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भोजन के प्रकार…

भीष्म पितामह ने अर्जुन को 4 प्रकार से भोजन न करने के लिए बताया था. पहला भोजन जिस भोजन की थाली को कोई लांघ कर गया हो वह भोजन की थाली नाले में पड़े कीचड़ के समान होती है. दूसरा भोजन जिस भोजन की थाली में ठोकर लग गई,पाव लग गया वह भोजन की थाली भिष्टा के समान होता है. तीसरे प्रकार का भोजन जिस भोजन की थाली में बाल पड़ा हो, केश पड़ा हो वह दरिद्रता के समान होता है. चौथे नंबर का भोजन अगर पति और पत्नी एक ही थाली में भोजन कर रहे हो तो वह मदिरा के तुल्य होता है और सुनो अर्जुन, अगर पत्नी, पति के भोजन करने के बाद थाली में भोजन करती है उसी थाली में भोजन करती है या पति का बचा हुआ खाती है तो उसे चारों धाम के पुण्य का फल प्राप्त होता है चारों धाम के प्रसाद के तुल्य वह भोजन हो जाता है.

और सुनो अर्जुन बेटी अगर कुमारी हो और अपने पिता के साथ भोजन करती है एक ही थाली में तो उस पिता की कभी अकाल मृत्यु नहीं होती क्योंकि, बेटी पिता की अकाल मृत्यु को हर लेती है ! इसीलिए बेटी जब तक कुमारी रहे तो अपने पिता के साथ बैठकर भोजन करें ! क्योंकि वह अपने पिता की अकाल मृत्यु को हर लेती हैं.

संस्कार दिये बिना सुविधायें देना, पतन का कारण है सुविधाएं अगर आप ने बच्चों को नहीं दिए तो हो सकता है वह थोड़ी देर के लिए रोए पर संस्कार नहीं दिए तो वे जीवन भर रोएंगे.

प्रभाकर कुमार

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Type of food…

Bhishma Pitamah had told Arjuna not to eat food in 4 ways. First, the food plate whose plate has been crossed by someone is like mud lying in the drain. Second, the plate of food in which the food was stumbled, the loaf was found, that food plate is like Bhishta. The third type of food which has hair lying on its plate is like poverty. The fourth food, if husband and wife are eating on the same plate, then it is equal to alcohol listen, Arjun, if the wife eats on the plate after the husband has eaten, she eats on the same plate or the husband’s. If he eats the leftovers, he gets the fruits of the merits of the four dharma, and that food becomes equal to the prasad of the four dhams.

And listen, Arjun, if the daughter is a virgin and eats with her father on the same plate, then that father never dies prematurely because the daughter takes away the premature death of the father! That’s why as long as the daughter remains a virgin, she should sit and eat with her father. Because she takes away the premature death of her father.

Giving facilities without giving rituals is the reason for the downfall. If you do not give facilities to the children, then they may cry for a while but if they do not give rituals then they will cry for their whole life.

Prabhakar Kumar.

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