Dhram Sansar

सत्संग-02…

वालव्याससुमनजीमहाराज

तुम्हरो मंत्र विभीषण माना, लंकेस्वर भए सब जग जाना ॥

महाराजजी श्लोक का अर्थ बताते है कि, हे पवन सुत आपके उपदेश का पालन विभिषणजी ने  किया और लंका के राजा बने ये संसार जानता है.

जुग सहस्त्र जोजन पर भानू, लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥

महाराजजी श्लोक का अर्थ बताते है कि, हे महावीर आप बाल्यकाल में जो सूर्य सहस्त्र योजन (दुरी) स्थित है और आपने एक मीठा फल समझ कर निगल लिया.

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहि, जलधि लांघि गये अचरज नाहीं॥

महाराजजी श्लोक का अर्थ बताते है कि, हे पवन कुमार आपने श्रीरामचन्द्रजी की अंगूठी मुँह मे रखकर समुद्र को लांघ लिया, इसमें कोई आश्चर्य नही है.

दुर्गम काज जगत के जेते, सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥

महाराजजी श्लोक का अर्थ बताते है कि, हे केसरी नंदन संसार मे जितने भी कठिन से कठिन काम हो, वो आपकी कृपा से सहज हो जाते है.

राम दुआरे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥

महाराजजी श्लोक का अर्थ बताते है कि, हे महावीर आप कृपासिंधु श्रीरामचन्द्रजी के द्वार के रखवाले है, आपकी आज्ञा के बिना किसीको प्रवेश नहीं मिलता. अत; हे पवन कुमार  आपकी प्रसन्नता के बिना श्रीराम कृपा दुर्लभ है.

सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहू.को डरना॥

महाराजजी श्लोक का अर्थ बताते है कि, हे पवन सुत जो भी आपकी शरण मे आता है और आप उसके रक्षक हो जाते हैं तो फिर किसी का डर नही रहता है.

आपन तेज सम्हारो आपै,तीनों लोक हाँक तें काँपै॥

महाराजजी श्लोक का अर्थ बताते है कि, हे पवन सुत आपके अलावा आपके वेग को कोई नही रोक सकता है और आपकी गर्जना से तीनों लोक काँप जाते है.

भूत पिशाच निकट नहिं आवै, महावीर जब नाम सुनावै॥

महाराजजी श्लोक का अर्थ बताते है कि, हे महावीर जब भी आपका नाम बोला या सुनाया जाता है तब वहाँ भूत, पिशाच भी पास नही आता है.

नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा॥

महाराजजी श्लोक का अर्थ बताते है कि, हे पवन सुत जो आपका निरंतर जाप करता उसके सभी तरह के पीड़ा (रोग व व्याधि) दूर हो जाते हैं.

संकट तें हनुमान छुड़ावै, मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥

महाराजजी श्लोक का अर्थ बताते है कि हे महावीर जो आपका निरंतर जाप करता है और विचार, कर्म और बोलने में या जिनका ध्यान आप में  रहता है, उनको आप सभी प्रकार के संकटो मुक्त (दुर) करते हैं.

सब पर राम तपस्वी राजा, तिनके काज सकल तुम साजा॥

महाराजजी श्लोक का अर्थ बताते है कि हे केसरी नंदन तपस्वी राजा श्रीरामचन्द्रजी से श्रेष्ठ कोई नहीं है और आपने उनके सभी कार्यो को सहज में कर दिया.

और मनोरथ जो कोइ लावै, सोई अमित जीवन फल पावै॥

महाराजजी श्लोक का अर्थ बताते है कि हे पवन सुत जिस पर आपकी कृपा दृष्टि हो, और वो कोई भी अभिलाषा करे तो उसे ऐसा फल मिलता है जिसकी जीवन में कोई सीमा नही होती है.

चारों जुग परताप तुम्हारा, है परसिद्ध जगत उजियारा॥

महाराजजी श्लोक का अर्थ बताते है कि हे महावीर चारो युगों (सतयुग, त्रेता, द्वापर तथा कलियुग) में  आपका यश फैला हुआ है और जगत में आपकी कीर्ति सर्वत्र प्रकाशमान है.

शेष अगले अंक में…  

वालव्याससुमनजीमहाराज, महात्मा भवन,

श्री रामजानकी मंदिर, राम कोट, अयोध्या. 8544241710.

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