Health

संतरा या नारंगी…

यूँ तो हम सभी जानते ही हैं कि, फल खाना सेहत के लिए फायदेमंद होता है. विटामिन सी का सबसे बड़ा स्रोत संतरा फल नींबू, नारंगी और मौसमी की जाति का फल है. नीबू वर्गीय फल एक सदाबहार, उप-उष्णकटिबंधीय समूह से संबंधित होता है. नारंगी के रंग का दिखने वाला संतरा ठंडा, तन और मन को प्रसन्नता देने वाला फल माना जाता है, यह खाने जितना स्‍वादिष्‍ट होता है उतना ही स्‍वास्‍थ्‍य के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. मनुष्य को जितनी विटामिन ‘सी’ की आवश्यकता होती है, वह एक संतरें को प्रतिदिन खाते रहने से पूरी हो जाती है. संतरा ऐसा फल है जिसका रस या फिर संतरे के छिलके सब मानव के लिए बहुत लाभकारी होते है.

अपने ग़ुणों और स्वाद से भरपूर संतरा हर किसी के लिए बहुत ही पसंदीदा फल है चुकीं, संतरे में विटामिन सी के अलावा विटामिन ए, विटामिन बी, फॉस्फोरस, कैल्शियम, प्रोटीन और ग्लूकोज़ भी पाया जाता है. डा० बिमलेश कुमार के अनुसार, संतरे में विटामिन सी, पोटैशियम और फोलिक एसिड होती है जो शरीर को स्वस्थ रहता है, चुस्ती-फुर्ती बढ़ती है, त्वचा में निखार आता है और सौंदर्य में वृद्धि होती है. संतरा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें उपस्थित फ्रुक्टोज, डेक्स्ट्रोज, खनिज एवं विटामिन, शरीर में पहुंचते ही ऊर्जा देना प्रारंभ कर देते हैं. एक गिलास संतरे का रस तन-मन को शीतल प्रदान कर थकान और तनाव को दूर करता है, साथ ही हृदय तथा मस्तिष्क को नई शक्ति व ताजगी से भर देता है.

संतरे का प्रयोग करने से जुकाम में राहत पहुँचाता है, वहीं सूखी खाँसी में भी फायदा होता है. यह कफ को पतला करके बाहर निकालने में मदद करता है. पेचिश की शिकायत होने पर संतरे के रस में बकरी का दूध मिलाकर लेने से काफी फायदा होता है, साथ ही बवासीर की बीमारी में लाभ मिलता है. रक्तस्राव को रोकने की अद्भुत क्षमता होती है संतरे में. तेज बुखार में संतरे के रस का प्रयोग करने से बुखार कम हो जाता है. संतरे में चुकीं साइट्रिक अम्ल पाया जाता है जो मूत्र रोग और गुर्दा रोग को दूर करने में मदद करता है. दिल के मरीज को संतरे के रस में शहद मिलाकर देने से आश्चर्यजनक लाभ मिलता है. संतरा खाने से दाँतों और मसूड़ों के रोग भी दूर होते हैं, साथ ही पेट में गैस, अपच, जोड़ों का दर्द, उच्च रक्तचाप, गठिया और बेरी-बेरी रोग में भी संतरे का सेवन करना लाभकारी होता है.

गर्भवती महिलाओं तथा लीवर से सम्बन्धित बिमारियों में संतरा अत्यंत ही लाभकारी होता है, इसके प्रयोग से महिलाओं को प्रसव के समय होने वाली परेशानियों से मुक्ति मिलती है, वहीं प्रसव पीड़ा भी कम होती है, साथ ही बच्चा स्वस्थ व तंदरुस्त पैदा होता है. छोटे बच्चों के लिए तो संतरे का रस अमृततुल्य होता है. बच्चों को स्वस्थ व तंदरुस्त बनाने के लिए दूध में चौथाई भाग मीठे संतरे का रस मिलाकर पिलाना चाहिए जो कि, एक टॉनिक का काम करता है. जब बच्चों को दाँत निकलते हैं, तब उन्हें उल्टी होती है और हरे-पीले दस्त लगते हैं, उस समय संतरे का रस पिलाने से पाचन शक्ति बढ़ जाती है और बेचैनी दूर होती है. संतरे के सूखे छिलकों का महीन चूर्ण गुलाब जल या कच्चे दूध में मिलाकर पीसकर आधे घंटे तक लेप लगाने से कुछ ही दिनों में चेहरा साफ, सुंदर और आकर्षक हो जाता है, साथ ही कील मुँहासे-झाइयों और साँवलापन भी दूर होता है. संतरे के ताजे फूल को पीसकर उसका रस सिर में लगाने से बालों की चमक बढ़ती है, बाल लम्बे होते हैं, और बालों का कालापन भी बढ़ता है.

 

डा० बिमलेश कुमार,(खगौल),पटना.

 

Related Articles

Check Also
Close
Back to top button