वनस्पति विज्ञान से संबंधित(23)… - Gyan Sagar Times
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वनस्पति विज्ञान से संबंधित(23)…

  1. कोशिका भित्ती केवल पादप कोशिका में पाया जाता है. चुकिं यह सेलुलोज का बना होता है. यह कोशिका को निश्चित आकृति एवं आकार बनाए रखने में भी सहायक होता है.
  2. ऊर्जा युक्त कार्बनिक पदार्थों का आक्सीकरण माइटोकाण्ड्रिया मे होता है, जिसमे काफी मात्रा में ऊर्जा प्राप्त होती है, इस लिए माइटोकाण्ड्रिया को कोशिका का पॉवर हाउस कहते हैं.
  3. माइटोकाण्ड्रिया कोशिका के अंदर होने वाले आक्सी श्वसन का केंद्र है. यह मुख्यत: कार्बोहाइड्रेट तथा वसा के आक्सीकरण द्वारा ऊर्जा उत्पन्न होती है. इसी कारण इसे कोशिका का ऊर्जा गृह कहते हैं.
  4. माइटोकांड्रिया मे ऊर्जा ए०टी०पी० के रूप मे बनती है.
  5. माइटोकांड्रिया का सम्बंध श्वसन से होता है.
  6. रिक्तिका में एंथोसायनिन जैसे पदार्थ होते हैं जिसके कारण फूलों का रंग लाल, नीला, पीला आदि होता है.
  7. हरित लवक = यह हरे रंग का होता है क्योंकि इसके अंदर एक हरे रंग का पदार्थ पर्णहरित होता है जिसे क्लोरोफिल भी कहते हैं इसकी सहायता से पौधा प्रकाश संश्लेषण करता है और भोजन बनाता है. इसलिए हरित लवक को पादप कोशिका की रसोई भी कहा जाता है.
  8. अवर्णी लवक = यह रंगहीन लवक होता है. यह पौधै के उन भागों की कोशिकाओं में पाया जाता है जो सूर्य के प्रकाश से वंचित हैं. यह भोज्य पदार्थों को संग्रह करने वाला लवक होता है. उदाहरण:- जडों, भूमिगत तना आदि.
  9. वर्णी लवक : यह लवक रंगीन होते हैं. जो प्राय: लाल, पीले एवं नारंगी रंग के होते हैं. ऐसे लवक पौधों के पुष्प में पाये जाते हैं. उदाहरण:- टमाटर मे लाइकोपेन, गाजर मे कैरोटीन, चुकंदर मे विटानीन.
  10. क्लोरोप्लास्ट लवक केवल प्रकाश संश्लेषी पौधों में पाया जाता है.
  11. पत्तियों का रंग पीला उसमें कैरोटिन के निर्माण होने के कारण होता है.
  12. पर्णहरिम की परतें सूर्य के प्रकाश को अवशोषित कर इस ऊर्जा का उपयोग जल के अणुओं को तोड़ कर उनसे हाइड्रोजन एवं आक्सीजन अलग-अलग करने में करतीं हैं. जल से प्राप्त हाइड्रोजन ही कार्बन डाई आक्साइड के साथ मिल कर भोजन बनाने का कार्य करती है.
  13. आलू का जो भाग मिट्टी की सतह पर होता है वह हरा हो जाता है, क्योंकि आलू मे उपस्थित ल्युकोप्लास्ट क्लोरोप्लास्ट मे परिवर्तित हो जाता है.
  14. हरे टमाटर व मिर्चा पकने पर लाल हो जाते हैं, ऐसा क्लोरोप्लास्ट का क्रोमोप्लास्ट में परिवर्तन होने के कारण होता है.
  15. पौधों मे जल का परिवहन जाइलम या दारू ऊतक द्वारा होता है.
  16. पादपों मे विभाज्योतक ऊतक की उपस्थिति के कारण ही वृद्धि की क्रिया निरंतर उनके जीवन भर होती रहती है.
  17. पौधों मे वृद्धि केवल कुछ निश्चित वृद्धि केंद्रों पर होती है, जो प्राय: मूल शीर्ष (जड़ का अग्र सिरा) तथा प्ररोह शीर्ष (तने या शाखाओं के अगले सिरे) पर होती है.
  18. फ्लोएम ऊतक का प्रमुख कार्य पौधों के हरे भाग मे निर्मित भोज्य पदार्थ को दूसरे भागों मे वितरण करना होता है.
  19. जड़ पौधों का अवरोही भाग है, जो मुलांकुर से विकसित होता है.
  20. पुष्प पौधों का जनन अंग होता है.
  21. फ्लोरिजेंस नामक हार्मोन फूलों के खिलने मे मदद करता है.
  22. पत्ती हरे रंग की होती है, इसका मुख्य कार्य प्रकाश-संश्लेषण द्वारा भोजन बनाना होता है.
  23. स्थलीय पौधे वायुमण्डल से कार्बन डाई आक्साइड लेते हैं, जबकि जलीय पौधे जल में घुली कार्बन डाई आक्साइड लेते हैं.
  24. पत्ती की कोशिकाओं मे जल शिरा से परासरण द्वारा एवं कार्बन डाई आक्साइड वायु मण्डल से विसरण द्वारा जाता है.
  25. प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक जल पौधों की जडों के द्वारा अवशोषित किया जाता है, एवं प्रकाश संश्लेषण के दौरान निकलने वाला आक्सीजन इसी जल के अपघटन से प्राप्त होता है.
  26. क्लोरोफिल पत्तियों मे हरे रंग का वर्णक है, इसके 4 घटक हैं- क्लोरोफिल ए एवं बी, कैरोटीन तथा जैंथोफिल. इसमे क्लोरोफिल ए एवं बी हरे रंग का होता है और ऊर्जा का स्थानांतरण करता है और यह प्रकाश संश्लेषण का केंद्र भी होता है.
  27. क्लोरोफिल प्रकाश से बैगनी, नीला तथा लाल रंग को ग्रहण करता है.
  28. क्लोरोफिल के केंद्र में एक मैग्निशियम का परमाणु होता है.
  29. प्रकाश संश्लेषण की दर लाल रंग के प्रकाश मे सबसे अधिक एवं बैगनी रंग के प्रकाश में सबसे कम होता है.
  30. प्रकाश संश्लेषण की क्रिया एक उपचयन एवं अपचयन की अभिक्रिया है. इसमें जल का उपचयन आक्सीजन के बनने में तथा कार्बन डाई आक्साइड का अपचयन ग्लूकोज के निर्माण में होता है.
  31. प्रकाश संश्लेषण के द्वारा पौधे जो प्रथम खाद्य पदार्थ बनाते हैं वह शर्करा होता है.
  32. रसारोहण द्वारा अवशोषित जल तथा खनिज लवण जाइलम ऊतक के द्वारा पत्तियों तक पहुंचते हैं.
  33. पुष्प के मादा जननांग को जायांग कहते है तथा नर जननांग को पुंकेसर कहा जाता है.
  34. संसार मे सबसे लम्बा वृक्ष सिकोया है, यह एक नग्न बिजीय है. इसे कोस्ट रेड वुड आफ कैलिफोर्निया भी कहा जाता है.
  35. किसी द्विबीजपत्री जड को तिरछी दिशा में काटे , तो उसकी आन्तरिक संरचना में बाहर से अन्दर की ओर जो भी भाग पाये जाते है अन्दर की ओर पाये जाने वाले भाग क्रमश: इपिडर्मिस – कार्टेक्स – पेरीसाइकिल – वेस्कुल बण्डल होता
  36. सबसे बडा फल लोडोसिन है, इसे डबल कोकोनट भी कहते हैं. यह फल मुख्य रूप से केरल मे पाया जाता है.
  37. शैवाल प्राय: पर्णहरित युक्त, संवहन ऊतक रहित, आत्मपोषी होते हैं.
  38. सबसे छोटे गुणसूत्र शैवाल में एवं सबसे लम्बे ट्राइलियम में होते हैं.
  39. जिम्नोस्पर्म के पौधे नग्नबीजी होते हैं, इनके बीज फलों के अंदर नहीं होते हैं.
  40. पोरीफेरा संघ के सदस्य सामान्यतः ‘स्पंज‘ के नाम से जाने जाते हैं.

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