व्यक्तित्त्व(09)…

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मोरारजी देसाई देश के छठवें प्रधानमन्त्री बने वहीं वर्षा उसगांवकर 90 दशक की खूबसूरत अभिनेत्री की एक्टिंग का हर कोई दीवाना था.फोटो:-गूगल

मोरारजी देसाई:-

मोरारजी देसाई का जन्म 29 फ़रवरी 1896 को भदेली गाँव, जो अब गुजरात के बुलसर जिले के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था. उनके पिता का नाम रणछोड़जी देसाई भावनगर (सौराष्ट्र) में एक स्कूल शिक्षक थे. उनके पिता बेहद ही अनुशासन प्रिय थे. बचपन से ही युवा मोरारजी ने अपने पिता से सभी परिस्थितियों में कड़ी मेहनत करने एवं सच्चाई के मार्ग पर चलने की सीख ली. मोरारजी ने सेंट बुसर हाई स्कूल से शिक्षा प्राप्त की एवं अपनी मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की. तत्कालीन बंबई प्रांत के विल्सन सिविल सेवा से 1918 में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने बाद उन्होंने बारह वर्षों तक डिप्टी कलेक्टर के रूप में भी कार्य किया.

वर्ष 1930 में जब भारत में महात्मा गाँधी द्वारा शुरू किया था. मोरारजी ने भी सरकारी नौकरी छोड़कर आजादी की लड़ाई में भाग लेने का निश्चय किया. यह एक कठिन निर्णय था लेकिन  देसाई ने महसूस किया कि एक तरफ देश की आजादी का सवाल था और दूसरी तरफ  परिवार से संबंधित समस्याएं… उन्होंने सोचा पहले देश पहले आता है. देसाई को स्वतंत्रता संग्राम के दौरान तीन बार जेल जाना पड़ा. महात्मा गांधी द्वारा शुरू किये गए व्यक्तिगत सत्याग्रह में देसाई को गिरफ्तार कर लिया गया था. वे वर्ष 1931 में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के सदस्य बने और वर्ष 1937 तक गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव रहे. अक्टूबर वर्ष 1941 उन्हें छोड़ दिया गया एवं अगस्त वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया गया. इस बार उन्हें वर्ष 1945 में छोड़ दिया गया. वर्ष 1946 में राज्य विधानसभा के चुनावों के बाद वे मुंबई में गृह एवं राजस्व मंत्री बने.

अपने कार्यकाल के दौरान देसाई ने ‘हलवाहा के लिए भूमि’ प्रस्ताव के लिए सुरक्षा काश्तकारी अधिकार प्रदान करके भू-राजस्व में कई दूरगामी सुधार किये. पुलिस प्रशासन के क्षेत्र में उन्होंने लोगों और पुलिस के बीच की दूरी कम की एवं पुलिस प्रशासन को लोगों की जरूरतों के प्रति अधिक जवाबदेह बनाया ताकि वे लोगों के जीवन एवं संपत्ति को सुरक्षा प्रदान कर सकें. वर्ष 1952 में वे बंबई के भी मुख्यमंत्री बने.

राज्यों को पुनर्गठित करने के बाद देसाई 14 नवंबर 1956 को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री के रूप में केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हो गए. बाद में उन्होंने 22 मार्च 1958 से वित्त मंत्रालय का भी कार्यभार संभाला. देसाई ने आर्थिक योजना एवं वित्तीय प्रशासन से संबंधित मामलों पर अपनी सोच को कार्यान्वित किया. रक्षा एवं विकास संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्होंने राजस्व को अधिक बढ़ाया, अपव्यय को कम किया एवं प्रशासन पर होने वाले सरकारी खर्च में मितव्ययिता को बढ़ावा दिया.

वर्ष 1963 में उन्होंने कामराज योजना के अंतर्गत केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया. पंडित नेहरू के बाद प्रधानमंत्री बने लाल बहादुर शास्त्री ने प्रशासनिक प्रणाली के पुनर्गठन के लिए उन्हें प्रशासनिक सुधार आयोग का अध्यक्ष बनने के लिए मनाया. लोक जीवन से संबंधित अपने लंबे एवं अपार अनुभव का उपयोग करते हुए उन्होंने इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया.

वर्ष 1967 में देसाई ने इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल में उप-प्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्रालय के प्रभारी मंत्री के रूप में शामिल हुए और  जुलाई 1969 में  इंदिरा गांधी ने उनसे वित्त मंत्रालय का प्रभार वापस ले लिया. देसाई ने इस बात को माना कि प्रधानमंत्री के पास सहयोगियों के विभागों को बदलने का विशेषाधिकार है लेकिन उनके आत्म-सम्मान को इस बात से ठेस पहुंची कि  इंदिरा गांधी ने इस बात पर उनसे परामर्श करने का सामान्य शिष्टाचार भी नहीं दिखाया. इसीलिए  उन्हें यह लगा कि उनके पास भारत के उप-प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा था.

वर्ष 1969 में कांग्रेस पार्टी के विभाजन के बाद देसाई कांग्रेस संगठन के साथ ही रहे. वे आगे भी पार्टी में मुख्य भूमिका निभाते रहे. वे वर्ष 1971 में संसद के लिए चुने गए. वर्ष 1975 में गुजरात विधानसभा के भंग किये जाने के बाद वहां चुनाव कराने के लिए वे अनिश्चितकालीन उपवास पर चले गए. परिणामस्वरूप जून 1975 में वहां चुनाव हुए. चार विपक्षी दलों एवं निर्दलीय उम्मीदवारों के समर्थन से गठित जनता दल ने विधानसभा में पूर्ण बहुमत प्राप्त कर लिया. इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा इंदिरा गांधी के लोकसभा चुनाव को निरर्थक घोषित करने के फैसले के बाद देसाई ने माना कि लोकतांत्रिक सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए इंदिरा गांधी को अपना इस्तीफा दे देना चाहिए था.

आपातकाल घोषित होने के समय 26 जून 1975 को  देसाई को गिरफ्तार कर हिरासत में लेकर उन्हें एकान्त कारावास में रखा गया था और लोकसभा चुनाव कराने के निर्णय की घोषणा से कुछ पहले 18 जनवरी 1977 को उन्हें मुक्त कर दिया गया. उन्होंने देशभर में पूरे जोर-शोर से अभियान चलाया एवं छठी लोकसभा के लिए मार्च 1977 में आयोजित आम चुनाव में जनता पार्टी की जबर्दस्त जीत में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी. देसाई गुजरात के सूरत निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा के लिए चुने गए थे. बाद में उन्हें सर्वसम्मति से संसद में जनता पार्टी के नेता के रूप में चुना गया एवं 24 मार्च 1977 को उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली.दो साल के राजनीतिक तनाव और जनता पार्टी के गठबंधन में दरारों को देखते हुये साथ ही संसद में अविश्वास प्रस्ताव से बचने के लिए देसाई ने 15 जुलाई 1979 को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफे की घोषणा कर दी.

अभिनेत्री वर्षा उसगांवकार:-

वर्षा का जन्म 28 फरवरी 1968 को गोवा हुआ था और वर्षा उसगांवकर ने अपने अभिनय की शुरुवात मराठी फिल्मो से ही की थी.वर्षा की मातृभाषा कोंकणी है. उनके पिता गोवा के विधानसभा के पूर्व स्पीकर थे.

वर्षा उसगांवकर ने मराठी फिल्मो में अपार सफलता पाने के बाद बॉलीवुड की तरफ का रुख किया और बॉलीवुड में भी वर्षा को अपार सफलता मिली और उनकी खूबसूरती और अभिनय की वजह से लोगो के द्वारा वर्षा उसगांवकर को काफी पसंद किया गया और उन्होंने एक से एक हिट फिल्मे मिलती गयी.

बॉलीवुड के मशहूर म्यूजिक डायरेक्टर रवि शंकर शर्मा के बेटे हरिशंकर से वर्षा की शादी की गई थी. बताते चलें कि, 90 के दशक में वर्षा की खूबसूरती और उनकी एक्टिंग का हर कोई दीवाना था. बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाने के बाद और मराठी फिल्मो में अपनी खास पहचान बनाने के बाद वर्षा उसगांवकर ने छोटे पर्दे की तरफ रुख किया तो उस वक्त ऐसा लगा की अब तो टीवी इण्डस्ट्रीज की जानी मानी अभिनेत्रियो की छुट्टी हो जाएगी. छोटे पर्दे के कई चर्चित शो जमाई राजा, रानी लक्ष्मीबाई में वर्षा ने बहुत ही खूबसूरती से अभिनय किया जिसकी वजह से उनके काम को काफी सराहा भी गया.