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समझ-समझ का फेर…

आमतौर पर हम सभी विदेशों की ओर ज्यादा देखते हैं और बातें भी करते हैं. अक्सर समाचारों में भी विदेशी समाचारों में (आतंकबाद व राजनीति) की खबरों से रूबरू होते रहते है.

काश… हम सभी अपने देश में हो रही गतिविधियों को नजरअंदाज करते हैं. हमारे देश में भी चीन की तरह सोच रखनेवाले नि:स्वार्थ देशभक्त भी रहते हैं. ऐसी सोच रखनेवाले ये लोग विशेष प्रजाति के होतें है जिन पर सरकार जी-जान से मेहरबान होती है.

खैर-छोडिये इन सभी बातों को राज्य बिहार के मुखिया ग्रामीण परिवेश से आते हैं और गाँव-घर की समस्याओं से रूबरू हैं. अपने शासन काल में जमीनी विवाद को निपटारा करने के लिए कई कानून बनाए. लेकिन, जमीनी विवाद घटने के वजाय बढ़ ही रही है.

ऐसी प्रजाति के लोग आधुनिक काल में तमाम तरह की सरकारी सुविधाओं का प्रयोग करते हुये सरकारी (गरमजरुआ) जमीनों को कब्जा कर लिए. साथ ही अब गाँव में रहने वाले कमजोर लोगों के जमीन को कब्जा कर रहें है. एक तरफ मुख्यमंत्री जमीनी विवाद खत्म करने पर जोड़ दे रहें हैं वहीँ, एक खास प्रजाति के लोग जमीनी विवाद को बढ़ा रहें है.

ज्ञात हैं कि, राज्य बिहार में 38 जिलें हैं और इन जिलों में जमीनी विवाद को कम करने के लिए सर्किल ओफ्फिसर को जिम्मेदारी दी गई है साथ ही ‘अमिन’ भी दिया गया है. 38 जिलों के सर्किल ऑफिसर के पास जमीन नापी कराने के हजारों आवेदन पड़े हैं लेकिन, जमीन नापी ना हो उसके लिए तमाम तरह के बहाने बनाकर साल दर साल टाल रहें हैं और जमीनी विवाद वैसी की वैसी ही है.

सरकारी सेवक राज्य के मुख्यमंत्री के आदेशों की धज्जियां उड़ा रहें है और एक खास प्रजाति के लोगों से हैरान-परेशान लोग सिसक- सिसक कर जीवन रूपी आनंद के भवसागर में डूबते चले जा रहें हैं. राजा और सरकारी सेवक मस्त हैं वही प्रजा बेबस और पस्त है.

ज्ञात है कि, बांकीपुर अंचल के सर्किल ऑफिसर पिछले छह महीनों से अपने ओफ्फिस में नहीं बैठे है. साहब के इंतजार में लोगों के आँखों पर मोतियाबिंद का असर होने लगा है पता नहीं कब साहेब आयेंगे?

राज्य के मुख्यमंत्री टेक्निकल ग्रेजुएट है लेकिन, राज्य में जिस तरह से विकास का काम चल रहा है उससे दादाजी की कही बातें स्मरण होती है. वो अक्सर कहा करते थे कि “ मेहनत से कमाये गए धन को सोच-समझकर खर्च करते है लेकिन, दूसरों से मिले धन को बिना सोचे समझे खर्च करते हैं”. मुझे ये बात समझ में नहीं आती थी लेकिन, जिस तरह से राज्य का विकास हो रहा है उससे दादाजी की बात पूर्णत: समझ में आ रही है.

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