गुणों का खजाना है भिण्डी… - Gyan Sagar Times
Health

गुणों का खजाना है भिण्डी…

पूरी दुनिया में अगर खाने की बात हो तो भारतीय व्यंजन का अपना अलग स्वाद ही होता है चुकिं, यहाँ खाने की कई किस्मे हैं. घर के बड़े बुजुर्ग हमेशा से ही हरी सब्जियों के खाने पर जोड़ देते हैं,पर आज के बच्चे  या युवा वर्ग, केक, पेस्ट्री, पिज्जा….. की ओर ही अपना ध्यान लगाये रखते हैं. शायद आप नहीं जानते हैं कि “सब्जियां” आयुर्वेदिक औष्धी से कम नहीं है. अगर हम सभी अपने आप को तंदरुस्त रखना चाहते हैं तो प्रतिदिन अपने भोजन में हरी सब्जी जरुर खाएं. आज बात करते है एक ऐसी ही सब्जी की जो देखने में हरी और उसका आकर अंगुली के समान होता है. जी हाँ आपने सही पहचाना… बिहार में इसे भिण्डी, बनारस में राम तरोई, छतीसगढ़ में रामकलीय, मराठी में भेंडे,गुजराती में भिंडा और बंगाल में फलशाक कहते है. इसे अंग्रेजी में लेडी फिंगर और इसका वैज्ञानिक नाम एबिलमोशस एस्कलेंटस(Abelmoschus esculentus).

वास्तव में भिण्डी गुणों का खजाना है, इसमें मुख्य रुप से भिंडी में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, खनिज लवणों जैसे कैल्शियम, फास्फोरस के अतिरिक्त विटामिन ‘ए’, बी, ‘सी’, थाईमीन एवं रिबोफ्लेविन भी पाया जाता है.  भिंडी के फल में आयोडीन की मात्रा अधिक होती है, साथ ही भरपूर मात्रा में फाइबर और मैग्‍नीशियम भी होता है. शायद, आप नहीं जानते होंगें कि भिण्डी की जड से लेकर फल तक हमारे शरीर के लिए अमृत के समान औषधि है. आप इसे किसी भी तरह से इसका प्रयोग कर सकते हैं चाहे तो आप इसे सब्‍जी, भुंजिया, रायता, सूप और कढ़ी बनाकर प्रयोग की जा सकती है. भिण्डी से निकलने वाला रेशेदार चिकना पदार्थ कई प्रकार के बीमारियों को ठीक करने में मदद करता है, इसे खाने से भूख बढती है, इसलिए भिण्डी की सब्जी को पौष्टिक सब्‍जी मानी जाती है.

बताते चले कि, मोटापे से परेशान लोगों के लिए भिण्डी वरदान से कम नहीं होती है. अगर आप खाना खाने से आधा घंटा पहले किसी भी रूप में भिण्डी कम से कम 250 ग्राम कहा लें, उसके आधे घंटे बाद आप खाना खाए. आपको महसूस होगा कि, आपकी चर्बी धीरे-धीरे समाप्त हो रही है. इसे खाने से आंतों में मौजूद विषैले तत्‍वों को बाहर निकालती है और आपमें इमुनिटी पावर बढती है, साथ ही कोलन कैंसर का खतरा कम हो जाता है. भिंडी में मौजूद फॉलिक एसिड भ्रूण के विकास में लाभकारी माना जाता है. इसमें मौजूद “यूगेनॉल”( एक तरह का फाइबर) जो खून में मौजूद शर्करा के स्‍तर को नियंत्रित करने में मदद करता है, साथ ही यह अंडकोशों में शर्करा के अवशोषण की प्रक्रिया को धीमा कर डायबिटीज को दूर रखने अथवा नियंत्रित करने का काम करता है.

ज्ञात है कि, भिण्डी में फाइबर की मात्र भी पर्याप्त रूप में मौजूद होती है, जो हमारी पाचन क्रिया के लिए बहुत ही फायेदेमंद होती है. भिण्डी में मिलने वाला फाइबर घुलनशील फाइबर होता है, जिससे पाचन क्रिया ठीक हो जाती है और कब्ज को भी दूर करने में मदद करती है. इसमें मौजूद आयरन हमारे शरीर के लिए काफी लाभकारी होता है चूँकि, खून में मौजूद हीमोग्‍लोबिन के निर्माण में मदद करता है. इसमें मौजूद विटामिन रक्‍त स्राव को रोकने में मदद करता है. भिण्डी आपके बालों के लिए आयुर्वेदिक औषधि है, इसके प्रयोग से आप यह बालों की रूसी को दूर कर सकते हैं, और आप अपने बाल लंबे समय तक काला और घना बनाये रख सकते हैं. भिण्डी की जड़ व तना का जूस पीने से पीलिया(जोंड्रिस) की बीमारी ठीक हो जाती है. भिण्डी को क्या कहें… ये तो गुणों का खजाना है. आप इसे प्रयोग कर के तो देखें आपका दिल बाग़-बाग़ हो जायेगा.

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!