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चैती छठ…..

सूर्य की उपासना सहित आस्था विश्वास व श्रद्धाभक्ति का महापर्व है छठ. छठ पर्व में षष्ठी माता के प्रति व्रतियों की निष्ठा व भक्ति देखते ही बनती है. यह पर्व पूर्व में सिर्फ बिहार राज्य में मनाया जाता था. परंतु अब तो झारखण्ड सहित अन्य राज्यों में भी विख्यात हो गया है.

आज चैत नवरात्री की चौथी पूजा है आज ही के दिन से भगवान् सूर्यनारायण की चार दिवसीय महापर्व  ‘छठ’ का आरम्भ हो चुका है. जिसके पहले दिन को नहाय-खाय मनाया जाता है. इस दिन को व्रती नित्य क्रिया से निवृत होकर भगवान् भास्कर को प्रणाम कर व्रती संकल्पित होकर शुद्ध भोजन (कद्दू-भात) खाते हैं. अगले दिन पंचमी को दिन भर निर्जला उपवास रखकर संध्या वेला के बाद या यूँ कहें कि, सर्यास्त के बाद भगवान् आदित्य की पूजा, भोग, हवन कर व्रती अपना उपवास तोड़कर प्रसाद ग्रहण करते हैं और सगे-सम्बन्धियों को खिलाते हैं. ऊसके बाद दो दिनों का निर्जला उपवास करते हैं. यह निर्जला उपवास षष्ठी से शरू होकर सप्तमी को समाप्त हो जाता है. व्रती भगवान् सूर्यनारायण को विशेष मन्त्र का उच्चारण करते हुए जल और दूधे से अर्घ्य देते हैं.

मंत्र:-

।ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:।।

चैती छठ 2022..

05 अप्रैल (मगंलवार )– नहाय खाय

06 अप्रैल ( बुधवार )– खरना

07 अप्रैल ( गुरुवार )– अस्ताचलगामी सूर्य अर्घ्य

08 अप्रैल ( शुक्रवार ) — उदीयमान सूर्य अर्घ्य

 

सतेन्द्र सिंह (धनवाद).

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