व्यक्तित्त्व(10)…

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डॉ० गोपी चन्द भार्गव 'गाँधी स्मारक निधि' के प्रथम अध्यक्ष, गाँधीवादी नेता, स्वतंत्रता सेनानी और संयुक्त पंजाब के प्रथम मुख्यमंत्री थे वहीं, साहिर लुधियानवी बॉलीवुड फ़िल्मों के गीतकार थे जिनके गीतों से उनका व्यक्तित्व झलकता है.फोटो:-गूगल

डॉ० गोपी चन्द भार्गव:-

गोपी चन्द भार्गव का जन्म 08 मार्च 1889 को तत्कालीन पंजाब के हिसार ज़िले में हुआ था. गोपी चन्द ‘गाँधी स्मारक निधि’ के प्रथम अध्यक्ष, गाँधीवादी नेता, स्वतंत्रता सेनानी और संयुक्त पंजाब के प्रथम मुख्यमंत्री थे. गोपी चन्द का सम्पूर्ण जीवन एक प्रेरणा स्त्रोत है. गोपी चन्द ने लाहौर मेडिकल कॉलेज से एम.बी.बी.एस. की परीक्षा पास कर वर्ष 1913 से चिकित्सा का  कार्य शुरू किया था. लेकिन वर्ष 1919 में हुए जलियाँवाला बाग़ हत्याकाण्ड की घटना के कारण वे राजनीति में आ गए.

डॉ० भार्गव लाला लाजपत राय, पंडित मदन मोहन मालवीय के विचारों से गोपी चन्द भार्गव बहुत प्रभावित थे लेकिन वो महात्मा गाँधी से विशेष तौर पर प्रभावित थे. डॉ० भार्गव ने कई आंदोलनों में भाग लिया और जेल भी गये. कांग्रेस संगठन में वो अनेक पदों पर कार्य करते हुये वर्ष 1946 में गोपी चन्द भार्गव पंजाब विधान सभा के सदस्य चुने गए और सयुंक्त पंजाब के प्रथम मुख्यमंत्री बने. डॉ० भार्गव ने गाँधी जी की रचनात्मक प्रवृत्तियों को आगे बढ़ाने के लिये कई कदम उठाए.उन्होंने विभाजन से उत्पन्न उत्तेजना और कटुता को दूर करने के लिये कई महत्वपुर कदम उठाए.

विश्वनाथ दास:-

विश्वनाथ दास का जन्म 08 मार्च 1889 को गंजम ज़िला, उड़ीसा में हुआ था. इनकी प्रारम्भिक शिक्षा कटक के रैवेनषा कॉलेज में हुई तथा कोलकाता के लॉ कॉलेज से इन्होंने वकालत की डिग्री प्राप्त की. वर्ष 1919-21 के मध्य उन्होंने गंजम ज़िले में ही वकालत का कार्य किया. उन्होंने वर्ष 1920  में मद्रास प्रेसीडेन्सी में किसान संघ की स्थापना की थी.

विश्वनाथ दास वर्ष 1920-29 के बीच मद्रास कॉन्सिल के सदस्य भी रहे और वर्ष 1929 में उन्होंने नमक आन्दोलन के दौरान सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वे कई बार जेल गये. विश्वनाथ दास वर्ष 1936 में उड़ीसा के विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए. वर्ष 1937-39 तक वे उड़ीसा के मुख्यमंत्री रहे और युद्ध के मुद्दे पर उन्होंने मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया. वर्ष 1947-51 तक वे संविधान सभा के सदस्य रहे. कई वर्षों तक वे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य भी रहे.

विश्वनाथ दास तीन बार उत्कल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष निर्वाचित हुए. वर्ष 1962 में    उन्हें उत्तर प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया और वे इस पद पर वर्ष 1967 तक इस पद पर कार्य किया.

साहिर लुधियानवी:-

साहिर लुधियानवी का जन्म 08 मार्च 1921 में लुधियाना के एक जागीरदार घराने में हुआ था. इनका वास्तविक नाम अब्दुल हयी साहिर था. इनके पिता बहुत धनी थे लेकिन माता-पिता में अलगाव होने के कारण उन्हें माता के साथ रहना पड़ा और गरीबी में जीवन यापन गुज़रना पड़ा. इनकी की शिक्षा लुधियाना के खा़लसा हाई स्कूल में हुई. वर्ष 1939 में गवर्मेंट कालेज के विद्यार्थी थे तब उन्होंने प्रेम विवाह अमृता प्रीतम से किया जो की असफल रहा.

साहिर कॉलेज के दिनों से अपने शरों के लिये काफी मशहूर थे. उन्होंने जीविका चलाने के लिये तरह-तरह की छोटी-मोटी नौकरियाँ की. वर्ष 1943 में वो लाहौर आ गये और उन्होंने पहली कविता संग्रह तल्खियाँ छपवाई जिसके बाद से उन्हें ख्याति प्राप्त होने लगी.वर्ष 1945 में साहिर ने उर्दू पत्र अदब-ए-लतीफ़ और शाहकार (लाहौर) के सम्पादक बने. उसके बाद वो द्वैमासिक पत्रिका सवेरा के भी सम्पादक बने और इस पत्रिका में उनकी किसी रचना को सरकार के विरुद्ध समझे जाने के कारण पाकिस्तान सरकार ने उनके खिलाफ वारंट जारी कर दिया.

साहिर वर्ष 1949 को दिल्ली आ गये और कुछ दिनों बाद मुम्बई आकर उर्दू पत्रिका शाहराह और प्रीतलड़ी के सम्पादक बने. वर्ष 1949 में ही फिल्म आजादी की राह के लिये उन्होंने पहली बार गीत लिखे किन्तु प्रसिद्धि उन्हें फिल्म नौजवान, जिसके संगीतकार सचिनदेव बर्मन थे, के लिये लिखे गीतों से मिली. फिल्म नौजवान का गाना ठंडी हवायें लहरा के आयें ….. बहुत लोकप्रिय हुआ. बाद में साहिर लुधियानवी ने कई फिल्मों के लिये लोकप्रिय गीत लिखे.

साहिर लुधियानवी ने बॉलीवुड फ़िल्मों के लिये जो गीत लिखे उनमें उनका व्यक्तित्व झलकता है. उनके गीतों में कुछ इस कदर संजीदगी झलकती है जैसे ये उनके जीवन से जुड़ी हों. साहिर ही ऐसे और पहले गीतकार थे जिन्हें अपने गानों के लिए रॉयल्टी मिलती थी. शुरूआती दौर में आकाशवाणी पर गानों के प्रसारण के समय सिर्फ गायक तथा संगीतकार का नाम ही उद्घोषित होता था लेकिन, साहिर के प्रयासों के बाद ही संभव हुआ और आकाशवाणी पर गानों के प्रसारण के समय गायक तथा संगीतकार के अलावा गीतकार का भी नाम उल्लेख किया जाने लगा.