on a serious subject, but it presented Bappa from a new perspective, where he is not just an idol, but a symbol of an idea and faith. Similarly, Bappa has been depicted humorously in many comedy films, which not only make the audience laugh but also convey a deeper message.

The relationship between the film world and Bappa is not just a commercial one, but also an emotional and cultural bond. The portrayal of Bappa in films is a reflection of the faith and culture of the Indian audience. He is not only a religious icon, but he also infuses energy, hope, and positivity into the stories, songs, and scenes of the films. Bappa has given a spiritual and cultural identity to the film world, and he will always be worshipped as an auspicious and auspicious deity in this Maya Nagri.

After all, we can say that the relationship between Maya Nagri and Bappa is not just geographical or religious, but rather a deep emotional and cultural bond.

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