किडनी दिवस… - Gyan Sagar Times
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किडनी दिवस…

मानव शरीर का हर अंग अपने आप में अनूठा और बेमिसाल है. जब भी किसी अंग में किसी भी तरह की परेशानी होती है तब वो अंग ख़ास तरह का संकेत देते हैं जिससे समझ में आता है कि, मानव शरीर का कोई ख़ास अंग ठीक से काम नहीं कर रहा है. ऐसी स्थिति में स्वयं चिकित्सक ना बनकर किसी स्पेशलिस्ट चिकित्सक से मिलना चाहिए. वर्तमान समय में नहीं नहीं आधुनिक समय तो ज्यादा अच्छा होगा. आधुनिक जीवन और आधुनिक लाइफ स्टाइल किसको अच्छा नहीं लगता है पर आधुनिक लाइफ-स्टाइल कई बीमारियों की जननी है.

आज 14 मार्च है और हर साल आज के दिन वर्ल्ड किडनी दिवस के रूप में मनाया जाता है. मेडिकल साइंस में क्रोनिक डिजीज के नाम से पुकार जाने वाली बीमारी के रूप में प्रख्यात है ‘किडनी डिजीज’. किडनी डिजीज या किडनी की बीमारी से बचने के लिए या यूँ कहें कि, जागरिकता फैलाने के लिए हर साल “किडनी दिवस” मनाया जाता है.

भारत में करीब लाखों लोग इसके पीड़ित है और हजारों लोगों की मौत बिना इलाज या जानकारी के अभाव में हो जाती है. वास्तव में किडनी हमारे शरीर का महत्वपूर्ण अंग है जिसका प्रमुख काम होता है शरीर के विषैले पदार्थों को बाहर निकालना. आइये जानते है इस बीमारी के लक्षण…

  • किडनी खराब होने पर शरीर में विषैले पदार्थ जमा होने लगते हैं, जिससे हाथों और पैरों में सूजन आने लगती है.
  • यूरिन का रंग गाढ़ा होना या रंग में बदलाव भी इसका इशारा हो सकता है.
  • आपके पेट के बांयीं या दांयीं ओर असहनीय दर्द हो रहा हो, तो आपके किडनी में परेशानी हो सकती है.
  • पेशाब का ज्यादा या कम होना, बार-बार पेशाब होना और पेशाब का ना होना भी किडनी फेल होने लक्ष्ण होते हैं.
  • पेशाब के दौरान रुधिर (Blood) का आना
  • पेशाब का अहसास होना लेकिन, पेशाब का ना होना किडनी फेल के लक्षण माने जाते हैं.
  • पेशाब करते वक्त जलन का महसूस होना या बेचैनी का होना… इसका मतलब होता है यूरिन मेंम इन्फेक्शन का होना.
  • शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की कमी हो जाती है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने के कारण सांस लेने में तकलाफ होने लगती है.
  • इस बीमारी के कारण आपकी आंखो में दर्द के साथ-साथ सिरदर्द की समस्या होना.
  • छोटे-छोटे काम करने के बाद कंजोरी का एहसास होना
  • हरमोंन के स्तर का गिरना.

पुरातन भारतीय चिकित्सा पद्धति में बीमारियों का इलाज आयुर्वेद या यूँ कहें कि, जड़ी-बुटीयों से किया ज़ाता था. जहाँ हर तरह के बीमारी का इलाज जड़ी-बुटी से किया जाता था जो काफी हद तक सफल होता था. वर्तमान समय के भारत में आज भी लोग आधुनिक चिकित्सा पद्धति को छोड़कर आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को अपनाते है. किडनी यानी गुर्दे के बिमारी का इलाज आयुर्वेद में संभव है. आज भी कई ऐसी जड़ी-बुटीयां हैं जिससे किडनी यानी गुर्दे की बिमारी का इलाज किया जाता है.

आयुर्वेद की किताबों में “पुनर्नवा” के पौधे का जिक्र किया गया है. इसका वैज्ञानिक नाम बोरहाबिया डीफ्फुजा (Boerhavia diffusa). “पुनर्नवा” का मतलब होता है फिर से नया कर देने वाला. आयुर्वेदिक ग्रन्थों के अनुसार, अगर किडनी में किसी भी तरह की समस्या हो तो आप पुनर्नवा के पौडे का काढ़ा बनाकर पीने से किडनी से जुडी समस्या ठीक हो जाती है. अगर आपको भी इस तरह के लक्षण दिखाई पड़े तो तुरंत ही चिकित्सक से मिले.

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