समुद्री वनस्पतियां… - Gyan Sagar Times
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समुद्री वनस्पतियां…

जब भी बात होती है वनस्पतियों की तो हर वनस्पति अपने आप में अनोखा और अद्वितीय होता है. हर वनस्पति की अपनी-अपनी उपयोगिता होती है. आज हम बात कर रहेहैं समुदी वनस्पतियाँ के बारे में…

समुद्री शैवाल :-  शैवाल मुख्यत:  03 प्रकार की होती है. शैवाल का उपयोग औषधि, व्यवसाय और भोजन के रूप में किया जाता है. इनमे से कुछ जहरीली शैवाल भी  होती है. क्लोरेला नामक शैवाल को कैबिन के हौज में उगाकर अंतरिक्ष यात्री को प्रोटीनयुक्त भोजन, जल और ऑक्सीजन सभी प्राप्त हो सकते हैं.

सिवार (kelp) :- यह एक प्रकार की समुद्री वनस्पति है. समुद्र की गहराइयों में इस वनस्पति के जंगल विद्यमान हैं. यह भी शैवाल की तरह बहुउपयोगी और अमरबेल की तरह सालों -साल पानी में रहकर सडती नहीं है.

 मोती और मूंगा :- यह भी समुद्र से पाए जाने वाला एक महत्वपूर्ण रत्न होता है. वैसे तो मोती कई प्रकार का होता है. ज्योतिषाचार्य के अनुसार, असली और प्रभावयुक्त मोती पहनने से जीवन में शांति स्थापित होती है.

उसी तरह मूंगा भी एक चमत्कारिक नग होता  है. यह भी समुद्र में बहुतायत रूप से पाया जाता है.  ज्योतिषाचार्य के अनुसार, मंगल राशि के लोगों को मूंगा पहनने की सलाह दी जाती है जबकि सामान्यत: चंद्रमा क्षीण होने पर मोती पहनने की सलाह दी जाती है. मान्यता के अनुसार मोती का एक कार्य धन और समृद्धि के द्वार खोलना भी माना जाता है.

आत्मरत्न :-  पौराणिक ग्रंथों के अनुसार कहते हैं कि समुद्र में एक प्रकार का आत्मरत्न पाया जाता है, जो चमत्कारिक रूप से लाभ देने वाला माना जाता है. यह देखने में  अंडाकार होता है.  इस रत्न को सोने या चांदी की अंगूठी में जड़वाकर पहनने से कोई दिव्य आत्मा हमेशा उसकी रक्षा करती है. इस रत्न की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे गौर से देखने पर इसकी लकीरें हिलती-डुलती नजर आती हैं.

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