गरीबों का केसर है… - Gyan Sagar Times
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गरीबों का केसर है…

अगर फुलों की बात करते हैं तो एक ही बात ख्याल आता है कि, पूजा करना या साज-सज्जा करना होगा, पर शायद आप जानते ही होंगे कि, फूलों से कई बीमारियों का इलाज भी किया जाता है. हम एक ऐसे फूल की बात कर रही हैं जिसे गरीबों का केसर कहा जाता है शायद आपने ठीक पहचाना … नाम है गेंदा जिसे अंग्रेजी में मैरीगोल्ड कहते हैं, इसका वानस्पतिक नाम “टैजेट्स स्पीसीज” है. गेंदा का फूल पीले रंग का होता हैया यूँ कहें कि, गेंदा एक फुल ना होकर फूलों का गुच्छा होता है, इसकी हर पत्ती फूल ही होती है. बताते चलें कि, गेंदा की शुरुआत 16वीं शताब्दी में मैक्सिको से शुरू होकर पुरे विश्व में फ़ैल गया. गेंदे के फूल में कई प्रकार के तत्व पाए जाते हैं जो त्वचा के लिए बेहद फायेदेमंद होते हैं. गेंदे में कैरोटिनाइड, ग्लाइकोसाइड, फ्लावोनोइडस, स्टेरोल्स और गंध तेल पाए जाते हैं. गेंदे के फूल का इस्तेमाल एंटी-बायोटीक के रूप में किया जाता है. गेंदे के फूल में कई ऐसे एंटी-ऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो आंखों से जुड़ी कई तरह की बीमारियों में इसका प्रयोग किया जाता है.

भारत में गेंदे की खेती विशेषकर मैदानी भागों में बड़े पैमाने पर की जाती है, इसे किसी भी मौसम में उपजाया जा सकता है, खासकर मैदानी क्षेत्रों में गेंदे की तीन फ़सलें उगायी जाती है, इसके फूल सालों भर उपलब्ध होते हैं. वास्तव में गेंदे का प्रयोग सजावट या पूजा-पाठ के लिए ही होता है. बताते चलें कि, गेंदा का प्रयोग मुर्गियों के दाने में भी किया जाता है. गेंदा के पौधे की ऊँचाई लगभग 60 सेंटीमीटर होती है और, इसके फूल गुलबहार की तरह चमकीले नारंगी से पीले रंग की होती है औरिसकी पत्तियां हल्के हरे रंग की होती है. गेंदा के फुल की सुगंध हल्की, कस्तुरी गंध या लकड़ी के जैसी होती है. भारत में मुख्य रूप से अफ्रीकन गेंदा और फ्रेंच गेंदा की खेती की जाती है. गेंदा की खेती में अगर थोड़ी सी देखभाल की जाय  तो गेंदा की कई किस्में प्राप्त हो जाती है- जैसे हजारा गेंदा, मेरी गोल्ड, बनारसी या जाफरानी जो की बहुत छोटे फूल देता है.

पुरातन भारत में ही नहीं, वर्तमान समय में भी भारतीय घरों के बुजुर्ग गेंदा के फुल का प्रयोग साज-सज्जा, पूजा-पाठ के अलावा इसे औषधि के रूप में भी प्रयोग करते हैं. चिकित्सक के अनुसार…

  • जिन पुरुषों को स्पर्मेटोरिया (पेशाब और मल करते समय वीर्य जाने की शिकायत) हो उन्हे गेंदा के फूलों का रस पीना चाहिए.
  • गेंदा के फूलों को सुखा लें और इसके बीजों को एकत्र कर मिश्री के दानों के साथ समान मात्रा (5 ग्राम प्रत्येक) का सेवन कुछ समय तक दिन में दो बार किया जाए तो यह पुरुषों को शक्ति और प्रदान करता है.
  • गेंदे के फूल की पंखुडिय़ों को एकत्र कर पीस लिया जाए और शरीर के सूजन वाले हिस्सों में लगाया जाए तो सूजन मिट जाती है.
  • गेंदा के फूलों को नारियल तेल के साथ मिलाकर, हल्की-हल्की मालिश करके नहा लिया जाए, सिर में हुए किसी भी तरह के संक्रमण, फोड़े-फुन्सियों में आराम मिल जाता है.
  • अगर किसी व्यक्ति को सिर में फोड़े-फुन्सियां और घाव हो जाए उन्हे मैदा के साथ गेंदा की पत्तियों और फूलों के रस को मिलाकर सप्ताह में दो बार सिर पर लगाना चाहिए, आराम मिल जाता है.
  • गेंदा के पत्तों को मोम में गर्म करके ठंडा होने पर पैरों की बिवाई पर लगाने से आराम मिल जाता है। इससे तालू चिकने हो जाते हैं.
  • गेंदा की विभिन्न प्रजातियों का प्रयोग तेल व इत्र उद्योग में भी किया जाता है.
  • गेंदा का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाई के रूप में भी क्या जाता है- जैसे जलन को नष्ट करनेवाला, पेट के मरोड़ को दूर करनेवाला और पसीना लाने में सहायक होता है, इसे टॉनिक के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है. इसके अतिरिक्त त्वचा के रोग और गठिया में भी लाभदायक होता है.
  • गेंदे के फूल में घाव भरने की अदभुत क्षमता होती है साथ ही दर्द दूर करने के भी गुण होते हैं. बाजार में गेंदे के फूल से बनी कई दवाइयां आसानी से उपलब्ध हैं जैसे- कैलेंडुला साबुन, माउथवाश और चाय (टी).
  • गेंदे के फूल का इस्तेमाल रंजक के रूप में भी किया जाता है.
  • गेंदे के फूल से नेचुरल कलर भी तैयार किया जाता है.

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