राष्ट्रीयता लुप्त हो रही है साथ ही ईमानदारी का जनाजा भी निकल...

राष्ट्रीयता लुप्त हो रही है साथ ही ईमानदारी का जनाजा भी निकल रहा है:- प्रो. पासवान

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गणतंत्र के इतनी लंबी अवधि व्यतीत होने के उपरांत भी आज मेहनतकशो को दो गज ननगिलाट की गारंटी नहीं मिल रही है.छायाचित्र :- प्रभाकर मिश्रा.

सोमवार को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर नगर परिषद स्थित आनंद विहार कॉलोनी सिरचंद  नवादा में भारतीय गणतंत्र के 72वें वर्ष और उपलब्धियां विषय पर परिचर्चा की अध्यक्षता केकेएम कॉलेज के राजनीतिक विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर सह एनएसएस के कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ देवेंद्र कुमार गोयल ने की.

इस अवसर पर केकेएम कॉलेज के अर्थशास्त्र के विभागाध्यक्ष एवं नवनिर्मित अखिल भारतीय किसान विकास संघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. प्रो. गौरी शंकर पासवान ने कहा कि गणतंत्र दिवस भारतीय इतिहास का उज्जवल दिन है. यह प्रेरणा, प्रतिज्ञा और अमर शहीदों का तर्पण त्योहार है. भारत  गणतंत्र के 72 बसंत देख चुका है और इतनी लंबी अवधि बीत जाने के बाद भारत ने भी अनेक उतार-चढ़ाव को देखा है. वर्तमान समय के भारत में औधोगिक, सामाजिक, आर्थिक, ज्ञान -विज्ञान और टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में काफी प्रगति कर ली है. खाद्यान्न के मामले में देश स्वावलंबी  बना साथ ही कई क्षेत्रों में क्रांति भी आई है. देश दुनिया में न्यू इंडिया की साख बढ़ी है. अतः आज हम संसार के हर क्षेत्र में गर्व से सिर उठाकर चल सकते हैं.

प्रो. पासवान ने कहा कि आज गणतंत्र के जलाशय का जलज जातिवाद और आतंकवाद की ज्वाला में जल रहा है. राष्ट्रीयता लुप्त हो रही है साथ ही ईमानदारी का जनाजा भी निकल रहा है.  सिद्धांतों की निर्मम हत्या हो रही है… भ्रष्टाचार शिष्टाचार बन चुका है…  नैतिकता के कवर हट चुके हैं…  मानवीय मूल्यों का मर्दन हो चुका है.  ऐसा लगता है कि एक बार फिर देश के भविष्य पर नीलामी और गुलामी का इश्तेहार सट चुका है.

उन्होंने कहा कि आश्चर्य और विडंबना है कि गणतंत्र के इतनी लंबी अवधि व्यतीत होने के उपरांत भी आज मेहनतकशो को दो गज ननगिलाट की गारंटी नहीं मिल रही है. अमीरों के महलों में खुशहाली है, किंतु गरीबों का पेट आज भी खाली है. उन्होंने कहा कि आज विश्व का सबसे बड़ा अहिंसक राष्ट्र भारत को ही हिंसा की मार सहनी पड़ रही है और शांति दूत भारत को अशांति का तमाचा लग रहा है. आज देश को पटेल के पौरुष और सुभाष के शौर्य की आवश्यकता है.

राष्ट्रीय कंप्यूटर साक्षरता केंद्र के निदेशक शैलेश कुमार ने कहा कि जिस भारत की पहचान विश्व गुरु के रूप में हुआ करती थी, आज उसी भारत की पहचान हत्या, लूट, गैंगरेप, विरोध, और प्रदर्शन के रूप में होने लगी है. राष्ट्रीय एकता, अखंडता,  स्वतंत्रता और गणतंत्र की अस्मिता आज भगवान भरोसे है. किंतु न्यू इंडिया में देश का नाम दुनिया बड़ी इज्जत से ले रही है. हमें भारत पर गर्व है.

सामाजिक कार्यकर्ता नितेश कुमार केसरी ने कहा कि वर्तमान भारत नूतन भारत है  गणतंत्र के सात दशकों में भारत का चतुर्दिक विकास हुआ है. आज अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, और फ्रांस के साथ पूरी दुनिया न्यू इंडिया की आर्थिक शक्ति और परमाणु शक्ति का लोहा मानने लगी है.

अध्यक्षीय प्रबोधन में प्रो. देवेंद्र कुमार गोयल ने कहा कि गणतंत्र के सात दशकों में न्यू इंडिया की उपलब्धियां सराहनीय है. आज भारत मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया, तथा फिट इंडिया के तहत तेजी से विकास की ओर अग्रसर है. आज देश की उपलब्धियां इतनी है कि हम शान  से गर्व कर सकते हैं.

इस मौके पर प्रो सत्यार्थ प्रकाश, प्रो सरदार राम, अधिवक्ता रामचंद्र, शिक्षक दिनेश मंडल, मंटू पासवान आदि ने कहा कि गणतंत्र दिवस एक राष्ट्रीय महापर्व है. इसे होली दिवाली जैसे त्योहारों की तरह मनाने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि सन 1947 में भारत को अंग्रेजी शासन से सिर्फ औपनिवेशिक और राजनीतिक स्वतंत्रता मिली थी, जो अधूरी थी किंतु पूर्ण स्वतंत्रता तब मिली जब 26 जनवरी 1950 को डॉ भीमराव अंबेडकर द्वारा लिखित भारतीय संविधान देश में लागू हुआ. हमारा देश भारत विश्व के मानचित्र में एक पूर्ण स्वतंत्र देश, पूर्ण स्वायत्तशासी,  सार्वभौमिक संप्रभु संपन्न राज्य घोषित हुआ.

प्रभाकर मिश्रा(जमुई).