भौतकी विज्ञान से संबंधित(45)… - Gyan Sagar Times
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भौतकी विज्ञान से संबंधित(45)…

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Laws of Gravity…

 

   
1. Gravity – is the force of attraction that acts between every two objects due to their mass.
2. Gravity – The force of the Earth’s gravity on the objects around the Earth is called gravity. We perceive it as the heaviness of the object.

 

3. Every object attracts the other object.
4. The force of attraction is proportional to the product of the masses of the two objects.
5. The force of attraction is inversely proportional to the square of the distance between the two objects. Where F = force of attraction, m1, and m2 are the masses of the two objects respectively and r is the distance between the two objects. G is called Universal Gravity. G is a scalar quantity. Its value is 6.67 × 10-11, the value of G is the same in the whole universe.

F=GM1M2r2F=GM1M2r2

 

6. The mass of the object is called the amount of matter inside it. The weight of an object is called the force of gravity acting on it.

Weight = mass x acceleration due to gravity = M × g = mg

 

7. If the object is taken to any place without cutting it, then its mass remains the same, while the weight of the object is different at different places.

 

8. The weight of the object at the center of the earth or far away from the earth becomes negligible but its mass remains the same.

 

9. The mass of the object is measured with a simple balance, but the weight of the object is measured with a spring balance.

 

10. Mass is a scalar quantity, whereas mass is a vector quantity.
11. At height – At higher altitudes, the value of the acceleration of gravity is less so the weight of the object decreases, value of

g at H, GH = g [1-2h/R]

 

12. Inside the earth: The weight of the object inside a mine decreases because the mass of the earth attracting the object decreases.

Depth – Value of g at d, gd = g[1-d/R].

 

13. On the surface of the earth: The weight of the same object is different in different places on the surface of the earth. There are two reasons for this-

(i). Odd shape of the earth – Due to the shape of the earth, the value of g is greater at the poles and lowest at the equator.

(ii). Earth’s rotation on its axis.

 

14. The weight of the object on the Moon: 1/6.

 

15. Weight of the object in space – Zero.
   
 

गुरुत्वाकर्षण के नियम

 

   
1. गुरुत्वाकर्षण – वह आकर्षण बल है, जो प्रत्येक दो वस्तुओं के बीच उनके द्रव्यमान के कारण कार्य करता है.

 

2. गुरुत्व – पृथ्वी के आस-पास की वस्तुओं पर पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण का बल गुरुत्व कहलाता है. हम इसे वस्तु के भारीपन के रूप में अनुभव करते हैं.

 

3. प्रत्येक वस्तु दूसरी वस्तु को अपनी ओर आकर्षित करती है.

 

4. आकर्षण का बल दोनों वस्तुओं के द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती होता है.

 

5. आकर्षण का बल दोनों वस्तुओं के बीच की दूरी के वर्ग का व्युत्क्रमानुपाती होता है. जहाँ F = आकर्षण का बल, m1 तथा m2 क्रमशः दोनों वस्तुओं के द्रव्यमान है तथा r दोनों वस्तुओं के बीच की दूरी है. G को सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण कहा जाता है. G एक अदिश राशि है. इसका मान 6.67 × 10-11 होता है. G का मान सम्पूर्ण ब्रह्मांड में एक-सा होता है.

F=GM1M2r2F=GM1M2r2

 

6. वस्तु का द्रव्यमान उसके अंदर पदार्थ की मात्रा को कहते हैं. वस्तु का भार उस पर लगने वाले गुरुत्व के बल को कहते हैं.

भार = द्रव्यमान x गुरुत्वीय त्वरण = M × g = mg

7. यदि वस्तु को बिना काटे-छाटे किसी भी स्थान पर ले जाएं, तो उस का द्रव्यमान समान रहता है, जबकि वस्तु का भार विभिन्न स्थानों पर भिन्न-भिन्न होता है.

 

8. पृथ्वी के केन्द्र पर या पृथ्वी से बहुत दूर वस्तु का भार नगण्य हो जाता है लेकिन उसका द्रव्यमान यथावत रहता है.

 

9. वस्तु का द्रव्यमान साधारण तुला से मापते हैं, परन्तु वस्तु का भार कमानीदार तुला से मापते हैं.

 

10. द्रव्यमान एक अदिश राशि है, जबकि भार सदिश राशि है.

 

11. ऊंचाई पर – अधिक ऊंची जगहों पर गुरुत्वाकर्षण त्वरण का मान कम होता है इसलिए वस्तु का भार घट जाता है.

H पर g का मान, gh = g [1-2h/R]

 

12. धरती के अन्दर: किसी खान के अंदर वस्तु का भार घटता है क्योंकि वस्तु को आकर्षित करने वाली पृथ्वी का द्रव्यमान घट जाता है.

गहराई – d पर g का मान, gd = g[1-d/R]

 

13. पृथ्वी की सतह पर – पृथ्वी की सतह पर विभिन्न स्थानों में एक ही वस्तु का भार भिन्न-भिन्न होता है. इसके दो कारण हैं-

(i). पृथ्वी का विचित्र आकार – पृथ्वी की आकृति के कारण g का मान, ध्रुवों पर अधिक तथा विषुवत रेखा पर सबसे कम होता है

(ii). पृथ्वी का अपनी धुरी पर घूमना.

 

14. चन्द्रमा पर वस्तु का भार: पृथ्वी पर वस्तु को भार का 1/6.

 

15. अन्तरिक्ष में वस्तु का भार – शून्य.

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