विरासत…

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ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत की बात की जाय तो भारत देश के कई   राज्यों का नाम आता है. उन्ही राज्यों में एक राज्य है बिहार. वैसे तो देखा जाय तो राज्य बिहार के कई जिले ऐसे भी है जिंनका वर्णन रामायण और महाभारत काल से जुड़ा हुआ है. आइये आज हम आपको रामायण और महाभारत काल से जुड़े एक ऐसे जिले की बात कर रहें जिसे वर्तमान समय में आरा के नाम से जानते हैं. बताते चलें कि, महाभारत काल में आरा को आरण्य प्रदेश के नाम से भी जाना जाता था. आरा से एक नाम और भी जुड़ा है जो 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सिपाही और महानायक थे और उनका नाम है बाबू वीर कुँवर सिंह.

प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू वीर कुँवर सिंह कुछ ऐसे रास्तों का उपयोग करते थे जो आमतौर दिखाई नहीं देता था या यूं कहें कि गुप्त रास्ते थे.इन्हीं गुप्त रास्तों में एक रास्ता था गौरैया कुंड का. गांगी (आर) से सिन्हा जाने वाली रोड पर स्थित है गौरैया मठ. मठ के पास ही एक कुंड है. गौरैया कुंड के पास ही एक छोटा शिव मंदिर था जिसे स्थानीय लोगों के सहयोग से पुनर्निर्माण किया गया है. स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार गौरैया मठ के महंत मधुवन दास को कुंड में किसी ने स्नान करते हुये नहीं देखा था. गौरैया मठ के महंत मधुवन दास मठ के गुप्त रास्ते से गौरैया कुंड में आकर स्नान कर उसी रास्ते वापस हो जाते थे.   

गौरैया मठ करीब छ्ह एकड़ में फैला हुआ है. स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार गौरैया मठ कैंपस में साँप किसी को नहीं काटता है और भूलवश किसी को काट ले तो उस व्यक्ति को कभी मृत्यु नहीं होती है. स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, गौरैया कुंड में सात कुएं थे. उन सात कुओं में एक कुआं ऐसा था जिसमें जल था बाकी छ्ह कुओं में से रास्ते निकले हुये थे. इन छ्ह कुआं में एक कुआं ऐसा भी था जो वर्तमान समय में स्थित महाराजा कॉलेज कैंपस स्थित बाबू वीर कुँवर सिंह के गुफा द्वार में निकलता था. स्थानीय ग्रामीणों से बातचीत करने पर बताया कि…         

साथ ही महाराजा कॉलेज के प्रोफेसर ने बताया की….  

संकलन :- भास्कर और दिलीप.

Video Link :- https://youtu.be/vRrox8SiP90