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षट्तिला एकादशी-2023

सत्संग के दौरान एक भक्त ने महाराज जी पूछा कि, महाराजजी माघ महीने के कृष्ण पक्ष की जो एकादशी होती है, सुना है कि, इस दिन तिल का दान करना चाहिए.

वालव्याससुमनजीमहाराज कहते है कि. माघ का महीना पवित्र और पावन होता है और इस महीने के व्रत बड़े ही पुण्यदायी होते हैं. महाराजजी कहते हैं कि, एक समय की बात है दाल्भ्य ऋषि ने पुलस्त्य ऋषि से पूछा कि, महाराजजी, इस पृथ्वी पर रहने वाले प्राणी पराये धन की चोरी, दूसरों को देखकर इर्ष्या करना और अनेक प्रकार के व्यसनों का उपभोग करते हैं फिर भी उन्हें नरक प्राप्त नहीं होता है. महाराजजी इसका क्या कारण है आखिर कौन सा दान-पुण्य करते हैं कि उनके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं. हे प्रभु ऐसा कौन सा गुप्त तत्व है जिसका भेद ब्रह्मा, विष्णु, शिव-शंकर और अन्य देवता भी नहीं जानते हैं.

पुलस्त्यजी महाराज कहते है कि, माघ महीने में मनुष्यों को पवित्रता और शुद्धता से रहना चाहिए साथ ही इन्द्रियों को वश में कर काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार और इर्ष्या को त्यागकर भगवान वैकुंठपति का ध्यान लगाना चाहिए और उनके मन्त्रों का जप करना चाहिए. वालव्याससुमनजीमहाराज कहते है कि इस व्रत में तिल का विशेष महत्व होता है. कहा जाता है कि तिल को जितने रूपों में दान किया जाता है उतने ही हजार वर्षों तक स्वर्ग में स्थान प्राप्त होता है. वालव्याससुमनजीमहाराज कहते है कि शास्त्रों के अनुसार तिल के छ: प्रकार के दान बताये गये हैं. तिल मिश्रित स्नान, तिल का उबटन, तिल का तिलक, तिल मिश्रित जल, तिल का हवन और तिल का भोजन. महाराजजी कहते हैं कि, इन चीजों का स्वयं भी प्रयोग करें और कुल पुरोहित या ब्राह्मण को दान भी दें.

व्रत विधि:-

एकादशी के पूर्व दशमी को रात्री में एक बार ही भोजन करना आवाश्यक है उसके बाद दुसरे दिन सुबह उठ कर स्नान आदि कार्यो से निवृत होने के बाद व्रत का संकल्प भगवान विष्णु के सामने संकल्प लेना चाहिए. उसके बाद भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र की स्थापना करें. भगवान विष्णु की पूजा के लिए धूप, दीप, फल और पंचामृ्त से पूजन करना चाहिए. भगवान विष्णु के स्वरूप का स्मरण करते हुए ध्यान लगायें, उसके बाद विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करके, कथा पढ़ते हुए विधिपूर्वक पूजन करें. ध्यान दें…. एकादशी की रात्री को जागरण अवश्य ही करना चाहिए, दुसरे दिन द्वादशी के दिन सुबह ब्राह्मणो को अन्न दान, जनेऊ व दक्षिणा देकर इस व्रत को संपन्न करना चाहिए.

पूजन सामाग्री:-

रोली, गोपी चन्दन, गंगा जल, दूध, दही, गाय के घी का दीपक, सुपाड़ी, मोगरे की अगरबत्ती, ऋतू फल, फुल, आंवला, अनार, लौंग, नारियल, तिल, तिल के बने पदार्थ, नीबूं, नवैध, केला, तिल और उड़द की खिचड़ी और तुलसी पत्र व मंजरी.

कथा:-

एक समय की बात है नारद मुनि त्रिलोक का भ्रमण करते हुए वैकुंठ धाम पहुंचे और वैकुंठपति को प्रणाम करते हुए प्रश्न किया ! हे प्रभु षट्तिला एकादशी का क्या महात्यम है और इस एकादशी से कैसा पुण्य मिलता है.

भगवान विष्णु ने कहा कि, प्राचीन काल में पृथ्वी पर एक ब्राह्मणी रहती थी, उस ब्राह्मणी की  मुझमें बहुत ही श्रद्धा और भक्ति रखती थी. वह स्त्री मेरे निमित सभी व्रत रखती थी. एक बार उसने एक महीने तक व्रत रखकर मेरी आराधना की और व्रत के प्रभाव से स्त्री का शरीर तो शुद्ध हो गया परंतु, यह स्त्री कभी ब्राह्मण एवं देवताओं के निमित्त अन्न दान नहीं करती थी. अत: मैंने सोचा कि, यह स्त्री बैकुण्ड में रहकर भी अतृप्त रहेगी अत: मैं स्वयं एक दिन भिक्षा लेने पहुंच गया. स्त्री से जब मैंने भिक्षा की याचना की तब उसने एक मिट्टी का पिण्ड उठाकर मेरे हाथों पर रख दिया और मैं वह पिण्ड लेकर अपने धाम लौट आया. कुछ ही दिनों बाद वह स्त्री भी देह त्याग कर मेरे लोक में आ गयी, और उसे यहां एक कुटिया व आम का पेड़ मिला. खाली कुटिया को देखकर वह स्त्री घबराकर मेरे समीप आई और बोली की मैं तो धर्मपरायण हूं फिर मुझे खाली कुटिया क्यों मिली है? तब मैंने उसे बताया कि, यह अन्नदान नहीं करने तथा मुझे मिट्टी का पिण्ड देने से हुआ है. उसके बाद मैंने फिर उस स्त्री को बताया कि, जब देव कन्याएं आपसे मिलने आएं तब आप अपना द्वार तभी खोलना, जब वे आपको षट्तिला एकादशी के व्रत का विधान बताएं. स्त्री ने भी ऐसा ही किया और जिन विधियों को देवकन्या ने कहा था, उसी विधि से ब्रह्मणी ने षट्तिला एकादशी का व्रत किया और व्रत के प्रभाव से उसकी कुटिया अन्न धन से भर गयी. इसलिए हे नारद इस बात को सत्य मानों कि जो व्यक्ति इस एकादशी का व्रत करता है और तिल एवं अन्न दान करता है उसे मुक्ति और वैभव की प्राप्ति होती है.

एकादशी का फल:-

एकादशी प्राणियों के परम लक्ष्य, भगवद भक्ति, को प्राप्त करने में सहायक होती है. यह दिन प्रभु की पूर्ण श्रद्धा से सेवा करने के लिए अति शुभकारी एवं फलदायक माना गया है. इस दिन व्यक्ति इच्छाओं से मुक्त हो कर यदि शुद्ध मन से भगवान की भक्तिमयी सेवा करता है तो वह अवश्य ही प्रभु की कृपापात्र बनता है.

ध्यान दें….

एकादशी की रात्री को जागरण अवश्य ही करना चाहिए, दुसरे दिन द्वादशी के दिन सुबह ब्राह्मणो को अन्न व तिल दान देकर इस व्रत को संपन्न करना चाहिए.

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Shattila Ekadashi…

During the Satsang, a devotee asked Maharaj ji that, Maharaj ji, on the Ekadashi of the Krishna Paksha of the month of Magha, I heard that sesame seeds should be donated on this day.

Walvyassumanji Maharaj says that. The month of Magh is sacred and auspicious and the fasts of this month are very virtuous. Maharajji says that once upon a time Sage Dalbhya asked Pulastya Rishi that, Maharajji, the living beings on this earth steal other people’s wealth, get jealous of others, and indulge in many kinds of addictions, yet they go to hell. is not received. Maharajji, what is the reason for this, after all, what kind of charity do they do that all their sins get destroyed? O Lord, what is such a secret element whose difference is not known even by Brahma, Vishnu, Shiv-Shankar, and other gods.

Pulastyaji Maharaj says that, in the month of Magh, people should live with purity and chastity, and at the same time, keeping the senses under control, abandoning lust, anger, greed, attachment, ego, and jealousy, one should meditate on Lord Vaikunthapati and chant his mantras. . Walvyassumanji Maharaj says that sesame has special importance in this fast. It is said that the number of forms in which a mole is donated, is the same number of years one gets a place in heaven. Valvyassumanji Maharaj says that according to the scriptures, six types of sesame seeds have been described. Sesame mixed bath, sesame boiling, sesame tilak, sesame mixed water, sesame havan, and sesame food. Maharajji says that, use these things yourself and also give donations to the family priest or Brahmin.

Fasting method: –

Before Ekadashi, it is necessary to have food only once in the night on Dashami, after waking up in the morning on the second day after taking bath, etc., the vow of fasting should be taken in front of Lord Vishnu. After that establish the idol or picture of Lord Vishnu. To worship Lord Vishnu, worship should be done with incense, lamp, fruits, and Panchamrit. Meditate while remembering the form of Lord Vishnu, after that recite Vishnu Sahastranam and worship it methodically while reciting the story. Pay attention… Jagran must be done on the night of Ekadashi, on the second day of Dwadashi, this fast should be completed by giving food donations, Janeu, and Dakshina to Brahmins.

Worship material: –

Roli, gopi sandalwood, Ganges water, milk, curd, cow’s ghee lamp, betel nut, incense stick of mogra, season fruit, flower, amla, pomegranate, clove, coconut, sesame, sesame preparations, lemon, illegal, banana, Sesame and Urad Khichdi and Tulsi Patra and Manjari.

Story: –

Once upon a time Narad Muni reached Vaikunth Dham while visiting Trilok and asked a question while saluting Vaikunthapati! O Lord, what is the greatness of Shattila Ekadashi, and what kind of virtue one gets from this Ekadashi?

Lord Vishnu said that in ancient times there used to be a Brahmin on earth and that Brahmin had a lot of devotion and devotion towards me. That woman used to keep all the fasts for my sake. Once she worshiped me by keeping a fast for a month and with the effect of the fast, the woman’s body became pure, but this woman never used to donate food for the sake of Brahmins and gods. Therefore, I thought that this woman would remain unsatisfied even after living in the backwoods, so one day I myself went to collect alms. When I begged the woman for alms, she picked up an earthen lump and placed it on my hands and I returned to my abode with that lump. After a few days, that woman also left her body and came into my world, and she found a cottage and a mango tree here. Seeing the empty cottage, that woman came near me in fear and said that I am religious, then why have I got an empty cottage? Then I told him that this happened because of not donating food and giving me a lump of clay. After that, I again told that woman that when the goddesses come to meet her, then you should open her door only when they tell her the rule of fasting on Shattila Ekadashi. The woman also did the same and according to the methods that Devkanya told, the Brahmin fasted on Shattila Ekadashi and due to the effect of the fast, his cottage was filled with food and money. That’s why O Narad, accept this as true the person who fasts on this Ekadashi and donates sesame seeds and grain, gets freedom and glory.

Result of ekadashi: –

Ekadashi helps in achieving the ultimate goal of living beings, devotion to God. This day is considered very auspicious and fruitful to serve the Lord with full devotion. On this day, if a person frees himself from desires and does devotional service to God with a pure heart, then he definitely becomes blessed by God.

pay attention….

Jagran must be done on the night of Ekadashi, on the second day on the day of Dwadashi, this fast should be completed by donating grains and sesame seeds to Brahmins.

Walvyassumanji Maharaj,

Mahatma Bhawan, Shri Ramjanaki

Temple, Ram Kot, Ayodhya.

Mo:-8709142129.

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