प्रजातंत्र का मालिक कौन? - Gyan Sagar Times
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प्रजातंत्र का मालिक कौन?

भारत मे बिहार से अन्य राज्यों में पंचायत से लेकर प्रधानमंत्री का चयन  करने बाला मालिक जनता होता हैं. क्या बजह होती हैं की पीएम, सीएम, मुखिया बनाने बाला जनता मतदान करने वाला 5 साल के लिए कूड़ेदान हो जाता हैं जनता ही मालिक होती हैं और चुनाव के वक़्त जनता यानी वोटर ही जनार्दन भी लेकिन वह सम्पन्न होती हर भिक्षुक की भूमिका में आ जाती हैं. वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव जीतकर नरेन्द्र मोदी ने खुद को प्रधानमंत्री से ज़्यादा प्रधान सेवक के रूप में खुद को प्रचारित किया है वोटरों को इस बात का एहसास हो सके कि वही असली मालिक है और हमे 05 साल संविदा पर नियुक्त किया है. आजादी के100वी वर्षगांठ की और भारत कदम बढ़ता जा रहा है. हर घर को छत मिले उस पर समूचित काम नही कर सके. हर गांव हर घर बिजली पहुंचे, हर गांव का सम्पर्क एन एच और एस एच् से जुड़े. हर घर एलपीजी पहुचे, हर हाथ को रोजगार मिले, बेरोजगार प्रोत्साहन राशि मिली, शिक्षा व्यवस्था सुदढ़ हो गयी. स्वास्थ्य व्यवस्था जीवन दान देने लगी. धर्म एवं संस्कृति पर प्रहार बंद हो गया, धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र की सुंदरता बड़ी. ऐसे सभी मसलो पर राज्य के सीएम एवं देश के पीएम ने काम तो किया पर वास्तिवकता से सभी परिचित हैं लेकिन यह पहली दफा होगा जब किसी देश का प्रधानमंत्री ने खुद प्रधान सेवक के रूप में लोगों के बीच खुद को रखा. भारत देश के असली मालिक की बात 05 साल के बहाल राजनीतिक सेवक तो स्वीकार कर भी लेते है और नखडा करने को मालिक पद से बाहर का रास्ता भी दिखा देती हैं. 60 साल के लिए स्थायी रूप से बहाल सरकारी सेवक का आतंक बढ़ता ही जा रहा है तथा यह मालिक और सेवक को भी आँख तरेर कर नौकर तंत्र का देश का प्रभाव दिखाती हैं. कभी कभार भ्रष्टाचार के कारण यह भी सेवामुक्त होते है पर अत्याचार करने के आरोप में यह सिर्फ जांच कमिटी से बच जाते है. पंचायत, नगर पंचायत / नगर परिषद, प्रखंड, जिला परिषद, विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा-राज्यसभा में सेवक के रुप मे 05 वषों के लिए नियुक्त सेवक काम करे या नही पर सम्मान में कोई ठेस नही पहुचाता क्योकि इन्हें पता है कि 05 साल बाद इनके आशिर्वाद के बाद ही कुर्सी मिलेगी अन्यथा जमानत भी जप्त हो जाएगी. किसी मंत्रालय या विभाग में विराजमान स्थायी सरकारी के फाइल महीनों पड़ी जाती हैं जिसका परिणाम आज दिख रहा हैं की सरकार के प्रधान सेवक को शौचालय बनवाने के लिए इतना प्रचार एवं दवाब की राजनीति कर रहे है. जनता मालिक है इसके लिए प्रधान सेवक या किसी राज्य को राज्य सेवक क्या कर रहा है? आजाद भारत मे वर्ष 1974 में आंदोलन करने वाले को जयप्रकाश पेंशन योजना है, प्रति 05 वर्ष के बाद बेहतरीन सरकार वाले मलिक जनता (वोटर) को सही मुआवजा कब मिलेगा? जनता यानी (वोटर) मालिक आज भी सेवक सरकार से अपने अधिकार को लेने में असफल है और जिस दिन वोटर अपने अधिकार के सही मायने समझ जाएगा कि कौन सा सेवक ईमानदारी एवं वफादारी के साथ कार्य करके देश उसके मालिकाना को उचित मुआवजा देगा अन्यथा सेवक का जमानत रद्द करने का अधिकार करने समय है. असली मालिक यानी (वोटर) जागरूक होती जा रही है और उसको अपने अधिकार एवं नियम-कानून को समझ भी लिया है तो सेवक को उसकी चौकीदारी अब करनी होगी.

 

प्रभाकर कुमार मिश्रा(जमुई).

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