इतिहास से संबंधित(57) - Gyan Sagar Times
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इतिहास से संबंधित(57)

मगध साम्राज्य...

1.      6th century BC Magadha Mahajanapada, one of the sixteen Mahajanapadas, flourished in the form of an empire. It has the distinction of being the first empire of India.

2.      Bimbisara, the ruler of the Haryana dynasty, established the Magadha Empire by making Giribraj (Rajgriha) his capital.

3.      Bimbisara was the first powerful ruler of the Haryana dynasty.

4.      Bimbisara strengthened his political position through matrimonial relations and made it the basis of his socialist ambition.

5.      Bimbisara married the princess Chellan of Kaushal Devi Katha Lichchavi, the princess of Kaushal district.

6.      Bimbisara established control over the kingdom of Anga and annexed it to the Magadha Empire.

7.      Bimbisara was a contemporary of Gautam Buddha. It is also known as ‘Srenik’.

8.      Bimbisara had sent his royal physician, Jivak, for the treatment of Avanti King Chandraghrota.

9.      At the age of 15, Bimbisara, who took the reins of the Magadha Empire, ruled for 52 years.

10. After killing Bimbisara, the son of Ajatashatru became the ruler of Magadha, also known as ‘Kunik’.

11. Ajatashatru also adopted the policy of expansion of the empire and he merged Kashi and Vashi Sangha into the Magadha Empire after a long struggle.

12. Ajatashatru used new weapons named ‘Evyamusal’ and ‘Mahashilakantaka’ in the war due to the fear of attack by scorpions.

13. The first Buddhist council was organized in the Saptaparni cave of Rajgir during the reign of Ajatashatru.

14. Ajatashatru ruled for 20 years according to Puranas and 32 years according to Buddhist literature.

15. After killing Ajatashatru, his son Udayin ascended the throne of the Magadha Empire.

16. Udayin established ‘Kusumpura’ at the confluence of the Ganges river which later became famous as Pataliputra.

17. Udayin or Uday Bhadra was a Jain believer.

18. Aniruddha, the ruler of the Haryana dynasty, who sat on the Magadha throne after Udayin, was the Mughal and the audience.

19. The last ruler of the Haryana dynasty was ‘Nagadashaka’. Also called ‘spectator’.

20. After the rulers of the Haryana dynasty, the rule of the Shishunaga dynasty was established in Magadha.

21. An Amatya named Shishunaga sat on the throne of Magadha after deposing Nagdasaka, the last ruler of the Harayaka dynasty, and laid the foundation of a new dynasty named Shishunaga.

22. Shishunaga captured the kingdom of Avanti and merged it into the Magadha Empire.

23. Shishunaga made Vaishali his second capital to control the Vajjis.

24. Shishunaga lived from 412 to 300 BC. Ruled until.

25. There is no clear information about the political achievements of the reign of Kalashok.

26. Kalashok has been called Kalavarpa in the Puranas and Buddhist texts Divyadana.

27. About 100 years after the Mahaparinirvana of Gautam Buddha, the second Buddhist council was organized in Vaishali in the 10th year of the reign of Kalashoka.

28. After the death of the ruler of the Nanda dynasty, Kalashoka, a powerful dynasty named the Nanda dynasty was established in Magadha.

29. The founder of this dynasty, Mahapadmananda was a Shudra ruler and he assumed the title of ‘Sarvabhavaka’.

30. Mahapadmananda had captured some of the people of Kalinga and there he had also built a canal.

31. Mahapadmananda lifted the statue of Ginseng of Kalinga. After which he assumed the title of Ekradha.

32. The last ruler of the Nanda dynasty was Ghanananda.

33. In 325 BC during the reign of Ghanananda, Alexander invaded India.

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1.      छठी सदी ई.पू. मेँ सोलह महाजनपद में से एक मगध महाजनपद का उत्कर्ष एक साम्राज्य के रुप मेँ हुआ.  इसे भारत का प्रथम साम्राज्य होने का गौरव प्राप्त है.

2.      हर्यक वंश के शासक बिंबिसार ने गिरिब्रज (राजगृह) को अपनी राजधानी बना कर मगध साम्राज्य की स्थापना की.

3.      बिम्बिसार हर्यक वंश का प्रथम शक्तिशाली शासक था.

4.      बिम्बिसार ने वैवाहिक संबंधों द्वारा अपनी राजनीतिक सुदृढ़ की और इसे अपनी समाजवादी महत्वाकांक्षा का आधार बनाया.

5.      बिंबिसार ने कौशल जनपद की राजकुमारी कौशल देवी कथा लिच्छवी की राजकुमारी चेल्लन से विवाह किया.

6.      बिंबिसार ने अंग राज्य पर अधिपत्य स्थापित करके उसे मगध साम्राज्य में मिला लिया.

7.      गौतम बुद्ध का समकालीन था बिंबिसार. इसे ‘श्रेणिक’ के नाम से भी जाना जाता है.

8.      बिम्बिसार ने अपने राजवैद्य जीवक को, अवंती नरेश चंद्रघ्रोत की चिकित्सा के लिए भेजा था.

9.      15 वर्ष की आयु में मगध साम्राज्य शासन की बागडोर संभालने वाला बिम्बिसार ने 52 वर्षों तक शासन किया.

10. बिंबिसार की हत्या करने के उपरांत का पुत्र अजातशत्रु मगध का शासक बना जिसे ‘कुणिक’ भी कहा जाता है.

11. अजातशत्रु ने भी साम्राज्य विस्तार की नीति अपनाई और उसने काशी तथा वाशि संघ को एक लंबे संघर्ष के बाद मगध साम्राज्य में मिला लिया.

12. बिच्छदियों के आक्रमण के भय से अजातशत्रु ने युद्ध में ‘इव्यमूसल’ तथा ‘महाशिलाकंटक’ नामक  नए हथियारों का प्रयोग किया.

13. प्रथम बौद्ध संगीति का आयोजन राजगीर के सप्तपर्णी गुफा में आजातशत्रु के शासन काल में  हुआ.

14. अजातशत्रु ने पुराणों के अनुसार 20 वर्ष तथा बौद्ध साहित्य के अनुसार 32 वर्ष तक शासन किया.

15. अजातशत्रु की हत्या करके उसका पुत्र उदयिन मगध साम्राज्य की गद्दी पर आसीन हुआ.

16. उदयिन ने गंगा नदी के संगम स्थल पर ‘कुसुमपुरा’ की स्थापना की जो बाद में पाटलिपुत्र के रुप में  विख्यात हुआ.

17. उदयिन या उदय भद्र जैन धर्मावलंबी था.

18. उदयिन के बाद मगध सिंहासन पर बैठने वाले हर्यक वंश के शासक अनिरुद्ध, मुगल और दर्शक थे.

19. हर्यक वंश का अंतिम शासक ‘नागदशक’ था.  जिसे ‘दर्शक’ भी कहा जाता है.

20. हर्यक वंश के शासकों  के बाद मगध पर पर शिशुनाग वंश का शासन स्थापित हुआ.

21. शिशुनाग नमक एक अमात्य हर्यक वंश के अंतिम शासक नागदशक को पदच्युत करके मगध की गद्दी पर बैठा और शिशुनाग नामक नए वंश की नींव डाली.

22. शिशुनाग ने अवन्ति राज्य पर अधिकार करके उसे मगध साम्राज्य में मिला लिया.

23. शिशुनाग ने वज्जियों को नियंत्रित करने के लिए वैशाली को अपनी दूसरी राजधानी बनाया.

24. शिशुनाग ने 412 से 300 ई. पू. तक शासन किया.

25. कालाशोक के शासन काल की राजनीतिक उपलब्धियों के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती है.

26. कालाशोक को पुराणों और बौद्ध ग्रंथ दिव्यादान में  कालवर्प कहा गया है.

27. गौतम बुद्ध के महापरिनिर्वाण के के लगभग 100 वर्ष बाद कालाशोक के शासन काल के 10वें वर्ष मेँ वैशाली में द्वितीय बौद्ध संगीति  का आयोजन हुआ था.

28. नंद वंश के शासक कालाशोक की मृत्यु के बाद मगध पर नंद वंश नामक एक शक्तिशाली राजवंश की स्थापना हुई.

29. इस वंश का संस्थापक महापद्मनंद एक शुद्र शासक था और  उसने ‘सर्वअभावक’ की उपाधि धारण की थी.

30. महापद्मनंद कलिंग के कुछ लोगों पर अधिकार कर लिया था और वहाँ उसने एक नहर का निर्माण भी कराया था.

31. महापद्मनंद ने कलिंग के गिनसेन की प्रतिमा उठा ली थी. जिसके बाद एकराढ़ की उपाधि धारण की.

32. नंद वंश का अंतिम शासक घनानंद था.

33. घनानंद के शासन काल के 325 ईसा पूर्व में सिकंदर ने भारत पर आक्रमण किया था.

 

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