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ज्ञान और परिश्रम से ही खुलते हैं अनंत संभावनाओं के द्वार

शुक्रवार को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर केकेएम कॉलेज में अर्थशास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ. गौरी शंकर पासवान की अध्यक्षता में “आर्यभट्ट से गगन यान: प्राचीन ज्ञान के अनंत संभावनाएं” विषय पर एक परिचर्चा आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता डॉ.(प्रो.) गौरी शंकर पासवान ने की.

अपने अध्यक्षीय प्रबोधन में प्रो. गौरी शंकर पासवान ने कहा कि भारत की अंतरिक्ष यात्रा आर्यभट्ट की प्राचीन ज्ञान से शुरू हुई थी, और आज वह यात्रा गगन यान की तैयारी तक पहुंच गई है. कहते हैं कि प्राचीन ज्ञान और परिश्रम से ही अनंत संभावनाओं के द्वार खुलते हैं. चंद्रयान-3 की सफलता भारत की वैश्विक पहचान है। विज्ञान और तकनीक विकास की असली उड़ान है. अंतरिक्ष विज्ञान  आत्मनिर्भरता का नया आयाम है। चांद-सितारों की दूरी अब भारत के कदमों में नतमस्तक है. छोटे बजट, बड़े सपने देश की पहचान बन चुकी है. अंतरिक्ष भारत की प्रगति का दर्पण है। गगन यान का उद्देश्य मानव को अंतरिक्ष में भेजना है, जो भारत का पहला मानव मिशन होगा. चंद्रयान-3 की अभूतपूर्व सफलता ने यह सिद्ध कर दिया कि भारत सीमित संसाधनों और कम बजट के बावजूद असंभव को संभव बना सकता है.

उन्होंने कहा कि यदि भारत प्राचीन ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़े, तो कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं है. देश के छात्र-छात्राओं को संकल्प लेना होगा कि वे भी आर्यभट्ट की तरह ज्ञानार्जन और इसरो के वैज्ञानिकों की भांति परिश्रम में आगे बढ़ेंगे. गणितज्ञ व खगोल शास्त्री आर्यभट्ट ने शून्य और ग्रह नक्षत्रों की गति का अद्भुत ज्ञान दुनिया को दिया है. आज वही परंपरा इसरो के गगन यान मिशन के रूप में आगे बढ़ रही है. जहां भारतीय वैज्ञानिक मानव को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी में जुट गए हैं. गगन यान भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम का भावी मिशन है। भारत का भविष्य उसके प्राचीन ज्ञान और वर्तमान नवाचार के संगम से बनेगा. भारत 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा पर उतरने वाला विश्व का चौथा और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट और सफल लैंडिंग करने वाला प्रथम देश बन गया है. इसरो अब वर्ष 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय नागरिक के कदम रखने की कल्पना को स्वीकार करने की सोच विकसित कर ली है। वहीं हमारा देश आगामी वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की तैयारी में जुट चुका है.

 राजनीतिक विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. देवेंद्र कुमार गोयल ने कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान के साथ काम क्षेत्र में भारत अग्रणी है. वह निरंतर प्रगति कर रहा है. भारत अपने प्रथम प्रयास में ही मंगल पर पहुंचने वाला प्रथम देश बन चुका है. इसरो ने कई मामलों में साबित किया है कि आज भारत दुनिया की किसी विकसित देशों से ज्यादा पीछे नहीं है. भारत द्वारा एक साथ 104 उपग्रहों का प्रक्षेपण इस बात का उदाहरण हैं। मौजूदा समय में वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग का आकार 350 बिलियन  डॉलर है, जबकि भारत का अंतरिक्ष उद्योग 7 बिलियन डॉलर है.

 प्रो. सरदार राय एवं डॉ अमोद प्रबोधी ने कहा कि प्राचीन ज्ञान ने हमें दिशा दी है, तो आधुनिक तकनीक ने गति दी है. आर्यभट्ट की गणना से लेकर चंद्रयान- 3 की सफलता तक की यात्रा भारत की वैज्ञानिक दृढ़ता का प्रमाण. राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस युवाओं को विज्ञान और नवाचार की राह पर प्रेरित करता है.

 मौके पर डॉ. शैलेश कुमार झा, प्रो. कैलाश पंडित, कार्यालय सहायक रवीश कुमार सिंह, सुशील कुमार, कृष्णागिरी ने कहा कि भारत द्वारा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाया जाना केंद्र सरकार की सराहनीय कदम है.

प्रभाकर कुमार (जमुई).

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