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तुलसी…

तुलसी का पौधा प्रायः हर घर के आंगन में मिल जाता है.घर कि महिलाये इनकी पूजा-अर्चना करती है.तुलसी में एंटीबायोटिक गुण पाया जाता है. यदि आप पर कोई भी मुसीबत आने वाली है,तो या पौधा सूखने  लगता है.अगर आप पर या आपके परिवार पर कोई मुसीबत आने वाली होती है,तो उसका असर सबसे पहले तुलसी के पौधे पर होता है, आप तुलसी के पौधे को कितनी भी अच्छे तरह से देखभाल करे,लेकिन यह पौधा धीरे-धीरे सूखने लगता है. धर्मग्रन्थो के अनुसार जिस घर में मुसीबत आने वाली होती है,उस घर से सबसे पहले लक्ष्मी यानि तुलसी चली जाती है…..या यूँ कहे जहां दरिद्रता,अशांति व क्लेश होता है, वहां लक्ष्मी का निवास नही होता है.ज्योतिष के अनुसार….. ऐसा बुध के कारण होता है. चुकिं बुध का प्रभाव हरे रंग पर होता है,यह एक ऐसा ग्रह है जो जातको के अन्य ग्रहों के भी अच्छे-बुरे प्रभाव को जातक तक पहुंचता है. बुध के प्रभाव से पेड़-पौधे में फल-फूल भी लगते है.कहा जाता है कि जिस घर में तुलसी का पौधा हो,उस घर के सभी वास्तु दोष भी  दूर हो जाते है व तुलसी कि उपस्थिति एक वैध के समान होती है.हिन्दू धर्म के अनुसार तुलसी को माता का दर्जा भी प्राप्त है,आम आवाम प्रतिदिन इनकी पूजा आराधना भी करते है.आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि इसकी हवा व स्पर्श एवं इसके उपयोग से दीर्घ आयु व स्वास्थ्य लाभ तथा वातावरण को शुद्ध करने में सक्षम होता है.इसका बोटीनिकल नाम ओकिमुम सन्क्टुम(OCIMUM SANCTUM)है. कई प्रकार के तुलसी होते हैं जैसे श्याम तुलसी, लक्ष्मी तुलसी, राम तुलसी, भू तुलसी ,नील तुलसी, श्वेत तुलसी, रक्त तुलसी, वन तुलसी एवं ज्ञान तुलसी.इन सबके गुण अलग-अलग होते हैं,जो शरीर में नाक,कान,वायु,कफ, ज्वर,खांसी व दिल की बीमारियों पर खास प्रभाव डालती है. तुलसी पौधे के पत्ते, छाल,जड़ व तने का उपयोग – पूजा-पाठ से लेकर ओषधि तक किया जाता है.प्रतिदिन चार तुलसी की पत्तियों को काली पेट खाने से मधुमेह, रक्तविकार, वात, एवं पित्त दोष दूर होते है.कहा जाता है कि प्रतिदिन तुलसी के पेड़ के पास बैठने से अस्थमा के रोगी को फयदा मिलता है.

अत्यंत उपयोगी एवं महत्वपूर्ण है तुलसी. इसके सभी भाग अलौकिक शक्ति एवं तत्वों से परिपूर्ण मानें गए है.इसके पौधे से निकलने वाली सुगंध वातावरण को शुद्ध रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.आयुर्वेद चिकित्सा में तुलसी का बहुत महत्वपूर्ण स्थान रहा है.तुलसी का प्रयोग सदियों से ओषधिय रूप में प्रयोग होता चला आ रहा है.

तुलसी का प्रयोग खांसी, विष, श्वास, कफ, वात, हिचकी और भोज्य पदार्थो कि दुर्गन्ध को दूर करता है. इसके अलावा तुलसी बलवर्धक भी होती है, सिरदर्द, स्मरण शक्ति , आँखों में जलन ,मुंह के छाले, दमा, ज्वर, पेशाब में जलन व हृदय संबंधी बीमारियों को दूर करने में भी सहायक होता है.असाध्य रोगों को भी जड़ से खत्म करने कि अद्भुत क्षमता होती है. अस्थमा कि सम्भावना को कम करने के लिए या उस पर नियन्त्रण पाने के लिए सबसे जरूरी है धुम्रपान का त्याग करना. धुम्रपान करने वाले व्यक्ति के स्वास्थ को बुरी तरह से प्रभावित करता है बल्कि उसके आसपास रहने वाले व्यक्ति के भी स्वास्थ को बुरी तरह से प्रभावित करता है. जिस खाद्य या पेय पदार्थ से आपको एलर्जी है उसका सेवन न करें,साथ ही पालतू पशुओं से भी दुरी बनाएं रखें.

तुलसी के प्रयोग:-       

  • वास्तु दोष को दूर करने के लिए तुलसी के पौधे को अग्नि कोण( दक्षिन-पूर्व से लेकर उत्तर-पश्चिम) में लगा सकते है.
  • तुलसी का गमला रसोई के पास रखने से पारिवारिक कलह दूर होते है.
  • पूर्व दिशा में खिड़की के पास रखने से पुत्र यदि जिद्दी हो तो उसका हठ दूर होता है.यदि कोई सन्तान अपनी मर्यादा से बाहर है तो पूर्व दिशा में रखे तुलसी के पौधे से तीन पत्ते सन्तान को खिलाने से आज्ञानुसार व्यवहार करने लगती है.
  • कन्या के विवाह में विलम्ब हो रहा है तो,अगिन कोण में तुलसी के पौधे को नित्य जल अर्पण कर प्रदक्षिणा करने विवाह जल्दी होती है एवं सारी बाधाए दूर होती है.
  • यदि कारोबार ठीक नही चल रहा हो तो,दक्षिन- पश्चिम में स्थित तुलसी के पौधे में हर शुक्रवार को सुबह कच्चा दूध अर्पण कर व मिठाई का भोग लगा कर किसी सुहागिन स्त्री को मिठाई देने से व्यवसाय में सफलता मिलती है.
  • नौकरी में यदि अपने उच्चाधिकारियों से परेशान हों,तो ऑफिस के खाली जमीन या किसी गमले में सोमवार को तुलसी के सोलह बीज को सफेद कपड़े में बांध कर मिटटी में दबा दे.सम्मान में वृद्धि होगी.
  • घर कि महिलाएं नित्य पंचामृत बना कर शालिग्रामजी को अभिषेक करने से वास्तु दोष समाप्त हो जाता है.

 औषधिय प्रयोग :-

  • तुलसी के पत्तो को काली मिर्च,सौठ व चीनी के साथ पानी में उबालकर पीने से खांसी, जुकाम, फ्लू व बुखार में फयदा मिलता है.
  • पेट में दर्द होने पर तुलसी के रस व अदरक का रस समान मात्रा में लेने से राहत मिलती है,साथ ही पाचन क्रिया में भी सुधार होता है.
  • श्वेत तुलसी बच्चों के कफ विकार, सर्दी, खांसी में लाभदायक होता है.
  • तुलसी के पत्तो को काली मिर्च के साथ लेने से कफ विकार दूर होता है.
  • गले में सुजन व गले में खराश होने पर तुलसी के बीजो को सक्कर के साथ लेने पर लाभ मिलता है.
  • तुलसी के पत्तियों का रस गुनगुना कर कान में डालने से कान के दर्द दूर होते है.
  • प्रतिदिन तुलसी के पत्तियों को खाने से खून साफ होता है.
  • चर्म रोग होने पर तुलसी के पत्तियों का रस में नीबूं के रस में मिलाकर लगाने से फयदा होता है.
  • तुलसी के पत्तो का रस पीने से शरीर में ताकत व स्मरण शक्ति बढ़ता है.
  • प्रसव के समय महिलाओ को तुलसी का रस पीने से प्रसव पीड़ा कम होती है.
  • स्त्रियों को अत्यधिक रक्तस्राव होने पर तुलसी के जड़ का चूर्ण पान के साथ खिलाने पर रक्तस्राव बंद हो जाता है.
  • जहरीले कीड़े या सांप के काटने पर तुलसी की जड़ को पीसकर कटे गए स्थान पर लगाने से दर्द में लाभ मिलता है.
  • तुलसी के पत्तो का रस व निम्बू का रस समान मात्रा में मिलाकर २४ घंटे धुप में रखे. इसके नियमित प्रयोग से सफेद दाग, कील मुहांसे, झाइया व काले दाग समाप्त हो जाते हैं व चेहरा बेदाग और सुंदर हो जाता है.
  • तुलसी के बीजो का सेवन दूध के साथ करने से पुरुषो में बल व वीर्यवर्धक होता है.
  • तुलसी का प्रयोग करने से मलेरिया बुखार के प्रकोप को कम करता है.
  • तुलसी का शरबत या अबलेह बनाकर पीने से मन शांत रहता है.
  • फोड़े,फुंसी होने पर तुलसी के पत्तो का लेप लाभदायक होता है.
  • तुलसी की मंजरी और आज्वाईन देने से चेचक का प्रभाव कम होता है.
  • आलस्य निराशा, कफ, सिरदर्द ,जुकाम, खांसी, शरीर कि ऐठन व अकडन को दूर करने के लिए तुलसी कि चाय का सेवन करना लाभदायक होता है.
  • तुलसी के पत्ते को दूध में मिलाकर पीने से कैंसर सेल्स खत्म होती है.जिससे कैंसर कि आशंका कम होती है.
  • प्रतिदिन सुबह खली पेट में तुलसी वाला दूध पीने से कोलेस्ट्रोल कम होता है.इससे दिल कि बीमारी का खतरा कम होता है.
  • किडनी में स्टोन होने पर आप प्रतिदिन सुबह खाली पेट तुलसी वाला दूध पीने से किडनी में मौजूद स्टोन को गलाकर बाहर निकलने में मदद करता है.
  • प्रतिदिन तुलसी वाला दूध पीने से इम्युनिटी पावर बढ़ती है और वायरल इन्फेक्शन होने कि आशंका कम होती है.
  • तुलसी में एंटीबैक्टेरियल व एंटीफंगल गुण पाए जाते है.जिससे स्किन कि प्रॉब्लम को दूर करता है.

                       

डा० बिनोद उपाध्याय,

ध्रुब आयुर्वेदिक केंद्र, मुन्ना चौक,  

तिलकनगर,कंकरबाग,पटना.

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