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गर्मी से बचने के उपाय…

भारत की चार प्रमुख ऋतुओं में एक ग्रीष्म ऋतु भी है. भारत में सामान्यत: 15 मार्च से 15 जून तक ग्रीष्म ऋतु मानी जाती है. इस समय सूर्य भूमध्यरेखा से कर्क रेखा की और बढ़ता है जिससे सम्पूर्ण देश के तापमान में बढोत्तरी होने लगती है. जैसे-जैसे दिन बढने लगता है, वैसे-वैसे लोग गर्मी से बचने के उपाय भी  करने लगते हैं,लेकिन गर्मी से छुटकारा पाना मुश्किल हो जाता है. लेकिन क्या आप जानते है कि आयुर्वेद के जरिए गर्मी की तपिश से निजात पा सकते हैं. आयुर्वेदाचार्य के अनुसार गर्मी से निजात पाने के लिए प्राकृतिक उपायों से बढ़कर कुछ भी नहीं है.

  • आयुर्वेद पद्धति में गर्मी को दूर करने के लिए चंदन का इस्तेमाल किया जाता है. इस विधि में चंदन का लेप पूरे शरीर में लगाकर रखा जाता है, जिससे पूरे शरीर को बाहरी रूप से ठंडक मिलती हैं.
  • आयुर्वेद में सूर्योदय स्नान का बहुत अधिक महत्व दिया गया है. गर्मी से निजात पाने के लिए सूर्योदय स्नान में खस, अंगूर और चंदन का काढ़ा बनाकर स्नान करना चाहिए.
  • गर्मियों में होने वाले सिर दर्द और आंखों की जलन से बचाने के लिए सबसे बढि़या उपाय है. इस विधि में ब्राह्मी और तिल के तेल को नाक में डालकर उपचार किया जाता है. इसके प्रयोग से जुकाम, लू, खांसी इत्यादि से आराम मिलता है.
  • पंचकर्म की विधियों में एक विधि है…  ” शिरोधारा विधि “ के प्रयोग से बढ़ती गर्मी की तपिश से निजात पाई जा सकती है. इस विधि में तेल की जगह दूध व मट्ठे का उपयोग किया जाता है. इसके अलावा खस-खस, चंदन, कमलनाल और कमलगट्टा के काढ़े का भी प्रयोग भी किया जाता है. आयुर्वेद की इस विधि के प्रयोग करने से शरीर को ठंडक मिलने के साथ-साथ मानसिक शांति भी मिलती हैं.

आयुर्वेदाचार्य के अनुसार गर्मी से निजात पाने के आप शरीर पर मेहंदी, मुल्तानी मिट्टी इत्यादि का लेप भी लगा सकते हैं.

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