व्यक्तित्त्व

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विष्णु सखाराम खांडेकर मराठी भाषा के साहित्यकार थे वहीं, बांग्ला फ़िल्मों के अभिनेता और प्रथम व्यक्ति हैं जिन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार दिया गया था.फोटो :- गूगल.

भारतीय इतिहास के स्वर्ण पन्नों में आज की तारीख कई मायनो में अद्वितीय है. प्रसिद्ध मराठी भाषा के साहित्यकार विष्णु सखाराम खांडेकर, अभिनेता सौमित्र चटर्जी, समाज सुधारक जी० सुब्रह्मण्यम अय्यर का जन्म हुआ था.

विष्णु सखाराम खांडेकर:-

विष्णु सखाराम खांडेकर का जन्म 19 जनवरी, 1898 को महाराष्ट्र के सांगली ज़िले में हुआ था.  वे मराठी भाषा के सुप्रसिद्ध साहित्यकार व मेधावी छात्र थे. नौ वर्ष बाद विष्णु सखाराम खांडेकर का ‘मनु मनेरीकर’ से विवाह हुआ था. स्कूल के दिनों में खांडेकर को नाटकों में काफी रूचि थी और उन्होंने कई नाटकों में अभिनय भी किया. वर्ष 1913 में बंबई विश्वविद्यालय से मैट्रिक में अच्छे अंकों से वे उत्तीर्ण होकर फ़र्ग्युसन कॉलेज(पुणे) में प्रवेश लिया. इसी दौरान उनके पिता का देहांत हो गया. उन्होंने अध्यापन को अपना पेशा बनाया और वर्ष 1938 तक स्कूल में अध्यापन कार्य किया.

वर्ष 1938 में खांडेकर कोल्हापुर आकर फ़िल्म निर्माता-निर्देशक, अभिनेता मास्टर विनायक के लिए फ़िल्मी पटकथा लिखने में लग गए.कुछ वर्षों बाद पटकथा लेखन से उनकी रुचि हट गई और फिर वह अपने लेखन-कार्य में संलग्न हो गए.वर्ष 1941 में खांडेकर को ‘मराठी साहित्य सम्मेलन’ का अध्यक्ष चुना गया. उनकी रचनाओं पर मराठी में ‘छाया’, ‘ज्वाला’, ‘देवता’, ‘अमृत’, ‘धर्मपत्नी’ और ‘परदेशी’ आदि फ़िल्में भी बनीं साथ ही ‘ज्वाला’, ‘अमृत’ और ‘धर्मपत्नी’ नाम से हिन्दी भाषा में भी फ़िल्में बनाई गईं.

विष्णु सखाराम खांडेकर को अनेक पुरस्कार और  सम्मान मिलें जिनमे…

  • ययाति के लिए उन्हें साहित्य अकादमी ने भी पुरस्कृत किया और बाद में फ़ेलोशिप भी प्रदान की.
  • भारत सरकार ने साहित्यिक सेवाओं के लिए पद्मभूषण उपाधि से अलंकृत किया.
  • ज्ञानपीठ पुरस्कार द्वारा सम्मानित होने वाले वह प्रथम मराठी साहित्यकार थे.
  • भारत सरकार ने विष्णु सखाराम खांडेकर के सम्मान में 1998 में एक स्मारक डाक टिकट भी जारी किया था.

सौमित्र चटर्जी:-

सौमित्र चटर्जी का जन्म 19 जनवरी 1935 को बंगाल में हुआ था.उनका वास्तविक नाम उत्तम कुमार था. वो  बांग्ला फ़िल्मों के एक प्रसिद्ध अभिनेता और प्रथम व्यक्ति हैं जिन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार दिया गया था. वो रंगमंच से भी जुड़े हुये थे.

सौमित्र चटर्जी ने सत्यजीत रे की 14 फ़िल्मों में अभिनय किया और लम्बे समय तक सत्यजीत रे के साथ काम किया. उन्होंने वर्ष 1959 में सत्यजीत रे की फ़िल्म ‘अपूर संसार’ से अपना कैरियर शुरू किया था. इसके बाद उन्होंने ‘देवी’ ‘चारुलता’ और ‘घरे बाइरे’ में भी अभिनय किया. बताते चलें कि फ़िल्मकार सत्यजित रे और अभिनेता सौमित्र चटर्जी की जोड़ी की तुलना हॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता-निर्देशक जो़डी अकीरा कुरोसोवा-तोशिरो मिफ्यून और मार्केलो मास्ट्रोइयान्नी-फेडेरिको फेलिनो से की जानी लगी थी. सौमित्र ने सत्यजीत रे के अलावा मृणाल सेन, तपन सिन्हा और तरुण मजुमदार सहित कई अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त निर्देशकों के साथ भी काम किया. सौमित्र चटर्जी को कला के क्षेत्र का फ्रांस का सर्वोच्च पुरस्कार “द ऑफिसर डेस आर्ट्स एट मेटियर्स” तथा इटली से लाइफ टाइम अचीवमेंट पुस्कार भी मिला है.

जी० सुब्रह्मण्यम अय्यर:-

जी० सुब्रह्मण्यम अय्यर का जन्म 19 जनवरी1855 में तिरुवायुर में सनातनी ब्राह्मण परिवार में हुआ था. उन्होंने तंजौर में शिक्षा प्राप्त की थी. शिक्षा पूर्ण करने के बाद जी. सुब्रह्मण्यम अय्यर आंग्ल-वर्नाक्यूलर स्कूल में प्रधानाध्यापक बन गए. अय्यर ने आर्य हाईस्कूल की भी स्थापना की थी.

अय्यर ने आपने ‘हिंदू’ तथा ‘स्वदेश मित्रम’ नामक समाचार पत्र निकाल कर  तमिलनाडु में राष्ट्रीयता की भावना उत्पन्न करने का प्रयास भी किया. उन्होंने  सामाजिक समानता पर बल दिया तथा स्त्रियों की स्थिति में सुधार पर बल दिया. उन्होंने भारत से ब्रिटेन में होने वाली धन की निकासी के संबंध में आंकड़े दिए तथा भारत में ब्रिटिश शासन के स्वरूप की आलोचना भी की थी. अय्यर एक समाज सुधारक भी थे और लघु उद्योगों को बढ़ावा दिए जाने के समर्थक भी थे.