story

रंकनीति बनाम रणनीति…

गाँव पर संकट

कुछ महीने बाद, काशीपुर पर एक बड़ा संकट आ गया. पास के शहर के एक शक्तिशाली जमींदार, ठाकुर सूरज सिंह, ने गाँव की उपजाऊ जमीन पर अपना दावा ठोक दिया. उसने अपने आदमियों को भेजकर किसानों को धमकाना शुरू कर दिया और उनकी फसलें लूटने लगा.

गाँव के लोग भयभीत थे. करण के पिता ने ठाकुर सूरज सिंह से बात करने की कोशिश की, लेकिन उसने उनकी एक न सुनी. गाँव में निराशा का माहौल था.

एक शाम, गाँव के चौपाल पर पंचायत बैठी. लोग अपनी-अपनी राय दे रहे थे, लेकिन कोई ठोस योजना नहीं बन पा रही थी. करण गुस्से में बोला, “हमें ठाकुर के आदमियों से लड़ना होगा! हमें अपनी जमीन बचाने के लिए अपनी ताकत दिखानी होगी.”

रमन शांत रहा. उसने सबकी बातें सुनीं और फिर धीरे से कहा, “हम ठाकुर की ताकत से सीधे मुकाबला नहीं कर सकते. उसके पास हमसे ज्यादा आदमी और हथियार हैं. हमें कोई और तरीका सोचना होगा.”

करण ने उपहास करते हुए कहा, “और तुम्हारा ‘कोई और तरीका’ क्या है, रमन? क्या तुम अपनी ‘रंकनीति’ से ठाकुर को हराओगे?”

रमन ने उसकी बातों पर ध्यान नहीं दिया. उसने कहा, “हमें ठाकुर की कमजोरी ढूंढनी होगी. हर शक्तिशाली व्यक्ति में कोई न कोई कमजोरी जरूर होती है.”

शेष भाग अगले अंक में…,

:

Related Articles

Back to top button