विश्व की महिलाओं को एक मंच पर लाने की कोशिश…

विश्व की महिलाओं को एक मंच पर लाने की कोशिश…

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बदलते समय में यह आवश्यक हो गया है कि नारी अपने अस्तित्व की पहचान स्वयं के दृष्टिकोण से करे.

मंगलवार को पटना स्थित मगध महिला कॉलेज में महिला शक्ति शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया. इस शिखर सम्मेलन का विषय था“भविष्य की आशा को प्रज्वलित करने में महिलाओं का योगदान”. इस  सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य “ममता मातृत्व माहिसासुरमर्दिनी” भाव पर आधारित है. इस कार्यक्रम के आयोजन का मुख्य उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में ख्यातिप्राप्त महिलाओं की उपलब्धियों की प्रेरक जीवन-यात्रा की झांकी, महत्त्वपूर्ण समसामयिक विषयों पर समूह-परिचर्चा एवं व्याख्यान द्वारा गिग इकोनोमी में प्रवेश कर रहे वर्तमान भारत और भविष्य के भारत को ज्ञान महाशक्ति के रूप में स्थापित करने हेतु आज की युवा महिलाओं को प्रेरित करना है. मगध महिला कॉलेज के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर यह शिखर सम्मेलन करीब 12 घंटे तक चली साथ ही  इस आयोजन में कॉलेज के 14 स्मार्ट क्लास रूम एवं छात्राएं अपने मोबाइल के माध्यम से जुड़ी रहीं.

मुख्य अतिथि मेनका गांधी, माननीय पूर्व कैबिनेट मंत्री, भारत सरकार, विशिष्ट अतिथि प्रो० सुनयना सिंह, वीसी, नालंदा विश्वविद्यालय एवं डॉ० जेनिस दरबारी, माननीय कनसुलेट जेनरल रिपब्लिक मॉन्टेनिग्रो ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुये कहा कि, नारी सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ है  “नारी का स्वयं से परिचय से है”. अब तक नारी स्वयं की परख परिवार या समाज की दृष्टि से करती आयी है किन्तु, बदलते समय में यह आवश्यक हो गया है कि नारी अपने अस्तित्व की पहचान स्वयं के दृष्टिकोण से करे. नारी सशक्तिकरण का अर्थ केवल आर्थिक रूप से सशक्त होना नहीं है वरन परिवार या समाज की छाया के बंधन से मुक्त हो कर स्वयं के व्यक्तित्व निर्माण से है. महिला शक्ति शिखर सम्मेलन महिलाओं को समाज में उचित पहचान दिलाने, उनके अस्तित्व को स्वीकारने तथा उनकी योग्यता को पुरस्कृत करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है. यह एक ऐसा मंच है जहाँ विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धि प्राप्त करने वाली महिलायें अपने अनुभवों और विचारों से आधी आबादी को अपनी अस्मिता को पहचानने के लिए प्रेरित करती है. इसका आयोजन बिहार के संदर्भ में ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ की नारियों के व्यक्तित्व में उनके परिवार या समाज की परछाई दिखती है. इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य महिलाओं का व्यक्तित्व-निर्माण, निर्णय लेने की क्षमता का विकास, सही-गलत की पहचान करना तथा विभिन्न क्षेत्र के विविध आयामों से अवगत कराना है.

कार्यक्रम के दूसरे सत्र का संचालन डॉ. थॉमस डेफरेन ने किया. इस सत्र में विश्व बौद्धिक मंच एवं ट्रांस ब्रह्म के सौजन्य से 6 वक्ताओं अलेली पेरो अंब्रोसी, अर्जेंटीना,यात्री और लेखक, प्रो० शशि शर्मा, प्रिंसिपल, मगध महिला कॉलेज पटना, डॉ० एस० मुखर्जी, अध्यक्ष एंसेंबल भूगोलविद, डॉ० कनु मेघा दुबई, मानसिक चिकित्सक, प्रो० अंजुम फातिमा, सामाजिक क्रूसेडर, हेलेना लोरेंत्जन, मोनाको, राष्ट्र अध्यक्ष ,वैश्विक शांति कड़ी, ने  क्रमशः यात्री और खोजकर्ता के रूप में महिला, वैश्विक उथल पुथल में शांति और महिला प्रशासक, आधी आबादी, महिला और इतिहास में वैज्ञानिक प्रकृति, एकीकृत अर्थव्यवस्था के रूप में सामाजिक उत्थान, मानवता शक्ति के रूप में  योग और ध्यान विषयों पर व्याख्यान दिया.

कार्यक्रम के तीसरे सत्र का संचालन अन्या रीबकोव यूक्रेन, क्रिस्टीना इवन्तसाव, चेक गणराज्य ने किया. इस सत्र में Allatara (International Online Television) के सौजन्य से कुल छ्ह वक्ताओं में रेन लिन, वॉयस फॉर इंडिया, लेजली सैनन, ट्रेंड स्काउटिंग, नोकिया, अन्या ठक्कर, उद्यमी, ओल्गा कोवतुन, Allatra टीवी, कार्यकर्ता, एलेक्जेंड्रा चेक, आईपीएम कार्यकर्ता, कैरोलिना हरॉनोवा, कार्यकर्ता Allatra,  चेक गणराज्य ने शांति और रचनात्मकता के विश्व शत्रु के लिए धारणा प्रबंधन, प्रोद्योगिकी का भविष्य और स्त्री अनुभव, रचनात्मक अवसर की ओर झुकाव, शांति के आधार के विविध आयाम विषयों पर परिचर्चा की गई.

इस शिखर की परिकल्पना विश्वविख्यात भू-वैज्ञानिक एवं रणनीतिक विचारक के.सिद्धार्थ ने की. विश्व के सभी महाद्वीपों में विभिन्न क्षेत्रों में अपने योगदान दे रही महिलाओं को एक प्लेटफार्म पर आमंत्रित कर इस शिखर सम्मेलन को सफल बनाने में के.सिद्धार्थ ने अहम भूमिका निभाई. इस कार्यक्रम में विश्व के लगभग सभी महाद्वीपों से 20000  से भी अधिक दर्शकों ने भाग लिया.

मो० होदा.