चमत्कारिक वस्तुएं… - Gyan Sagar Times
Dhram Sansar

चमत्कारिक वस्तुएं…

धरती पर मौजूद समुद्र का हिस्सा 70 से 75 प्रतिशत का है जिसमें से करीब 25 से 30 प्रतिशत धरती का अधिकतर हिस्सा नदियों और जंगलों का है. एक ओर जहां नदियों को लगभग खत्म करने की पूरी तैयारी कर ली गई है वहीं, अब समुद्री संपदा को भी पिछले कई वर्षों से खतरनाक तरीके से दोहन किया जा रहा है, जिसके चलते कई दुर्लभ जीव-जंतुओं के अस्तित्व खत्म हो रहें हैं.

धरती पर प्रमुख रूप से पांच महासागरों के अलावा कैस्पियन सागर, मृत सागर, लाल सागर, उत्तर सागर, लापतेव सागर और भूमध्य सागर के साथ-साथ दो प्रमुख खाड़ियां भी हैं- बंगाल की खाड़ी और अरब की खाड़ी. नदियों में नील, अमेजन, सिन्धु, ब्रह्मपुत्र, वोल्गा, टेम्स, गंगा, हडसन, मर्रे डार्लिंग, मिसीसिपी, मैकेंजी, यमुना, नर्मदा, गोदावरी, कांगो, यांग्त्सी, मेकोग, लेना, आमूर, ह्वांगहो आदि नदियां हैं. इन नदियों में अथाह जल है और इन जलराशियों में लाखों तरह के जीव-जंतु और कई प्रजातियां भी निवास करती हैं. इन्हीं जलराशियों में हजारों ऐसी वस्तुएं हैं, जो कहीं चिकित्सा की दृष्टि से सबसे उत्तम हैं तो कहीं आयु बढ़ाने के लिए होती है लेकिन, इस सबके अलावा कुछ ऐसी दैवीय वस्तुएं भी हैं जिनसे  आपको घर या आस-पास में होने से यह चमत्कारिक रूप से आपको आर्थिक और शारीरिक लाभ देती है.

आइए जानते हैं कुछ ऐसी ही चमत्कारी वस्तुओं के बारे में…

समुद्री नमक:- बाजार में सेंधा नमक तो मिलता ही है, लेकिन आसानी से समुद्री नमक भी मिल जाता है. इस समुद्री नमक के कई तरह के उपयोग किए जाते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पहला उपयोग यह है कि घर में इसका पोंछा लगाने से दरिद्रता दूर होती है. एक कांच की कटोरी में समुद्री नमक भरें और इस कटोरी को बाथरूम में रखने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. समुद्री नमक में अद्भुत शक्तियां होती हैं, जो सभी प्रकार के नकारात्मक प्रभावों को नष्ट कर देती हैं. इसके अलावा घर में आई दरिद्रता का भी नाश होता है साथ ही महालक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती है.

गोमती चक्र:- गोमती चक्र नदी से मिलने वाला एक दुर्लभ और चमत्कारी वस्तु है जो प्राय: गोमती नदी में पाया जाता है. गोमती चक्र को ‘गोमती चक्र ऐसी वस्तु है जो प्राकृतिक रूप से बना हुआ चक्र होता है  नदीयों के किनारों पर प्राय: लोग सीप से मिलते-जुलते सामान को खोजते रहते हैं, वहीं गोमती चक्र भी मिल जाते हैं. इनकी पहचान बहुत ही आसन है अगर, पलटकर देखा जाए तो हिन्दी संख्या 07 लिखी मिलती है. इस चक्र के एक तरफ उठी हुई सतह होती है और दूसरी तरफ कुछ चक्र होते हैं. इन चक्रों को लक्ष्मीजी का प्रतीक माना जाता है साथ ही यह बच्चों की नजर उतारने और घर में समृद्धि बढ़ाने के भी  काम में आता है.

आमतौर पर मकान या भवन का वास्तुदोष निवारण के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है. 04  गोमती चक्र को निश्चित मुहूर्त में सिन्दूर के साथ लाल कपड़े में बांधकर मकान के मुख्य दरवाजे के ऊपर अंदर की तरफ लटका देने से किसी भी प्रकार का वास्तुदोष दूर करने में प्रयोग किया जाता है.

कौड़ियां:- पीली कौड़ी को देवी लक्ष्मी का प्रतीक भी माना जाता है. सफेद कौड़ियों को केसर या हल्दी के घोल में भिगोकर उसे लाल कपड़े में बांधकर घर में स्थित तिजोरी में रखें साथ ही दो कौड़ियों को खुद की जेब में भी हमेशा रखने से धनलाभ होता है.

शंख:- शंख समुद्र मंथन के समय प्राप्त 14 अनमोल रत्नों में से एक है. लक्ष्मी के साथ उत्पन्न होने के कारण इन्हें  ‘लक्ष्मी भ्राता’ भी कहा जाता है. यही कारण है कि जिस घर में शंख होता है, वहां लक्ष्मी  वास होता है. धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार, घर में शंख को जरूर रखना चाहिए. शंख के और भी कई उपयोग और महत्व होते हैं. शंख बजाने से सेहत में लाभ मिलता है वहीं घर के आस-पास का वातावरण भी शुद्ध होता है. इसके घर में रखे रहने से आयुष्य प्राप्ति, लक्ष्मी प्राप्ति, पुत्र प्राप्ति, पितृदोष शांति, विवाह आदि की रुकावट भी दूर होती है. इसके अलावा शंख कई चमत्कारिक लाभ के लिए भी जाना जाता है. बताते चलें कि, उच्च श्रेणी के श्रेष्ठ शंख कैलाश मानसरोवर, मालद्वीप, लक्षद्वीप, कोरामंडल द्वीप समूह, श्रीलंका और भारत में पाए जाते हैं.

शंख तीन प्रकार के होते हैं—

दक्षिणावृत्ति शंख, मध्यावृत्ति शंख तथा वामावृत्ति शंख. इनके अलावा लक्ष्मी शंख, गोमुखी शंख, कामधेनु शंख, विष्णु शंख, देव शंख, चक्र शंख, पौंड्र शंख, सुघोष शंख, गरूड़ शंख, मणिपुष्पक शंख, राक्षस शंख, शनि शंख, राहु शंख, केतु शंख, शेषनाग शंख, कच्छप शंख.लेकिन, पाञ्चजन्य शंख मिलना मुश्किल है. ज्ञात है कि, समुद्र मंथन के दौरान इस शंख की उत्पत्ति हुई थी. 14 रत्नों में एक रत्न पाञ्चजन्य शंख को माना गया है. शंख को ‍विजय, समृद्धि, सुख, शांति, यश, कीर्ति और लक्ष्मी का प्रतीक भी माना जाता है. बताते चलें कि, शंख को नाद का प्रतीक माना जाता है. शंख की ध्वनि शुभ मानी गई है. बर्लिन यूनिवर्सिटी ने शंख ध्वनि पर  अनुसंधान करके यह सिद्ध किया है कि, इसकी ध्वनि से कीटाणु नष्ट हो जाते हैं.

शिवलिंग और शालिग्राम:- शिवलिंग को  भगवान शंकर का प्रतीक माना गया है वहीं, शालिग्राम को  भगवान विष्णु का. शिवलिंग की तरह शालिग्राम भी बहुत ही दुर्लभ होता है. अधिकांशत: शालिग्राम नेपाल के मुक्तिनाथ या काली गंडकी नदी के तट पर ही पाया जाता है. काले और भूरे शालिग्राम के अलावा सफेद, नीले और ज्योतियुक्त शालिग्राम भी पाया जाता है जो अत्यंत ही दुर्लभ होता है. पूर्ण शालिग्राम में भगवान विष्णु के चक्र की आकृति अंकित होती है. शालिग्राम भी कई प्रकार के होते हैं. किसी भी तरह के शालिग्राम को घर पर रखने से घर की ऊर्जा सकारात्मक रहती है और जीवन में शांति बनी रहती है.

मणि या नग:-  समुद्र मंथन के दौरान कौस्तुभ मणि निकली थी. ज्ञात है कि, नग या मणि में विशेष  फर्क होता है चुकिं, दोनों ही समुद्र के ही रत्न हैं. 09 प्रकार की मणियां होती हैं जैसे- घृत मणि, तैल मणि, भीष्मक मणि, उपलक मणि, स्फटिक मणि, पारस मणि, उलूक मणि, लाजावर्त मणि और मासर मणि. बताते चलें कि, मणि एक प्रकार का चमकता हुआ पत्थर होता है, जिसे हीरे की श्रेणी में रखा जाता है. ये सभी मणियां समुद्र या नदियों के अलावा खदानों से निकाली जाती है और चमत्कारिक रूप से लाभ प्रदान करती हैं.

मोती और मूंगा:- समुद्र में पाए जाने वाला एक महत्वपूर्ण रत्न मोती भी होता है जो कई प्रकार के होते हैं. असली और प्रभावयुक्त मोती पहनने से जीवन में शांति स्थापित होती है. मूँगा, जिसे  कोरल  और मिरजान भी कहते हैं, एक प्रकार का नन्हा समुद्री जीव होता है जो लाखों-करोड़ों की संख्या में एक समूह में रहते हैं. उस समूह की सख़्ती और स्पर्श लगभग पत्थर जैसा होता है. मूँगा गरम समुद्रों में ही उगता है और अलग-अलग रंगों का होता है. मूंगा मंगल का रत्न है और मंगल साहस, बल, ऊर्जा का कारक होता है. ज्योतिषाचर्यों द्वारा मंगल राशि के लोगों को मूंगा पहनने की सलाह दी जाती है जबकि सामान्यत: जब चंद्रमा कमजोर होती है तो मोती पहनने की सलाह दी जाती है.

मोती:- किसी भी प्रकार से धन प्राप्ति में आ रही रुकावट को दूर करने के लिए मोती को धारण करना  उत्तम उपाय माना गया है. ज्ञात है कि, इसके पहनने से मन में सकारात्मक विचार उत्पन्न होते हैं. सही स्वरूप का मोती धारण करने से ही अपेक्षित रूप से लाभ प्राप्त होता हैं. गोल आकार के मोती को  उत्तम माना जाता है. मोती आकार में लंबा तथा गोल हो एवं उसके मध्य भाग में आकाश के रंग जैसा वलयाकार, अर्द्ध चंद्राकार चिह्न हो तो, ऐसा मोती धारण करने से धारणकर्ता को उत्तम पुत्र की प्राप्ति होती है. यदि मोती के आकार में एक ओर अणीदार हो तथा दूसरी ओर से चपटा हो तथा उसका रंग सहज आकाश के रंग की तरह हो तो, ऐसा मोती धारण करने से धारणकर्ता के धन में वृद्धि होती है. गोल आकार के पीले रंग की मोती हो तो, ऐसी मोती धारण करने से धारणकर्ता विद्वान होता है.

इसके अलावा समुद्र के किनारे ऐसे हजारों तरह के रंग-बिरंगे पत्थर मिल जाएंगे, जो देखने में अद्भुत और बहुत ही खूबसूरत होते हैं. समुद्र में तैरने वाले पत्थर भी होते हैं जो नाविक और समुद्र में ही रहने वालों के लिए ये पत्थर बहुत काम में आते हैं.

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