व्यक्तित्त्व-05…

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शंभुनाथ डे ने हैजे की बीमारी के कर्ण व टीके की खोज की थी वहीं, महक चहल भारतीय नोर्वेयाई बॉलीवुड अभिनेत्री हैं.फोटो:-गूगल.

अवतार किशन हंगल:-

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाले अवतार किशन हंगल का जन्म 01 फ़रवरी, 1917, को कश्मीरी पंडित परिवार के अविभाजित भारत में पंजाब राज्य के सियालकोट में हुआ था. इनके पिता का नाम पंडित हरि किशन हंगल था. बताते चलें कि, कश्मीरी भाषा में हिरन को हंगल कहा जाता है.

हंगल हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता एवं दूरदर्शन कलाकार थे और उन्हें फ़िल्म ‘परिचय’ और ‘शोले’ में अपनी यादगार भूमिकाओं के लिए जाना जाता है. कश्मीरी ब्राह्मणों का यह परिवार बहुत पहले लखनऊ में बस गया था. लेकिन हंगल साहब के जन्म के डेढ़-दो सौ साल पहले वे लोग पेशावर चले गये थे. इनके दादा के एक भाई  जस्टिस शंभुनाथ पंडित, जो बंगाल न्यायालय के प्रथम भारतीय जज बने थे.

इनका बचपन पेशावर में गुजरा, यहां उन्होंने थिएटर में अभिनय किया. अपने जीवन के शुरुआती दिनों में, जब वे कराची में रहते थे, वहां उन्होंने टेलरिंग का भी काम किया है.पिता के सेवानिवृत्त होने के बाद पूरा परिवार पेशावर से कराची आ गया. वर्ष 1949 में भारत विभाजन के बाद ए० के० हंगल 21 वर्ष की उम्र में 20 रूपये लेकर मुंबई चले आए.

बताते चलें कि, भारत की आज़ादी की लड़ाई में भी इनकी भागीदारी थी, वर्ष 1930-47 के बीच स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रहे और दो बार जेल भी गए.स्वतंत्रता संग्राम के दौरान पेशावर में काबुली गेट के पास एक बहुत बड़ा प्रदर्शन हुआ था, जिसमें हंगल साहब भी उपस्थित थे. अंग्रेजों ने अपने सिपाहियों को प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का हुक्म दिया था, लेकिन चंदर सिंह गढ़वाली के नेतृत्व वाले उस गढ़वाल रेजीमेंट की टुकड़ी ने गोली चलाने से इनकार कर दिया था.भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फाँसी से बचाने के लिए चलाये गये हस्ताक्षर अभियान में भी वे शामिल थे. किस्सा-ख्वानी बाज़ार नरसंहार के दौरान उनकी कमीज ख़ून से भीग गयी थी.

ए० के० हंगल 50 वर्ष की उम्र में हिंदी सिनेमा में आए. उन्होंने 1966 में बासु चटर्जी की फ़िल्म ‘तीसरी कसम’ और ‘शागिर्द’ में काम किया. 70, 80 और 90 के दशकों में उन्होंने प्रमुख फ़िल्मों में पिता या अंकल की भूमिका निभाई. हंगल ने फ़िल्म शोले में रहीम चाचा (इमाम साहब) और ‘शौकीन’ के इंदर साहब के किरदार से अपने अभिनय की छाप छोड़ी. इंडियन पीपुल्स थिएटर एसोसिएशन (इप्टा) के साथ बढ़-चढ़कर काम करने वाले हंगल ने 139 से अधिक फिल्‍मों में अपने अभिनय कौशल का लोहा मनवाया है. इनके प्रमुख रोल फ़िल्म ‘नमक हराम’, शौकीन, शोले, आईना, अवतार, अर्जुन, आंधी, तपस्या, कोरा कागज, बावर्ची, छुपा रुस्तम, चितचोर, बालिका वधू, गुड्डी, नरम-गरम में रहे. इनके बाद के समय में यादगार किरदारों में वर्ष 2002 में शरारत, 1997 में तेरे मेरे सपने और 2005 में आमिर खान के साथ लगान में नज़र आए थे. अवतार किशन हंगल को वर्ष 2006 में उन्हें भारत सरकार ने पद्मभूषण से नवाजा था.

कुश्ती पहलवान सतपाल सिंह :-

सतपाल पहलवान का जन्म 1 फ़रवरी 1955 को  दिल्ली के बवाना गाँव में हुआ था. इनके पिता का नाम चौधरी हुकुम सिंह व माता परमेश्वरी देवी था. सतपाल के पिता भी पहलवान थे जो कभी भी अपने गाँव से बहार पहलवानी नहीं की. वो स्वयं गुरु हनुमान के शिष्य रह चुके थे.

पांच वर्ष की उम्र में सतपाल को स्कूल भेजा गया.इसके बाद सतपाल को अगामी पढ़ाई के लिए दस वर्ष की उम्र में बिरला स्कूल, कमला नगर, नई दिल्ली में भेजा गया.घर की आर्थिक स्थिति सही न होने के कारण सतपाल ने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी. सतपाल को बचपन से ही खेलों के प्रति काफ़ी रुझान था और वो काफ़ी साहसी बालक थे और शारीरिक रूप से वह खेलों के अनुकूल थे.बचपन में खेल की बारिकियां अपने पिता से सीखीं और बाद में उनके गुरु हनुमान हुये.

वर्ष 1982 के एशियाई खेलों के स्वर्ण विजेता रह चुके हैं सतपाल। बताते चलें कि, उन्होंने अपने स्कूल में 35 किलो भार वर्ग में पहला स्थान प्राप्त किया था. उसके बाद गुरु हनुमान का विशेष आशीर्वाद उन्हें मिलना शुरू हो गया. उसके बाद उन्हें पदकों के मिलने का भी सिलसिला शुरू हो गया. वर्ष 1972 में  उनका चयन ओल्य्म्पिक गेम में हो गया.वर्ष 1974 में सतपाल का चयन एशियाई खेलो में हुआ.उन्होंने कांस्य पदक जीता जिसके परिणाम स्वरूप इनको भारत सरकार ने अर्जुन पुरुस्कार से सम्मानित किया था. वर्ष 1975 में इन्होने मात्र 19 वर्ष की उम्र में भारत केसरी का ख़िताब जीता जो उस समय भारत का सबसे बड़ा ख़िताब माना जाता था. वर्ष 1982 में दिल्ली में आयोजित एशियाई खेलों में इन्होने विश्व चैम्पियनों को हराकर स्वर्ण पदक जीता. इन्होंने एक दिन में 21 कुश्तियां जीतकर एक रिकॉर्ड भी कायम किया था. वर्ष 1983 में सतपाल को पद्मश्री से सम्मानित किया गया था. वर्तमान समय में वो दिल्ली में पहलवानों को प्रशिक्षण देते हैं साथ ही दिल्ली के शिक्षा विभाग में उप शिक्षा निदेशक पद पर कार्य कर रहे हैं. ज्ञात है कि, ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार भी उनके शिष्य रहे हैं.

ब्रह्मानन्दम कनगनती:-

ब्रह्मानन्दम का जन्म 1 फ़रवरी 1956 को सत्तेनापल्लि, गुन्टूर जिला, आन्ध्र प्रदेश में हुआ था.ब्रह्मानंदम का पूरा नाम ब्रह्मानंदम कन्यकांति हैं.इनके पिता का नाम नागालिंगाचारी और माता का नाम लक्षमीनरसम्मा है. ब्रह्मानन्दम भारतीय फिल्म अभिनेता और हास्य कलाकार है.

ब्रह्मानन्दम के परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने केबाद भी इन्होने पोस्ट ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई की. इनका नाम जीवित अभिनेताओं में सबसे अधिक फिल्में करने के कारण गिनीज़ पुस्तक में दर्ज हुआ है.यह मुख्य रूप से तेलुगू फिल्मों में काम करते हैं. इन्होने अबतक एक हजार से अधिक फिल्मों में काम किया है.साउथ की ज्यादातर फिल्मों में ब्रह्मानंद नजर आते हैं. इनकी कॉमेडी लोगों को बहुत अच्छी लगती है.ज्यादातर फिल्मों में इन्होंने कॉमेडी का ही  किरदार निभाया है.

ब्रह्मानंदम के करियर की शुरुआत  तेलगू लेक्चरर से हुआ था. कॉलेज में वे अक्सर छात्रों को मिमिक्री कर हंसाया करते थे. फ़िल्मी कैरियर की शुरुआत ‘चन्ताबाबाई’ नाम की फिल्म से हुई, फिल्म में उनका बेहद छोटा रोल था. लेकिन लोगों ने उनकी एक्टिंग की खूब सराहना की.अमिताभ बच्चन की फिल्म सूर्यवंशम में भी ब्रह्मानंदम नजर आए थे, वो इस फिल्म में डॉक्टर की एक छोटी भूमिका में दिखे थे. ब्रह्मानन्दम को भारतीय सिनेमा में अपने योगदान करने के कारण वर्ष 2009 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया है.

जैकी श्रॉफ़:-

जैकी श्रॉफ़ का जन्म 1 फ़रवरी 1957 में एक गुजराती परिवार में हुआ था.इनका वास्तविक नाम जयकिशन कटुभाई श्रॉफ है, इनके पिता का नाम कटुभाई व माता का नाम रीटा श्रॉफ है.

जैकी श्रॉफ़ फ़िल्मों में आने से पहले इन्होने कुछ विज्ञापनों में एक मॉडल के रूप में काम किया था. जैकी को सबसे पहले देव आनंद साहब की फ़िल्म स्वामी दादा में एक छोटी सी भूमिका मिली।

वर्ष 1983 में निर्माता निर्देशक सुभाष घई ने फिल्म हीरों में प्रमुख भूमिका प्रदान की थी और रातों रात एक बड़े सितारे बन गए. इनकी प्रसिद्ध फ़िल्में हैं… स्‍वामी दादा, हीरो, अंदर बाहर, युद्ध, तेरी मेहरबानियां, पाले खां, अल्‍लाह रख्‍खा, कर्मा, जवाब हम देंगे, काश, राम लखन, परिंदा, मैं तेरा दुश्‍मन, त्रिदेव, वर्दी, दूध का कर्ज, सौदागर, किंग अंकल, खलनायक, गर्दिश, त्रिमूर्ति, रंगीला, बंदिश, अग्निसाक्षी, बॉर्डर, बंधन, रिफयूजी, मिशन कश्‍मीर, फर्ज, यादें, लज्‍जा, देवदास, ऑन-मेन एट वर्क, हलचल, क्‍योंकि, भूत अंकल, भागमभाग, किसान, वीर, शूटआऊट एट वडाला, धूम 3, हैप्‍पी न्‍यू ईयर, डर्टी पॉलीटिक्‍स.

जैकी को फिल्‍म ‘परिंदा’ के लिए सर्वश्रेष्‍ठ अभिनेता का फिल्‍मफेयर पुरस्‍कार मिला तो वहीं फिल्‍म ‘खलनाय‍क’ के लिए उन्‍हें फिल्‍मफेयर पुरस्‍कार में सर्वश्रेष्‍ठ सहायक अभिनेता के तौर पर नामां‍कित किया गया.वर्ष 2007 में जैकी को भारतीय सिनेमा में उत्कृष्ट योगदान के लिए विशेष न्यायाधीश जूरी पुरस्कार से भी सम्‍मानित किया गया.

अजय जडेजा:-

अजय जडेजा का जन्म 01 फ़रवरी 1971 को जामनगर, गुजरात में जड़ेजा राजपूत परिवार में हुआ था. उनका पूरा नाम अजयसिंहजी दौलतसिंह जड़ेजा है. उन्होंने वर्ष 1992 से 2000 तक भारतीय क्रिकेट टीम के नियमित खिलाड़ी थे उन्होंने 15 टेस्ट मैच और 196 एकदिवसीय मैच खेले.

जडेजा को भारतीय क्रिकेट की मधुर मुस्कान कहा जाता था. 90 के दशक में क्रिकेट में जिन खिलाड़ियों को ‘स्टाइलिश’ के खिताब से नवाज़ा जाता था.जडेजा ने बैटिंग से बहुत मैच जिताए इंडिया को लेकिन एक मैच सिर्फ उनकी गेंदबाज़ी के लिए याद किया जाएगा. उस मैच में उन्होंने अपनी टीम, विपक्षी टीम और भारतीय क्रिकेटप्रेमियों के साथ-साथ खुद को भी हैरान कर दिया था. 09 अप्रैल 1999 को हुआ ये मैच आज भी यादों में ताज़ा है.

जडेजा को मैच फ़िक्सिंग के कारण 5 वर्ष के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था. उनके प्रतिबंधित करने को 27 जनवरी 2003 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने अभिखंडित करना करते हुए उन्हें घरेलू और अन्तराष्ट्रीय क्रिक्रेट खेलने के योग्य करार दिया था.

शंभुनाथ डे:-

शंभुनाथ डे का जन्म 01 फ़रवरी 1915 को ग़रीबटी नामक गाँव, हुगली ज़िला, पश्चिम बंगाल में हुआ था.इनके पिता दशरथी डे तथा माता छत्तेश्वरी एक साधारण परिवार से थे.पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने परिवार की जिम्मेदारी स्वयं सम्भाली. शंभुनाथ डे के चाचा परिवार में एकमात्र शिक्षित व्यक्ति थे.

वर्ष 1940 के दौर में भारत में हैजे के कारण होने वाली मौतों की संख्या काफी ज्यादा हुआ करती थी.इनसे दु:खी होकर शंभुनाथ डे ने हैजे के ऊपर शोध करना शुरू किया था. बताते चलें कि, शंभुनाथ डे उस समय लंदन स्थित यूनिवर्सिटी कॉलेज हॉस्पीटल मेडिकल स्कूल में आधिकारिक तौर पर दिल की बीमारी से संबंधित एक विषय पर शोध कर रहे थे.

शंभुनाथ डे कलकत्ता मेडिकल कॉलेज के पेथोलॉजी विभाग के पूर्व निदेशक और शोधकर्ता थे. डे ने ही पता लगाया था कि हैजे के जीवाणु द्वारा पैदा किया गया एक ज़हर शरीर में पानी की कमी और रक्त के गाढ़े होने का कारण बनता है, जिसके कारण आखिरकार हैजे के मरीज की जान चली जाती है. उन्होंने कई दिक्कतों और मुसीबतों के बाद भी कोलकाता के बोस संस्थान में यह बेहद ज़रूरी और खास मानी जाने वाली खोज की थी. साधनों की कमी के बावजूद भी उन्होंने हैजे के जीवाणु द्वारा पैदा किए जाने वाले जानलेवा टॉक्सिन के बारे में पता लगाया था.

शंभुनाथ डे को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने काम के लिए पहचान मिली. उन्हें ‘नोबेल पुरस्कार’ के लिए नामांकित भी किया गया. उनका नामांकन मशहूर वैज्ञानिक जोशुहा लेडरबर्ग ने किया था.

महक चहल:-

महक चहल का जन्म सिख परिवार में 01 फ़रवरी 1979 को हुआ था. वह मूल रूप से पंजाबी लड़की है और उनका असली नाम रसप्रीत कौर चहल है. महक चहल एक भारतीय नोर्वेयाई बॉलीवुड अभिनेत्री हैं. इन्होंने अब तक कई हिन्दी, तेलुगू, बंगाली, पंजाबी और नोर्वेयाई आदि भाषाओं में बनी फ़िल्मों में काम कर चुकी हैं.

इसके अलावा महक ने कई धारावाहिकों में भी काम किया है. महक ने अपने करियर की शुरुआत बतौर अभिनेत्री फिल्म नई पड़ोसन से की थी.इसके बाद वह करीना कपूर स्टारर फिल्म चमेली में एक आइटम सांग किया.महक ने कलर्स के बहुचर्चित शो बिग बॉस सीजन5 का भी हिस्सा रह चुकीं हैं.इसके बाद महक  बिगबॉस सीजन आठ सेलिब्रिटी गेस्ट के तौर पर भी नजर आ चुकीं हैं. हिंदी फिल्मों के अलावा पंजाबी फिल्मों में बतौर सहायिका कई फिल्मों में काम किया है.