मौली या कलावा का महत्व क्या है…. - Gyan Sagar Times
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मौली या कलावा का महत्व क्या है….

हिन्दू संस्कृति के किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या यज्ञ में मौली बाँधने की परम्परा है आखिर मौली क्यों बांधा जाता है. मौली का तात्पर्य सिर से होता है चुकिं मौली को हाथ में बाँधने के कारण इसे कलावा भी कहते हैं. इसका वैदिक उपनाम मणिबंध भी है. पुरानों के अनुसार भगवान शिव का एक नाम चंद्रमौली भी है चुकिं पुरानों में वर्णन मिलता है कि भगवान शंकर अपने सिर पर चन्द्रमा को धारण करते हैं इसीलिए उन्हें चंद्रमौली भी कहा जाता है.

मौली बांधना वैदिक परम्परा का हिस्सा है. चुकि यज्ञ क्या धार्मिक अनुष्ठान के दौरान इसे बांधे जाने की परम्परा तो युगों से चली आ रही है. बताते चलें कि, इसका प्रयोग संकल्प सूत्र के साथ-साथ रक्षा सूत्र में भी प्रयोग किया जाता है. पुरानों के अनुसार, असुरों के राजा बलि की अमरता के लिए भगवान वामन ने उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बाँधा था. वहीं दूसरी तरफ यह भी माना जाता है कि, देवी लक्ष्मी ने राजा बलि के हाथों में अपने पति की रक्षा के लिए यह बंधन बांधा था. देखा जाय तो मौली या कलावा एक प्रकार का रक्षा सूत्र होता है.

मौली कच्चे धागे से बनाई जाती है जिसमें प्राय: तीन रंग (लाल, पीला व हरा) होते हैं. इसे त्रिदेव के नाम से जाना जाता है. कभी-कभी यह पांच धागों की भी बनाई जाती है जिसमें लाल, पीला, हरा, नीला और सफेद रंगों का प्रयोग होता है इसे पंचदेव के नाम से जानते हैं. मौली का प्रयोग अक्सर हाथों की कलाइयों, गले या कमर में की जाती है. इसके अलावा देवी-देवताओं के स्थानों पर, किसी नई वस्तु या जानवरों को बांधा जाता है.

मंत्र:-

    ।। येन बद्धों बली राजा दानवेन्द्रों महाबल: त्रेन त्वामप्रतिबन्धने रक्षे मा चल मा चल ।। 

शास्त्रों के अनुसार पुरुषों एवं अविवाहित कन्याओं को दाएं हाथ में कलावा बांधा जाता है जबकि, विवाहित स्त्रियों को बाएं हाथ में बाँधने का नियम है. कलावा बंधवाते समय कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक होता है जैसे जिस हाथ में कलावा बांधा जा रहा हो उस हाथ की मुट्ठी बंधी होनी चाहिए साथ ही दूसरा हाथ सिर पर होना चाहिए. मौली कहीं भी बांधें परन्तु एक बात का हमेशा ध्यान रखे कि, इस रक्षा सूत्र को बांधते समय इसे तीन बार ही लपेटना चाहिए और बाँधने के समय वैदिक मन्त्रों का प्रयोग जरुर करना चाहिए. पर्व त्योहारों के अलावा किसी अन्य दिन अगर मौली या कलावा बंधवाना हो तो मंगलवार या शनिवार के दिन का प्रयोग करना शुभ माना जाता है. उतारी हुई मौली या कलावा को पीपल के पेड़ के नीचे या बहते हुए जल में डाल देना चाहिए.

मौली या कलावा बंधने के तीन कारण होते है…

  1. आध्यात्मिक, 2. चिकित्सीय एवं 3. मनोवैज्ञानिक.

किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत के समय या नई वस्तु खरीदने पर मौली बाँधने की परम्परा चली आ रही है इसका अर्थ यह है कि, मौली हमारे जीवन में शुभता प्रदान करें. चुकिं, मौली या कलावा को मणिबन्ध के उपर बांधते हैं. बताते चलें कि, हाथ के मूल में तीन रेखाएं होती है जिसे मणिबंध कहा जाता है. यह किसी व्यक्ति के भाग्य व जीवनरेखा का उद्गम स्थल भी माना जाता है. इन तीन रेखाओं में दैहिक, दैविक और भौतिक जैसे त्रिविध तापों को देने व मुक्त करने की शक्ति होती है. इन मणिबंधों को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के नाम से भी जानते है या यूँ कहें कि, दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती का भी वास इन मणिबंधों पर ही होता है.

जब भी हमलोग कलावा या मौली को कलाई पर रक्षा सूत्र पढ़ते हुए बंधवाते हैं तो ये तीन धागों का सूत्र त्रिदेवियों को समर्पित हो जाता है . इस रक्षा सूत्र को संकल्प पूर्वक बाँधने से व्यक्ति पर मारण, मोहन, विद्वेष्ण, उच्चाटन, भुत-प्रेत और जादू टोन का असर नहीं होता है.  मौली बाँधने का आध्यात्मिक पक्ष यह है कि, मौली बाँधने से त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) तथा त्रिदेवियाँ (दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती) की कृपा प्राप्त होती है. ज्ञात है कि, ब्रह्मा की कृपा से कीर्ति, विष्णु कि कृपा से रक्षा और महेश की कृपा से दुर्गुणों का नाश होता है ठीक उसी प्रकार लक्षी से धन, दुर्गा से शक्ति और सरस्वती की कृपा से बुद्धि प्राप्त होती है.

मौली या कलावा किसी भी देवी-देवता के नाम पर बाँधी जाती है जिससे संकटों या यूँ कहें कि विपत्तियों से मानव की रक्षा होती है. इसमें संकल्प निहित होता है. मौली बांधकर किये गये संकल्प का उल्लघन करना संकट में डालने वाला सिद्ध हो सकता है. मौली बाँधने वाले व्यक्तियों को उसकी पवित्रता पर विशेष ध्यान देना चाहिए. अक्सर छोटे बच्चों के कमर पर मौली बाँधी जाती है जिससे बच्चों को पेट में किसी प्रकार का रोग नही होता है.

इसके चिकित्सीय पक्ष भी है. प्राचीनकाल से ही मानव अपने कलाइयों, कमर, पैर या गले में मौली बांधते हैं. इसके बांधने से त्रिदोष या यूँ कहें कि, वात, पित्त और कफ का संतुलन बना रहता है साथ ही ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, डायबटीज और लकवा जैसे रोगों से भी बचाब होता है.

हाथ में बांधने से मानव स्वस्थ रहता है और उसकी ऊर्जा का क्षय नहीं होता है. शरीर विज्ञान के अनुसार शरीर के कई प्रमुख अंगों तक पहुंचने वाली नसें कलाइयों से होकर गुजरती है अत: कलाइयों पर कलावा  बाँधने से इन नसों की क्रिया नियंत्रित रहती है.

मौली या कलावा बाँधने वके मनोवैज्ञानिक लाभ भी मिलते है. मौली या कलावा बाँधने से मन पवित्र और शक्तिशाली बंधन होने का अहसास होता रहता है और मन में शांति और पवित्रता बनी रहती है. मानव के मन मस्तिष्क में बुरे विचार नहीं आते है और वह गलत रास्तों पर भी नहीं भटकता है.

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