सब्जियों का राजा… - Gyan Sagar Times
Health

सब्जियों का राजा…

सब्जियों में आलू के बाद दुसरे नंबर पर आता है बैंगन. प्राचीन काल से ही बैंगन की खेती भारत में हो रही है. वर्तमान समय में आलू के बाद दूसरी सबसे खपत वाली सब्जी बैंगन ही है. पूरी दुनिया में चीन के बाद भारत में सबसे अधिक उगाया जाता है. बैंगन को अंग्रेजी में Brinjal कहते हैं और इसका वैज्ञानिक नाम सोलेनम मेलान्जना (Solanum Melongena) है. कहा जाता है कि, बैंगन जितना मुलायम और चिकना होगा उसके गुण और पौष्टिकता उतनी ही अधिक होती है. ज्ञात है कि, भारत देश में करीब 5.5 लाख हेक्टेयर भूमि पर उगाया जाता है.

आमतौर पर बैंगन की की खेती साल में तीन बार की जाती है 1. जून-जुलाई 2. नवम्बर और 3. फरवरी में. इसकी खेती के लिए बलुई दुमट मिटटी ज्यादा अच्छा माना जाता है. बैंगन कई प्रकार के होते हैं छोटे से लेकर बड़े या गोल और लम्बे भी होते हैं. गोल गहरा बैंगनी, लंबा बैंगनी, हरा गोल, हरा लंबा, हरापन लिए हुए सफेद, सफेद, छोटा गोल बैंगनी रंगवाला, वामन बैंगन, ब्लैकब्यूटी, गोल गहरे रंग वाला, मुक्तकेशी, रामनगर बैंगन, गुच्छे वाले बैंगन इत्यादि. बैंगन का पौधा 2 से 3 फुट ऊँचा खड़ा लगता है और इसकी लंबाई करीब एक फूट तक हो सकती है.

पोषण की दृष्टि से देखें तो बैंगन में खनिज लवण व विटामिन प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं. बताते चलें कि, देखने में ठोस होने के बावजूद भी बैंगन में जलांश 92 प्रतिशत होता है. खनिज लवणों में कैल्शियम, फास्फोरस, लौह-तत्व, पोटेशियम और मैंगनीज की मात्रा मध्यम होती है. कुछ मात्रा में विटामिन ‘ए’ ‘बी’ ‘सी’ और कॉम्पलेक्स भी पाए जाते हैं. बैंगन में 2-3 ग्राम तक फाइबर भी होता है. बैंगन की पत्तियों का प्रयोग दवाई बनाने में भी किया जाता है. इसके नियमित इस्तेमाल करने से कई बीमारियां पास नहीं फटकती है.

बैंगन में विटामिन सी बहुत अच्छी मात्रा में होती है जो प्रतिरोधी क्षमता को बढ़ाता है और शरीर को संक्रमण से मुक्त रखने में भी मदद करता है. बैंगन की पत्तियों के रस का सेवन करने से भी रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम किया जा सकता है. अगर आप प्राकृतिक तरीके से सिगरेट छोड़ना चाहते हैं तो तो अपने डाईट में बैंगन को भी शामिल करें. बैंगन का रस दांत के दर्द में लाभदायक प्रभाव दिखलाता है साथ ही ही इसकी जड़े का प्रयोग अस्थमा के उपचार के लिए किया जाता है. अगर आपके शरीर में खून की कमी हो गई है तो आप आग पर भुने हुए बैंगन में थोड़ी सी शक्कर डालकर प्रतिदिन खली पेट में खाएं इससे आपके शरीर में खून की कमी पूरी हो जाती है.

अगर आप गैस, बदहजमी और अपचन जैसी समस्याओं से परेशान हों तो आप बैंगन का सूप बनाये और उसमें स्वादानुसार हींग और लहसुन मिलाकर सेवन करें. अगर आपके बाल और त्‍वचा रूखे-सूखे हैं तो आप बैंगन खाना शुरु कर दीजिए चुकिं, बैंगन त्‍वचा को हाइड्रेट करता है और अंदर से नमी प्रदान करता है. अगर आप ज्यादा वजन से परेशान है तो भी आप बैगन का प्रयोग करें चुकिं  इसमें फाइबर होता है और यह चर्बी को जलाकर कैलोरी कम करता है. बैगन खाने से खाने से पेट भर जाता है और जल्‍द भूख नहीं लगती है. बैंगन में एक तत्व पाया जाता है जो शरीर में कैंसर की सेल से लड़ने में सहायक होता है.बैंगन के पेड़ में न्‍यूट्रियन्‍ट्स पाए जाते हैं जो हमारे दिमाग के लिये बहुत ही फायेदेमंद होते हैं. यह किसी भी प्रकार के नुक्‍सान से हमारी कोशिका की झिल्‍ली को बचाते हैं साथ ही दिमाग को फ्री रैडिक्‍ल से बचाता है और ब्रेन के विकास करने में मदद करता है.

हाई फाइबर और कम कार्बोहाइड्रेट के तत्‍व होने के कारण यह मधुमेह रोगियों के लिये बहुत ही अच्‍छा आहार माना जाता है. इसके नियमित सेवन से शुगर का लेवल कम होता है. लीवर की बीमारियों में भी बैंगन का प्रयोग अच्छा माना जाता है. बैंगन की पत्तियों में हल्का निद्राकारी तत्व उपस्थित रहता है. जिसका प्रयोग कई प्रकार की दवाइयों को बनाने में किया जाता है. ध्यान दें कि, सब्जी बनाते समय इसका डंठल व्यर्थ समझकर फेंकना नहीं चाहिए, क्योंकि इसमें पौष्टिक तत्वों की मात्रा अधिक होती है. आग पर भुने हुए बैंगन पचने में बिल्कुल हल्के और पाचन शक्ति बढ़ाने वाले होते हैं और अपच दूर करने में सहायक होते हैं. बताते चलें कि, मध्यम आकार के बैंगन का प्रयोग सब्जी बनाने के लिए करना चाहिए. बाबसीर के रोगियों के लिए सफेद बैगन का प्रयोग विशेष फायेदेमंद होता है. आग पर भुना हुआ बैंगन का भर्ता पित्त को शांत करता करता है और वात और पित्त के रोगों को ठीक करता है.

बैंगन के नुकसान:-

ज्यादा बीज बाले बैंगन को जहर का रूप माना जाता है. बैगन पेट में बादी पैदा करता है और यह बवासीर को भी बढाता है. यह कफ और बलगम को भी बढाता है.

Related Articles

Check Also
Close
Back to top button
error: Content is protected !!