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रंकनीति बनाम रणनीति…

रणनीति की जीत

रमन ने एक और चाल चली. उसने गाँव के कुछ लोगों को नकली हथियार बनाने के लिए कहा. ये हथियार देखने में असली लगते थे, लेकिन वे लकड़ी और मिट्टी से बने थे.

जब ठाकुर सूरज सिंह अपने आदमियों के साथ गाँव पर हमला करने आया, तो उसने देखा कि गाँव के लोग हथियारों के साथ तैयार खड़े हैं. माधव ने ठाकुर को बताया कि गाँव के लोगों को शहर के कुछ शक्तिशाली लोगों का समर्थन मिल गया है और अगर उसने हमला किया तो उसे भारी नुकसान उठाना पड़ेगा.

ठाकुर सूरज सिंह डर गया. उसे लगा कि गाँव के लोग सच में शक्तिशाली हैं और उनसे लड़ना महंगा पड़ सकता है. उसने अपने आदमियों को वापस बुला लिया और गाँव छोड़कर चला गया.

काशीपुर के लोगों ने राहत की सांस ली. उन्होंने रमन की बुद्धिमत्ता और उसकी “रंकनीति” की प्रशंसा की. करण ने भी रमन को गले लगाया और कहा, “तुम सही थे, रमन. शक्ति ही सब कुछ नहीं होती। बुद्धि और सही रणनीति बड़ी से बड़ी ताकत को भी हरा सकती है.”

उस दिन से, गाँव के लोगों ने रमन की “रंकनीति” को याद रखा. उन्होंने सीखा कि सीमित संसाधनों में भी, बुद्धिमत्ता, धैर्य और सही रणनीति से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है. और करण ने भी माना कि सच्ची शक्ति केवल शारीरिक बल में नहीं, बल्कि सही सोच और सही समय पर सही कदम उठाने में है.

शेष भाग अगले अंक में…,

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