हेल्दी जीवन के सूत्र… - Gyan Sagar Times
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हेल्दी जीवन के सूत्र…

आधुनिक जीवन और अस्त-व्यस्त सी जिन्दगी ही वर्तमान समय की रूपरेखा बन गई है. वर्तमान समय में जीवन जीना ही मुश्किल का दौर है उसमें अपनी जिन्दगी को सरल और संतुलित बनाना नामुमकिन ही दीखता है. आमतौर पर यही दीखता है लेकिन, दिनचर्या को संतुलित बना लें तो नामुमकिन कुछ भी नहीं. आज हम आपको हेल्दी जीवन जीने के कुछ गोपनीय सूत्र बता रहें हैं जिससे आप अपनी जिन्दगी को हेल्दी बना सकते है. आइये जानते हैं…

  1. रात्री में जल्दी सोने की आदत डाले व सुबह भी सूर्योदय से पूर्व जागने का प्रयास करें.
  2. सुबह की सैर व व्यायाम जरुर करें.
  3. प्रतिदिन के काम करने की सूचि बनाएं तथा उस पर चलने का भी प्रयास करें.
  4. हर व्यक्ति की ज़रूरत और बॉडी क्लॉक अलग होता है, उसी के अनुसार डायट और एक्सरसाइज़ प्लान करें.
  5. अपने डायट से सैचुरेटेड फैट्स और ट्रान्स फैट्स की मात्रा कम करें साथ ही रेड मीट, डेयरी प्रोडक्ट्स, फ्राइड व बेक्ड फूड, कैंडीज़ और प्रोसेस्ड फूड से भी दुरी बनाने की कोशिश करें.
  6. ओवर ईटिंग से बचें. हमेशा भूख से थोड़ा कम ही खाएं. अक्सर अपना मनपसंद खाना देखते ही हम ज़्यादा खा लेते हैं ऐसा करने से परहेज करें.
  7. ज्यादा मात्रा में प्रोटीन्स(बीन्स, नट्स, सीड्स, टोफू, सोया प्रोडक्ट्स ) लें साथ ही कैल्शियम युक्त पदार्थ भी ज़रूर लें, जैसे- दूध, छाछ और दही. इसके अलावा हरी पत्तेदार सब्ज़ियों का प्रयोग ज्यादा से ज्यादा करना चाहिए.
  8. आप प्रतिदिन कुछ अच्छी क़िताब व साहित्य को जरुर पढ़ें. यह आपके ज्ञान को बढाएगा सात ही आपके विचार भी साकारात्मक होंगे.
  9. आप प्रतिदिन पसंदीदा अखबार और न्यूज़ चैनल जरुर देखे, ताकि आपकी जानकारी अपडेट रहे.
  10. कुछ लोगों की आदत होती है कि चाहे घर हो ऑफिस को अस्त-व्यस्त रखे और खुद के साथ दूसरों को परेशान करें.
  11. बैठते वक़्त पैरों को क्रॉस करके न बैठें, इससे रक्त संचार में रुकावट पैदा होती है.इससे आपको पीठ दर्द, कमर दर्द के अलावा वेरिकोज़ वेन्स और स्पाइडर वेन्स की समस्या होने का खतरा बना रहेगा ( बेहतर होगा आप घुटनों की बजाय एंकल से क्रॉस करके बैठें).
  12. हाई हील्स पहनने से परहेज करें(2 इंच से ज़्यादा हील्स पहनने से सेहत को नुक़सान हो सकता है).
  13. आप अपनी सोच को हमेशा सकारात्मक रखे व नकारात्मक सोचनेवालों से दुरी बना लें.
  14. कोशिस करें कि ऑफिस की परेशानी ऑफिस में ही समाप्त हो उसे घर ना लायें.
  15. लगातार एक जगह बैठकर काम ना करें, इससे आपके आंखों, कंधों और गर्दन पर प्रभाव पड़ता है.(अगर आप ऐसा करते है तो आप कुछ सेकंड तक आंखें बंद करें और गर्दन व कंधों को भी घुमाकर रिलैक्स करें).
  16. मोबाइल का प्रयोग कम से कम करने की कोशिस करें.
  17. खाना बनाने व खाना खाने से पहले साबुन से हाथ ज़रूर धोएं.
  18. खांसते व छींकते वक़्त हाथ या रुमाल ज़रूर रखें.
  19. सोने से पहले ब्रश करना न भूलें.
  20. रात को आंखों में गुलाबजल डालें या फिर रुई के फाहों को गुलाबजल में भिगोकर आंखों पर रखें. इससे आंखों की थकान मिट जाती है.
  21. घर व ऑफिस में वेंटिलेशन अच्छा होना चाहिए, दिन के समय खिड़कियां खुली रखें, ताकि ताज़ी हवा और भरपूर रोशनी रहे (एसी का प्रयोग कम से कम करें).
  22. अक्सर लोग गर्दन झुकाकर मैसेज व मोबाइल देखते हैं इससे आपके गर्दन पर ज़ोर पड़ता है और दर्द हो सकता है.
  23. अक्सर लोग कान साफ़ करने के लिए अपनी हेयर पिन, पेन या पेंसिल का इस्तेमाल करते हैं, जबकि यह ख़तरनाक हो सकता है(सबसे सुरक्षित तरीक़ा है कि छोटी उंगली पर टॉवल लपेटकर कान को साफ़ करें या फिर ईयर ड्रॉप्स का इस्तेमाल करें).
  24. वीकेंड्स पर मसाज करवाएं. इससे थकान भी मिटेगी और रक्त संचार भी बेहतर होगा.
  25. कई बार डायबिटीज़ या उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों का पता सालों तक नहीं चलता है.इसीलिए नियमित रूप से हेल्थ चेकअप भी करवाते रहें.
  26. किसी तरह की मामूली परेशानी होने पर दवाईयों का प्रयोग ना करें.
  27. छुट्टियां होने पर आउट स्टेशन जाएं, हवा-पानी बदलने से आप रिफ्रेश हो जाते हैं.
  28. ज़िंदगी के हर पल को पूरी तरह से जी लेने का जज़्बा पैदा करें.
  29. हमेशा ज़िंदगी से शिकायत करते रहने से हालात बदलेंगे नहीं, बल्कि आपके दुख ही बढ़ेंगे.
  30. कभी भी किसी दूसरे की तरक़्क़ी या ख़ुशी देखकर हीनभावना न पालें.
  31. दुनिया में ऐसे बहुत-से लोग होंगे ही जिनके पास आपसे ज़्यादा क़ामयाबी और पैसा होगा. आप अपना काम मेहनत व ईमानदारी से करते रहें और विश्वास बनें रखें.
  32. जो चीज़ें आपके नियंत्रण से बाहर हों, उसके लिए तनाव नहीं लेना चाहिए.
  33. सबको एक साथ ख़ुश रखना नामुमकिन है. अगर आपको लगता है कि आपकी लाख कोशिशों के बावजूद कुछ लोग आपको नापसंद करते हैं, तो यह उनकी समस्या है. ख़ुद को इसके लिए दोष न दें और ख़ुश रहना सीखें.
  34. सहानुभूति बटोरने की आदत से परहेज करें.
  35. किसी भी व्यक्ति के लिए एक ही धारणा या यूँ कहें कि सबको एक ही तराज़ू में न तौलें.
  36. हर बात को दिल से न लगा लें और न ही पर्सनली लें.
  37. बीती बातों से ही चिपके न रहें. हमेशा आगे की सोचें.
  38. अपने गुणों और हॉबीज़ पर ध्यान दें. अपनी पॉज़ीटिव बातों को लोगों के सामने लाएं.
  39. दूसरों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहें. इससे आपका आत्मविश्‍वास भी बढ़ेगा और मन में संतोष भी रहेगा.
  40. इस बात को भी स्वीकारें कि आप परफेक्ट नहीं हैं और आपसे भी ग़लतियां हो सकती हैं. अपनी ग़लती मानें और सॉरी कहना भी सीखें.
  41. ख़ुद को बहुत ज्ञानी साबित करने के लिए बेवजह दूसरों को सलाह न दें. सलाह देने की बजाय उनकी समस्या को सुनें, समझें और जितना हो सके, मदद करें.
  42. ज़िंदगी की भागदौड़ और तनाव में आपकी हंसी गायब न हो जाए, इसलिए खुलकर हंसे. खुलकर हंसने से फेफड़ों में लचीलापन बढ़ता है और उन्हें ताज़ी हवा मिलती है.
  43. अपनी भावनाओं और मूड पर नियंत्रण रखने का प्रयास करें. बहुत ज़्यादा ग़ुस्सा न करें, न ही बहुत दुखी या उदास रहें.
  44. रोज़ाना थोड़ा ध्यान लगाएं. इससे एकाग्रता बढ़ती है और आप रिफ्रेश महसूस करते हैं.
  45. ज़िंदगी में सभी को सब कुछ नहीं मिलता. जो नहीं मिला उसकी आस में रोने की बजाय जो मिला है उसकी कद्र करना सीखें.

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